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    Kisan Andolan: 37वें दिन पहुंचा किसानों का आंदोलन, दिल्ली से सटे बॉर्डर पर जमा हैं हजारों प्रदर्शनकारी

    By JP YadavEdited By:
    Updated: Fri, 01 Jan 2021 11:56 AM (IST)

    यूपी गेट पर चल रहा किसानों का आंदोलन पंजाबी भाषा समझ न आने पर दो भागों में बंटता दिखाई दे रहा है। यूपी के किसानों को अपनी बात समझाने के लिए मंच संचालक को भाषण का रूपांतरण करना पड़ रहा है।

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    किसान अपने स्थानीय नेताओं का सम्मान रखने के लिए नारे लगा रहे हैं।

    नई दिल्ली/सोनीपत/रेवाड़ी/गाजियाबाद। तीनों केंद्रीय कृषि कानूनों के विरोध में चल रहा पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों के किसानों का आंदोलन शुक्रवार को 37वें दिन में प्रवेश कर गया है। वहीं, किसान  प्रदर्शनकारी भीषण ठंड के बावजूद सिंघु, टीकरी, नोएडा औऱ दिल्ली-गाजीपुर बॉर्डर पर जमा हैं।  इससे दिल्ली-एनसीआर के लाखों वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, यूपी गेट पर चल रहा किसानों का आंदोलन पंजाबी भाषा समझ न आने पर दो भागों में बंटता दिखाई दे रहा है। यूपी के किसानों को अपनी बात समझाने के लिए मंच संचालक को भाषण का रूपांतरण करना पड़ रहा है। यूपी के विभिन्न जिलों से आए किसान अपने स्थानीय नेताओं का सम्मान रखने के लिए नारे लगा रहे हैं।

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    दिल्ली-जयपुर हाईवे पर शाहजहांपुर-जयसिंहपुर खेड़ा (राजस्थान-हरियाणा सीमा) बॉर्डर पर बृहस्पतिवार को धरने पर बैठे आंदोलनकारी किसानों ने हरियाणा पुलिस द्वारा लगाए गए बेरिकेड तोड़ दिए तथा आगे की ओर बढ़ गए। आंदोलनकारियों का कहना था कि वह दिल्ली जाकर ही रुकेंगे, लेकिन पुलिस व अर्धसैनिक बल के जवानों ने उन्हें हाईवे पर ही भूड़ला गांव के निकट रोक लिया। आंदोलनकारियों द्वारा बेरिकेड तोड़ने के कारण पुलिस को हल्के बल का प्रयोग भी करना पड़ा। पुलिस ने उन्हें वापस लौट जाने के लिए कहा, लेकिन आंदोलनकारियों ने भूड़ला के निकट भी पड़ाव डाल दिया है।

    पुलिस ने आंदोलनकारियों को गिरफ्तार करने की चेतावनी भी दी है। हाईवे पर स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। आंदोलनकारियों के आगे बढ़ने के कारण हाईवे पर यातायात पूरी तरह ठप हो गया। ट्रैफिक को साथ लगते रास्तों से निकाला जा रहा है और वहां पर भी जाम की स्थिति बनी हुई है। घंटों तक लोग जाम में फंसे रहे।

    वैसे आगामी कुछ दिनों में केंद्र सरकार और किसान संगठनों के बीच बातचीत होनी है, लेकिन दोनों ही के बीच तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग को लेकर गतिरोध  बना हुआ है। 

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