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    Happy Holi 2021: अपने अलग अंदाज में कुमार विश्वास ने दी लोगों को होली की बधाई, पढ़िये- क्या कहा

    By Jp YadavEdited By:
    Updated: Mon, 29 Mar 2021 07:19 AM (IST)

    Happy Holi 2021 Kumar Vishwas प्रेम कविताएं पढ़कर लोगों को अपना दीवाना बनाने वाले देश के चर्चित कवि कुमार विश्वास ने होली की बधाई देते हुए अपना एक वीड ...और पढ़ें

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    देश के चर्चित कवि कुमार विश्वास की फाइल फोटो।

    नई दिल्ली, ऑनलाइन डेस्क। Happy Holi 2021, Kumar Vishwas: कोरोना वायरस संक्रमण के बढ़ते खतरे और प्रभाव के मद्देनजर दिल्ली-एनसीआर समेत देशभर में लगातार दूसरे साल होली त्योहार अनुशासन के साथ मनाया जाएगा। महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, पंजाब के बाद दिल्ली में सत्तासीन आम आदमी पार्टी सरकार ने भी लोगों से सार्वजनिक रूप से होली नहीं मनाने की अपील की है।

    वहीं, प्रेम कविताएं पढ़कर लोगों को अपना दीवाना बनाने वाले देश के चर्चित कवि कुमार विश्वास ने होली की बधाई देते हुए अपना एक वीडियो शेयर किया है। जिसमें कुमार विश्वास होली पर लिखी अपनी स्वरचित कविता पढ़ते नजर आ रहे हैं।

    इस वीडियो को शेयर करने के साथ कवि कुमार विश्वास ने ट्वीट भी किया है- 'रंगोत्सव होली में, ख़ुशरंग गालों पर चढ़ने वाले मुहब्बत के गाढ़े गुलालों की चमक आपके जीवन को भी उतने ही चटख रंगों से परिपूर्ण करे ! उम्मीद है इस अवसर पर, यह विशेष गीत आप तक होली के रंगों को समग्रता के साथ पहुंचाएगा! “आज होलिका के अवसर पर...” #HappyHoli'

    वहीं, इससे पहले लोक गायिका मालिनी अवस्थी के ट्वीट को रिट्वीट करके कुमार विश्वास लिखा है- 'यह लोक-स्वीकृति सारे सम्मानों पर भारी है !कला की यह उत्तर-जीविता ही कलाकार की सर्जना का परम पारितोषिक है

    @maliniawasthi भौजी।

    “श्मशानेष्वाक्रीडा स्मरहर पिशाचाः सहचराः।

    चिता-भस्मालेपः स्रगपि नृकरोटी-परिकरः।।

    अमङ्गल्यं शीलं तव भवतु नामैवमखिलं।

    तथापि स्मर्तॄणां वरद परमं मङ्गलमसि।।”

    गौरतलब है कि होली पर कुमार विश्वास की एक और कविता भी चर्चित है, जिसे वह कई बार मंचों से पढ़ चुके हैं। इस कविता की सराहना भी हुई है। 

    इतनी रंग बिरंगी दुनिया, दो आंखों में कैसे आए,

    हमसे पूछो इतने अनुभव, एक कंठ से कैसे गाए

    ऐसे उजले लोग मिले जो, अंदर से बेहद काले थे,

    ऐसे चतुर मिले जो मन से सहज सरल भोले-भाले थे।

    ऐसे धनी मिले जो, कंगालो से भी ज्यादा रीते थे,

    ऐसे मिले फकीर, जो, सोने के घट में पानी पीते थे.

    मिले परायेपन से अपने, अपनेपन से मिले पराए,

    हमसे पूछो इतने अनुभव, एक कंठ से कैसे गाए

    इतनी रंग बिरंगी दुनिया, दो आंखों में कैसे आए