नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। एम्स में सोमवार को फेफड़ा प्रत्यारोपण की पूरी तैयारी थी। ब्रेन डेड घोषित बुजुर्ग के परिजनों ने फेफड़ा दान की स्वीकृति भी दे दी थी। प्रत्यारोपण के लिए मरीज व डॉक्टरों की टीम भी तैयार थी, लेकिन डॉक्टरों ने ब्रांकोस्कोपी जांच के बाद डोनर का फेफड़ा प्रत्यारोपण के योग्य नहीं माना। इस वजह से एम्स की तैयारी धरी रह गई। हालांकि एम्स प्रशासन का कहना है कि संस्थान फेफड़ा प्रत्यारोपण के लिए तैयार है। उपयुक्त डोनर मिलने पर प्रत्यारोपण शुरू कर दिया जाएगा।

दरअसल, एम्स लंबे समय से इस कोशिश में है कि संस्थान में फेफड़ा प्रत्यारोपण की सुविधा शुरू हो। इसके लिए एम्स ने लाइसेंस भी ले रखा है। लेकिन, अभी तक संस्थान में एक भी फेफड़ा प्रत्यारोपण नहीं हुआ है। दक्षिण भारत के कई अस्पतालों में फेफड़ा प्रत्यारोपण होता भी है। जबकि उत्तर भारत में अभी किसी अस्पताल में फेफड़ा प्रत्यारोपण नहीं हो सका है। हालांकि दिल्ली में एम्स के अलावा दो निजी अस्पताल भी यह सुविधा शुरू करने की कोशिश में हैं।

अंगदान में अभी हैं कई बाधाएं

एम्स के ऑर्बो की प्रभारी व संस्थान की प्रवक्ता डॉ. आरती विज ने कहा कि हाल के वर्षो में अंगदान के प्रति थोड़ी जागरूकता बढ़ी है। फिर भी अभी कई तरह की बाधाएं हैं। धार्मिक मान्यताएं भी आड़े आती हैं। इसलिए अंगदान के प्रति अभी और जागरूकता की जरूरत है।

देश में हर साल दो लाख लोगों को होती है किडनी, लिवर जैसे जरूरी अंगों की 

देश में हर साल करीब दो लाख लोगों को किडनी, 75 हजार मरीजों को लिवर, दो लाख लोगों को कॉर्निया व करीब 10 हजार मरीजों को दिल प्रत्यारोपण की जरूरत होती है। जबकि करीब 8000 मरीजों को किडनी, 1800 लिवर, 50 हजार कॉर्निया व 150-200 मरीजों के दिल का प्रत्यारोपण हो पाता है। इसका कारण अंगदान की कमी है।

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Posted By: Prateek Kumar

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