नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। गिलोय के बारे में फैलाई जा रही भ्रामक बातों को लेकर पंजाबी बाग स्थित अखिल भारतीय आयुर्वेद महासम्मेलन के सभागार में राष्ट्रीय आयुर्वेद विद्यापीठ भारत सरकार के वरिष्ठ गुरुओं के तत्वावधान में एक स्वास्थ्य संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें इंद्रप्रस्थीय वैद्य सभा के अध्यक्ष व वरिष्ठ आयुर्वेद चिकित्सक वैद्य ताराचंद शर्मा ने कहा कि इन दिनों गिलोय के बारे में भ्रम फैलाया जा रहा है, जो ठीक नहीं है। गिलोय का प्रयोग उसकी लताएं, तना व पत्ती को कूटकर क्वाथ, कसाय व घनवटी के रूप में किया जाता है।

गिलोय प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में करता है मदद

गिलोय प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के साथ-साथ प्राकृतिक रूप से इंसुलिन निर्माण में भी सहायक है। आयुर्वेद महासम्मेलन के संरक्षक सदस्य वैद्य अश्वनी शर्मा ने कहा कि गिलोय व्यक्ति की स्वास्थ्य रक्षा के साथ लंबी आयु प्रदान करती है। इस कारण इसे अमृता, जीवंती व रोग शमन करने के कारण संशमनी कहा जाता है।

कालाजार, मलेरिया के साथ पुराने बुखार को नष्ट करने में सहायक

राष्ट्रीय आयुर्वेद विद्यापीठ के गुरु एवं सदस्य वैद्य अच्युत कुमार त्रिपाठी ने कहा कि चरक संहिता, वेल्थ आफ इंडिया तथा नादकरणी की मटेरिया मेडिका के साथ इंडियन जनरल आफ एक्सपेरीमेंटल बायोलाजी में गिलोय को मलेरिया, कालाजार तथा पुराने बुखार को नष्ट करने की औषधि के रूप में उल्लेख है।

आयुष मंत्रालय ने किया था नि:शुल्क वितरण

गिलोय का क्वाथ के रूप में नियमित सेवन की बात प्रधानमंत्री विभिन्न कार्यक्रमों में कहते रहे हैं। आयुष मंत्रालय ने गिलोय घनवटी के साथ आयुष 64 को निश्शुल्क वितरण किया था। इस मौके पर महासम्मेलन के सचिव अवधेश श्रीवास्तव के अतिरिक्त इंद्रप्रस्थीय वैद्य सभा एवं दिल्ली के विभिन्न चिकित्सकों ने भाग लिया।

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Edited By: Prateek Kumar