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    भीतरघात से दिलचस्प हुआ दिल्ली चुनाव, AAP-BJP और कांग्रेस का सत्ता तक पहुंचना कितना कठिन? रिपोर्ट से समझिए समीकरण

    Updated: Fri, 24 Jan 2025 10:11 AM (IST)

    Delhi Vidhan Sabha Chunav 2025 में आप भाजपा और कांग्रेस के बीच त्रिकोणीय मुकाबला है। सभी पार्टियां लोकलुभावन वादों के सहारे सत्ता तक पहुंचने की आस लगा रही हैं। इस बार के चुनाव में सबसे अधिक चर्चा नई दिल्ली व कालकाजी सीट की हो रही है। नई दिल्ली से केजरीवाल तीन बार से चुनाव जीत रहे हैं। आगे विस्तार से पढ़िए पूरी रिपोर्ट।

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    दिल्ली विधानसभा चुनाव में तीन प्रमुख पार्टियों के बीच कांटे का मुकाबला होगा। फाइल फोटो

    संतोष कुमार सिंह, नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब चुनाव प्रचार में तेजी आने लगी है। सभी पार्टियों के नेता अपने प्रत्याशियों के लिए चुनाव प्रचार कर रहे हैं।

    पिछले दो विधानसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी और भाजपा के बीच आमने-सामने की लड़ाई थी, लेकिन इस बार त्रिकोणीय मुकाबला के आसार बन रहे हैं। इससे किसी भी पार्टी के लिए चुनावी लड़ाई आसान नहीं है। चुनाव प्रचार में इसकी झलक भी दिख रही है। तीनों पार्टियों में लोकलुभावन योजनाओं की घोषणा करने की होड़ लगी हुई है।

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    कांग्रेस व भाजपा के बीच थी सीधी लड़ाई 

    वर्ष 2008 तक के चुनाव में कांग्रेस व भाजपा के बीच सीधी लड़ाई थी। पहले एक चुनाव में भाजपा और उसके बाद लगातार तीन विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को जीत मिली। अब दिल्ली का चुनावी परिदृश्य बदल गया है। भ्रष्टाचार विरोधी अन्ना हजारे के आंदोलन से उपजी आम आदमी पार्टी वर्ष 2013 में पहली बार चुनाव मैदान में उतरी।

    पहले ही चुनाव में उसने दिल्ली के चुनाव को त्रिकोणीय बना दिया। पार्टी को बहुमत तो नहीं मिला, लेकिन कांग्रेस के समर्थन से सरकार बनाने में सफल रही। अरविंद केजरीवाल दिल्ली के मुख्यमंत्री बने और 49 दिनों के बाद इस्तीफा दे दिया।

    62 सीटें जीतने में पार्टी सफल रही आप

    उसके बाद वर्ष 2015 के चुनाव में आप ने कांग्रेस को शून्य व भाजपा को तीन पर समेटेते हुए 70 में से 67 सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत से सरकार बनाई। वर्ष 2020 में भी 62 सीटें जीतने में पार्टी सफल रही। इस बार आप के सामने चौथी बार सत्ता प्राप्त करने की चुनौती है। वहीं, वर्ष 1998 से सत्ता से दूर भाजपा वापसी के लिए चुनावी रण में उतरी है।

    कांग्रेस को उम्मीद है कि वह दिल्ली में अपनी राजनीतिक जमीन को वापस प्राप्त करने में सफल रहेगी, इसके लिए उसने पूरी ताकत झोंक दी है। इसके नेता शीला दीक्षित के 15 वर्षों के कार्यकाल में हुए कार्यों को जनता के सामने रखने के साथ ही आप के भ्रष्टाचार के मुद्दे पर घेर रहे हैं।

    आप 10 वर्षों से दिल्ली की सत्ता में

    पिछले तीन चुनावों की तरह से इस बार किसी पार्टी या चेहरे को लेकर जनता में कोई उत्साह नहीं दिख रहा है। यानी किसी भी पार्टी की लहर नहीं है। आप 10 वर्षों से दिल्ली की सत्ता में है। इस सरकार पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप प्रदूषण की समस्या, यमुना में गंदगी, कूड़े के पहाड़ व स्वच्छता, जर्जर सड़कें, पेयजल समस्या आदि को लेकर लोगों में कुछ नाराजगी भी है। लेकिन, यह नाराजगी इतनी भी नहीं है कि आप को कोई भारी नुकसान होता दिखे।

    अभी भी आप संयोजक अरविंद केजरीवाल की यहां के लोगों विशेषकर गरीब व निम्न मध्य वर्ग में अच्छी पकड़ है। उन्हें भी सरकार व विधायकों के प्रति नाराजगी का आभास है। यही कारण है कि उन्होंने बड़ी संख्या में अपने विधायकों के टिकट काटे हैं। 20 नए चेहरों को आगे करके नाराजगी को कुछ कम करने की कोशिश की है।

    नई लोकलुभावन घोषणा कर रहे हैं सभी दल

    इसके साथ ही महिलाओं को 2,100 रुपये प्रति माह देने सहित विभिन्न वर्गों के लिए नई लोकलुभावन घोषणा कर रहे हैं। भ्रष्टाचार के आरोपों में आप सरकार के फंसने और दिल्ली की समस्याओं से लोगों में दिख रही नाराजगी में भाजपा अवसर तलाशने का प्रयास कर रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सहित अन्य भाजपा नेता चुनावी मंच से इसे जोरदार तरीके से उठा रहे हैं।

    प्रधानमंत्री ने दिल्लीवासियों को विश्वस्तरीय दिल्ली बनाने का सपना दिखाते हुए समस्याओं के लिए आप को जिम्मेदार ठहराया है। आप को दिल्ली के लिए आपदा बताकर मतदाताओं को आप सरकार के विरोध में खड़ा करने का प्रयास कर रहे हैं। नेता दिल्ली के विकास में मोदी सरकार के काम को भी गिना रहे हैं।

    कई पुराने नेताओं के टिकट काट दिए

    पिछले दो चुनाव में लोकलुभावन वादों से बचने वाली भाजपा भी इस बार अपने दो संकल्प पत्र में महिलाओं को प्रति माह 2,500 रुपये देने सहित बुजुर्गों, युवाओं, आटो चालकों के लिए घोषणा कर उन्हें अपने साथ जोड़ने का प्रयास कर रही है। दिल्ली की सत्ता तक पहुंचने के लिए भाजपा ने भी अपने दो विधायकों सहित कई पुराने नेताओं के टिकट काट दिए हैं।

    कांग्रेस व आप छोड़कर भाजपा में शामिल होने वाले कई नेताओं को चुनाव मैदान में उतारा गया है। इससे कई स्थानों पर कार्यकर्ताओं में आक्रोश भी है। बिजवासन, महरौली, तुगलकाबाद, करोलबाग, बाबरपुर सहित कई सीटों पर असंतुष्ट कार्यकर्ताओं को एकजुट करके चुनाव प्रचार में लगाना पार्टी के लिए बड़ी चुनौती है।

    अपनों की नाराजगी का सामना करना पड़ रहा

    भाजपा नेताओं को उम्मीद है कि प्रधानमंत्री के बूथ स्तरीय कार्यकर्ताओं के साथ संवाद से स्थिति सुधरेगी। भाजपा के साथ ही आप को भी अपनों की नाराजगी का सामना करना पड़ रहा है। यही कारण है कि नामांकन की प्रक्रिया शुरू होने पर आप ने नरेला और हरिनगर में उसे टिकट बदलना पड़ा। टिकट से वंचित रह गए कई विधायक भी नाराज हैं। उनसे भी पार्टी के प्रत्याशी को नुकसान की आशंका है।

    हरिनगर, नरेला, जनकपुरी, पालम, लक्ष्मी नगर, कस्तूरबा नगर, किराड़ी सहित कई सीटों पर अपनों से नुकसान की आशंका है। इन दोनों पार्टियों की तुलना में कांग्रेस की स्थिति ठीक है। पार्टी के नेताओं का कहना है कि कार्यकर्ता एकजुट होकर अपनी राजनीतिक प्रतिष्ठा को वापस पाने का प्रयास कर रहे हैं।

    ये हैं हॉट सीटें

    कांग्रेस ने नई दिल्ली, कालकाजी, जंगपुरा, बादली, कस्तूरबा नगर, ओखला, मालवीय नगर, उत्तम नगर सहित कई सीटों पर मजबूत प्रत्याशी उताकर दोनों पार्टियों को कड़ी चुनौती पेश की है। कांग्रेस ने भी महिलाओं को प्रति माह 2,500 रुपये सहित अलग-अलग वर्गों के लिए कई घोषणाएं की है। सभी पार्टियां लोकलुभावन वादों के सहारे सत्ता तक पहुंचने की आस लगा रही हैं।

    इस बार के चुनाव में सबसे अधिक चर्चा नई दिल्ली व कालकाजी सीट की हो रही है। नई दिल्ली से केजरीवाल तीन बार से चुनाव जीत रहे हैं। भाजपा ने पूर्व सांसद प्रवेश वर्मा और कांग्रेस ने पूर्व सांसद संदीप दीक्षित को उतारकर उनके सामने कड़ी चुनौती पेश कर दी है।

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    इस सीट पर कभी मतदाता सूची को लेकर तो कभी किसी और मुद्दे पर विवाद हो रहा है। यही स्थिति कालकाजी का है। यहां से मुख्यमंत्री आतिशी की राह रोकने के लिए भाजपा ने पूर्व सांसद रमेश बिधूड़ी और कांग्रेस ने अलका लांबा को उतारा है। विवादित बयान व अन्य कारणों से यह सीट भी चर्चा में है।

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    राजनीतिक पार्टियों के प्रचार, लोकलुभावन वादों और आरोप प्रत्यारोप के बीच दिल्ली के मतदाताओं का एक बड़ा वर्ग अभी खुलकर बोलने को तैयार नहीं है। उनकी चुपी प्रत्याशियों की धड़कन बढ़ा रही है।