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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 06, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

'दिल्ली में उजाड़े गरीबों के आशियाने, अपने ही वादे को भूल गई BJP'; सदन में और क्या-क्या बोलीं आतिशी

Published: Wed, 06 Aug 2025 09:28 AM (IST)

दिल्ली विधानसभा के मानसून सत्र में आप नेता आतिशी ने झुग्गी तोड़ने का मुद्दा उठाया जिसका भाजपा ने विरोध किया। ...और पढ़ें

नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने सदन में उठाया झुग्गियां तोड़ने का मुद्दा।
नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने सदन में उठाया झुग्गियां तोड़ने का मुद्दा।

HighLights

  1. आतिशी ने उठाया झुग्गी तोड़ने का मुद्दा
  2. भाजपा पर वादा खिलाफी का आरोप
  3. सदन में आप का विरोध प्रदर्शन

राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को आम आदमी पार्टी की वरिष्ठ नेता और नेता प्रतिपक्ष आतिशी द्वारा दिल्ली में झुग्गियां तोड़ने का मुद्दा उठाया।

आतिशी ने कहा कि जैसे ही यह मुद्दा उठाया, भाजपा के विधायक विरोध करना शुरू कर दिया। आतिशी ने कहा कि इसके बावजूद उन्होंने सदन में अपनी बात रखते हुए कहा कि आज दिल्ली में जो भाजपा की सरकार है, उसने ‘जहां झुग्गी वहां मकान’ देने का वादा किया था, लेकिन अपने वादे के विपरित जाकर गरीबों के घरों को तोड़ रही है।

वहीं, नेता प्रतिपक्ष ने सदन में विपक्ष की आवाज दबाने दबाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि मुझे सत्ता पक्ष द्वारा आम आदमी पार्टी के ऊपर लगाए जा रहे झूठे आरोपों का जवाब नहीं देने दिया गया और दो बार मेरा माइक बंद कर दिया गया।

दिल्ली विधानसभा के बाहर कुछ लोगों ने प्रदर्शन किया, वे लोग हाथों में तख्तियां लेकर आए थे, भाजपा ने कहा है कि वे आम आदमी पार्टी ने लोग थे।

वहीं, आतिशी ने प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया है। कहा कि जनता से झूठ बोलकर, बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। वहीं विधानसभा के बाहर प्रदर्शन कर रहे अभिभावकों से भी आप नेता मिले।

आतिशी सहित आप के वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया ने एक्स पर पोस्ट कर भाजपा के विधायक राजकुमार भाटिया के सदन में दिए गए बयान को लेकर भाजपा पर हमला बोला है, जिसमें भाटिया ने इस बिल से छोटे प्राइवेट स्कूलों को भी फीस बढ़ाने का मौका मिलने की बात कही है।

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भाटिया ने कहा है कि उनकी बात को आप नेता गलत तरीके से पेश कर रहे हैं, उन्होंने वही बात कही है कि कानून के अनुसार तीन साल में नियमों का पालन करते हुए छोटे स्कूलों को भी एक बार फीस बढ़ाने का मौका मिल सकेगा। इसमें कुछ गलत नहीं है।