दिल्ली में 22 हजार भिखारियों की बल्ले-बल्ले! भीख मांगने से रोकने के लिए सरकार करेगी ये काम
दिल्ली सरकार भिखारियों और ट्रांसजेंडरों के पुनर्वास के लिए केंद्र की स्माइल योजना के तहत काम कर रही है। इन लोगों को प्रशिक्षित कर काम पर लगाया जाएगा ताकि वे अपनी आजीविका चला सकें। दिल्ली में करीब 22 हजार भिखारी हैं। सरकार सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर इन्हें आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास कर रही है। भाजपा सरकार इन्हें प्रशिक्षित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

वीके शुक्ला, नई दिल्ली। शहर में सालों से चली आ रही भिखारियों की समस्या से अब नए सिरे से निपटा जाएगा। सरकार इनके पुनर्वास की योजना बना रही है, जिसके तहत भिखारियों और ट्रांसजेंडरों को प्रशिक्षित कर उन्हें काम पर लगाया जाएगा, ताकि वे अपनी आजीविका चला सकें।
भिखाड़ियों और किन्नरों का किया जाएगा पनर्वास
केंद्र सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की स्माइल योजना के तहत भिखारियों और ट्रांसजेंडरों का पुनर्वास किया जाएगा। इस योजना पर दिल्ली सरकार सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर काम करने जा रही है। सरकार ने इस क्षेत्र में काम करने वाले संगठनों से आगे आने की अपील की है।
दिल्ली की भाजपा सरकार चाहती है कि जो भिखारी काम करने में सक्षम हैं, वे मुख्यधारा में आएं और काम-धंधा करें तथा अपने पैरों पर खड़े होकर सम्मान की जिंदगी जिएं। सरकार की नजर में भीख मांगने की प्रवृत्ति को रोकने का यही एकमात्र कारगर उपाय है।
दरअसल, दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा वर्ष 2018 में दिए गए आदेश के अनुसार भीख मांगने को अपराध की श्रेणी से हटा दिया गया है। दिल्ली सरकार द्वारा कराए गए सर्वे के अनुसार राजधानी में करीब 22 हजार भिखारी हैं। जी-20 शिखर सम्मेलन व अन्य अवसरों पर इन्हें शेल्टर होम ले जाया जाता था, लेकिन बाद में ये फिर सड़कों व सार्वजनिक स्थानों पर भीख मांगने लगे।
वर्ष 2021 में इन्हें प्रशिक्षित करने की योजना शुरू की गई, केंद्र ने इसके लिए दिल्ली सरकार को बजट भी दिया था, लेकिन इस योजना पर दिल्ली सरकार की ओर से रुचि न दिखाए जाने के कारण योजना आगे नहीं बढ़ सकी। अब भाजपा सरकार ने इन्हें प्रशिक्षित कर आत्मनिर्भर बनाने का प्रस्ताव तैयार किया है।
दिल्ली में दो तरीके से मांगी जाती है भीख
भीख मांगने का एक तरीका यह है कि भिखारी चौराहों और धार्मिक स्थलों के बाहर और आसपास खड़े होकर राहगीरों से पैसे, खाना, कपड़े या अन्य चीजें मांगते हैं। कई लोग उन्हें दे भी देते हैं।
कुछ जगहों पर यह भी देखा गया है कि महिलाएं भीख मांगती हैं और पुरुष अपनी गोद में बच्चे के पैर या सिर पर पट्टी बांधकर भीख मांगते हैं और कहते हैं कि वह बीमार है या फिर किसी गर्भवती महिला को आगे करके पैसे मांगते हैं और कहते हैं कि उनके पास उसे अस्पताल ले जाने के लिए पैसे नहीं हैं।
भीख मांगने का दूसरा तरीका यह है कि चौराहों, धार्मिक स्थलों के आसपास कई ऐसे लोग सक्रिय रहते हैं जो सीधे भीख नहीं मांगते, बल्कि अपने हाथों में कुछ सामान लेकर बेचते हैं, लोगों से सामान खरीदने के लिए कहते हैं, कई बार लोग सामान खरीद लेते हैं, कई बार सामान न खरीदकर पैसे दे देते हैं। इस तरह बच्चे, बुजुर्ग, महिलाएं, सभी भिखारियों में शामिल हैं।
वहीं, खास तौर पर किन्नर चौराहों और चौराहों पर अपने तरीके से लोगों से पैसे लेते हैं, बदले में दुआएं देते हैं। भिखारियों में दूसरे शहरों से आए लोग भी शामिल हैं। 2024 में जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान सड़कों से भिखारियों को हटाया गया।
दिल्ली पुलिस सड़कों से भिखारियों को हटा रही है। पिछले साल दिल्ली में जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान भिखारियों और बेघर लोगों को दिल्ली की सड़कों से हटाकर रैन बसेरों में पहुंचाया गया था। लेकिन यह प्रतिबंध ज्यादा दिनों तक नहीं चल सका, तब से ये लोग फिर से सड़कों पर आ गए हैं। आज भी चौक चौराहों पर ऐसे लोग देखे जा सकते हैं जो सामान भेज रहे हैं या भीख मांग रहे हैं।
क्या है स्माइल योजना?
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने 12 फरवरी 2022 को एक व्यापक योजना "स्माइल - आजीविका एवं उद्यम के लिए हाशिए पर पड़े व्यक्तियों की सहायता" की शुरुआत की है, जिसमें ट्रांसजेंडरों और भिखारियों के कल्याण के लिए योजनाएं हैं। जिसमें स्वैच्छिक संगठनों आदि की मदद से उनके पुनर्वास, चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ काउंसलिंग, शिक्षा, कौशल विकास, आर्थिक व्यवस्था आदि पर व्यापक फोकस है।
कमेंट्स
सभी कमेंट्स (0)
बातचीत में शामिल हों
कृपया धैर्य रखें।