Delhi MCD Polls: दिल्ली नगर निगम चुनाव में आ सकती है अड़चन, वार्डों के परिसीमन के खिलाफ कांग्रेस पहुंची HC
Delhi MCD Polls दिल्ली में नगर निगम चुनाव से पहले नगर वार्डों के परिसीमन को चुनौती देते हुए दिल्ली कांग्रेस ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। एमसीडी वार्ड परिसीमन की फाइनल रिपोर्ट के खिलाफ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष चौधरी अनिल कुमार ने याचिका दायर की है।
नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। दिल्ली में नगर निगम चुनाव से पहले नगर वार्डों के परिसीमन को चुनौती देते हुए दिल्ली कांग्रेस ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। एमसीडी वार्ड परिसीमन की फाइनल रिपोर्ट के खिलाफ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष चौधरी अनिल कुमार ने हाइ कोर्ट में याचिका दायर की है। कांग्रेस का आरोप है कि दलितों, अल्पसंख्यकों के अधिकारों तथा वार्डों में जनसंख्या फार्मूले का दुरुपयोग हुआ है।
कांग्रेस ने दिल्ली के सीएम पर लगाए आरोप
प्रदेश अध्यक्ष अनिल चौधरी ने बुधवार को पत्रकार वार्ता में कहा कि यह रिपोर्ट भाजपा की जीत सुनिश्चित करने के लिए आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल की मौन सहमति से बनाई गई है, जिसका कांग्रेस विरोध करती है। उन्होंने कहा कि मूल अवधारणा और किए गए वायदों से अलग लोकतांत्रिक मूल्यों को ताक पर रख बनाई गई परिसीमन रिपोर्ट में वार्डों में जनसंख्या समीकरण का उल्लंघन, दलित और अल्पसंख्यक समुदाय को अलग-थलग करके नियमों की पूरी तरह से अवहेलना की गई है।
कांग्रेस ने परिसीमन रिपोर्ट को बताया भाजपा-आप की मिलीभगत
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अनिल चौधरी का कहना है कि आम आदमी पार्टी की केजरीवाल सरकार ने परिसीमन रिपोर्ट को ड्राफ्ट रिपोर्ट की तरह जस का तस ही बनाकर जनता के सामने पेश कर दिया। दिल्ली कांग्रेस ने कहा कि दिल्ली कांग्रेस ने ड्राफ्ट परिसीमन की गहन समीक्षा करके चुनाव आयोग के समक्ष 168 शिकायत/सुझाव जमा किए थे, लेकिन चुनाव आयोग ने उन पर कोई विचार नहीं किया और गृह मंत्रालय को भेज दिया। कांग्रेस का आरोप है कि परिसीमन रिपोर्ट पूरी तरह भाजपा और आम आदमी पार्टी की रिपोर्ट है।
चुनाव में अल्पसंख्यकों की भूमिका खत्म करने की साजिश
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि परिसीमन में 22 वार्ड कम किए हैं, उसके लिए सभी 70 विधानसभाओं का स्वरुप बदलना किसी न किसी साजिश के तहत किया गया है। परिसीमन में दलित और अल्पसंख्यक बहुल वार्डों में उनकी जनसंख्या को छिन्न-भिन्न करके इन समुदायों को कमजोर करके इनके वोट के महत्व को खत्म करने की कोशिश की गई है। साथ ही अल्पसंख्यकों की जनसंख्या को विधानसभा के अंदर इस प्रकार से समायोजित किया है ताकि यह समुदाय चुनाव में निर्णायक भूमिका न निभा सके।
कमेंट्स
सभी कमेंट्स (0)
बातचीत में शामिल हों
कृपया धैर्य रखें।