नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। लोधी कालोनी में दो युवकों ने छह वर्षीय बच्चे की गला रेतकर हत्या कर दी। शनिवार रात काफी देर तक घर नहीं पहुंचने पर बच्चे धर्मेंद्र के स्वजनों ने तलाश शुरू की। उन्हें दोनों आरोपितों के रहने वाली जगह के पास खून पड़ा दिखाई दिया। खून देखकर बच्चे पिता अशोक कुमार ने वहां रखे एक प्लाईवुड को हटाया तो उसके नीचे बच्चे का शव पड़ा मिला।

आरोपित इस प्लाईवुड का इस्तेमाल सोने इत्यादि के लिए करते थे। शव देखकर पिता के शोर मचाने पर अन्य लोगों ने मिलकर वहीं मौजूद विजय कुमार और अमर कुमार को पकड़ लिया। सूचना मिलने पर पहुंची लोधी कालोनी थाना पुलिस ने दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर हत्या का मामला दर्ज कर लिया।

पड़ोसी हैं आरोपित

पुलिस उपायुक्त चंदन चौधरी ने बताया कि शनिवार देर रात सीआरपीएफ के असिस्टेंट कमांडेंट आरके जहांगीर ने मामले की सूचना पुलिस को दी। धर्मेंद्र का परिवार लोधी कालोनी स्थित झुग्गियों में रहता है। परिवार में पिता अशोक, मां भगवती, बड़ा भाई मंगली और छोटी बहन बाबी हैं। परिवार मूलत: उत्तर प्रदेश के बरेली का रहने वाला है।

बच्चे के माता-पिता सीआरपीएफ हेडक्वार्टर की निर्माणाधीन इमारत में दिहाड़ी श्रमिक के रूप में काम करते हैं। आरोपित पीड़ित परिवार के पड़ोस में ही रहकर ही मजदूरी करते हैं और मूलतः बिहार के कटिहार के निवासी हैं।

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'किसी ने सपने आकर बलि देने को कहा'

पुलिस के अनुसार, आरोपित विजय ने बताया कि दोनों ने हत्या से पहले नशा किया था। नशा करने के बाद वह घटनास्थल के पास चल रही पूजा में गए थे, लेकिन वहां पूजा कर रही महिलाओं ने उन्हें पूजा करने के लिए अगरबत्ती नहीं दी, जिसके बाद वे वापस अपनी झुग्गी में आ गए। विजय ने बताया कि किसी ने उन्हें सपने में आकर कहा कि उन्हें बच्चे की बलि देनी होगी। उसकी बात मानकर वह बच्चे की तलाश में निकल पड़े।

पिता ने ढूंढा बेटे का शव

रास्ते में उन्हें धर्मेंद्र दिखाई दिया, सोने के लिए अपने घर जा रहे धर्मेंद्र को बहला-फुसलाकर आरोपितों ने अपने खाना बनाने वाली जगह पर बुलाया। इसके बाद पहले उसके सिर पर वार किया फिर गला रेतकर मार डाला। हत्या के बाद वह दोनों बचने के लिए अपने खून से सने कपड़े और धर्मेंद्र का शव छिपा रहे थे, लेकिन घर नहीं पहुंचने पर स्वजन ने उसकी तलाश शुरू की और पिता अशोक धर्मेंद्र को ढूंढ़ते हुए शव तक पहुंच गए।

दो और बच्चों की देनी थी बलि

अगर अशोक उन्हें नहीं पकड़ते तो आने वाले दिनों में आरोपित एक और बच्चे की बलि देने वाले थे। आरोपितों ने बताया कि उन्हें समृद्धि हासिल करनी थी, जिसके लिए वह पूजा-पाठ भी करते थे और रोज गांजे का भी सेवन करते थे।

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खून देखकर लगा की मुर्गा काटा होगा

पीड़ित परिवार के साथ काम करने वाले लोगों ने बताया कि जब उन्हें बच्चे के गायब होने की जानकारी मिली तो वह अशोक और उसके परिवार के साथ धर्मेंद्र की तलाश करने लगे। जब सभी लोग आरोपितों की झुग्गी के पास पहुंचे तो उन्होंने देखा कि उनकी झुग्गी से बहुत खून बाहर निकल रहा है।

इसे देखकर पहले लोगों को लगा कि आरोपितों ने खाने के लिए मुर्गा काटा है। शक बढ़ने पर लोगों ने आरोपितों के घर का गेट खोला तो वहां प्लाईवुड के नीचे धर्मेंद्र का शव पड़ा था।

Edited By: Geetarjun

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