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    दिल्ली विधानसभा को मिलेगा ऐतिहासिक धरोहर का दर्जा, आम लोग कर सकेंगे इन हिस्सों का भ्रमण

    By sanjeev Gupta Edited By: Rajesh Kumar
    Updated: Sun, 06 Apr 2025 09:46 PM (IST)

    दिल्ली विधानसभा को जल्द ही ऐतिहासिक धरोहर का दर्जा मिल सकता है। इसको लेकर विभागीय बैठकों का दौर शुरू हो चुका है और एक सप्ताह के भीतर इस आशय के प्रस्ताव पर केंद्र सरकार से भी चर्चा होगी। ऐतिहासिक धरोहर का दर्जा मिलने के बाद विधानसभा भवन के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ नहीं की जा सकेगी। वहीं विशेष दिनों पर आम लोग भी इसका भ्रमण कर सकेंगे।

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    दिल्ली विधानसभा को ऐतिहासिक धरोहर का दर्जा दिलाने के प्रयास। फाइल फोटो

    संजीव गुप्ता, नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा को जल्द ही ऐतिहासिक धरोहर का दर्जा मिल सकता है। इसको लेकर विभागीय बैठकों का दौर शुरू हो चुका है और एक सप्ताह के भीतर इस आशय के प्रस्ताव पर केंद्र सरकार से भी चर्चा होगी।

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    ऐतिहासिक धरोहर का दर्जा मिलने के बाद विधानसभा भवन के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ नहीं की जा सकेगी। वहीं, विशेष दिनों पर आम लोग भी इसके विभिन्न हिस्सों का भ्रमण कर सकेंगे।

    गौरतलब है कि दिल्ली विधानसभा का भवन मूल रूप से 1912 में बनाया गया था, जिसे ई. मोंटेग थामस द्वारा इंपीरियल लेजिस्लेटिव काउंसिल और बाद में सेंट्रल लेजिस्लेटिव असेंबली (1919 के बाद) को रखने के लिए डिजाइन किया गया था। यह व्यवस्था तब तक चली जब तक कि नई दिल्ली में 18 जनवरी 1927 को संसद भवन का उद्घाटन नहीं हुआ।

    इस तरह किया जाएगा डिजाइन

    विधानसभा भवन को डिजाइन करते हुए इसका 10 एकड़ हिस्सा केवल हरित क्षेत्र के लिए रखा गया है। यहां वह फांसी घर भी है, जहां पर अंग्रजों ने काफी स्वतंत्रता सेनानियों को फांसी दी थी तो लालकिला तक एक खुफिया सुरंग भी बनी है।

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    पुराना सचिवालय के नाम से भी पहचाने जाने वाले इस भवन ने एक दशक तक सरकार के सचिवालय की भूमिका भी निभाई। यहां हुई चर्चाओं व विधायी प्रक्रियाओं ने मौजूदा संसद की नींव रखी। दिल्ली विश्वविद्यालय का पहला दीक्षांत समारोह 26 मार्च 1923 को यहीं पर हुआ।

    आजादी के बाद भी कुछ समय यहां सरकारी विभागों के कार्यालय रहे। 1952 में पहली दिल्ली विधानसभा गठित हुई, जिसे 1956 में भंग कर दिया गया। 1993 में विधान सभा को फिर से स्थापित किया गया। यहां महात्मा गांधी, मदन मोहन मालवीय और पटेल की मूर्तियां लगीं। कुछ समय पहले दिल्ली के पहले मुख्यमंत्री चौ. ब्रह्मप्रकाश और भगत सिंह की मूर्तियां भी यहां लगीं।

    यही वजह है कि दिल्ली की सत्ता पर भाजपा के काबिज होने के बाद इस भवन को ऐतिहासिक धरोहर का दर्जा दिलाने की कवायद भी तेज हो गई है। इसके पीछे मुख्य मकसद यही है कि इस भवन का संरक्षण सुनिश्चित हो सके एवं दिल्ली ही नहीं, देश वासी भी इसके ऐतिहासिक स्वरूप से रूबरू हो सकें।

    विधानसभा में लगाए जाएंगे नवीनतम गैजेट

    लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) विधानसभा परिसर में आइटी इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करेगा, जिसमें अल्ट्रा-हाई डेफिनिशन कैमरे और एलईडी डिस्प्ले जैसे नवीनतम गैजेट शामिल होंगे। पीडब्ल्यूडी ने विधानसभा के मौजूदा आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर की व्यापक मरम्मत और रखरखाव, दो एलईडी डिस्प्ले स्क्रीन और 4के अल्ट्रा हाई-डेफिनिशन कैमरे, अंडर टेबल स्पीकर और आडियो-विजुअल जरूरतों को पूरा करने के लिए अन्य आवश्यक गैजेट खरीदने की योजना बनाई है।

    हम लोग इसी सप्ताह केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेंद्र शेखावत से मिलकर दिल्ली विधानसभा भवन को ऐतिहासिक धरोहर का दर्जा दिलाने की प्रक्रिया पर चर्चा करेंगे। ऐसा कतई नहीं है कि यह दर्जा मिलने के बाद इस भवन में सरकारी कामकाज नहीं हो सकेगा। इससे इतर इस भवन का संरक्षण सुनिश्चित हो सकेगा एवं अवकाश के दिन कुछ हिस्सों तक आम जन घूमने भी जा सकेंगे। वहां उस हिस्से की ऐतिहासिकता बयां करने वाले शिला- पट्ट भी लगा दिए जाएंगे।

    -विजेंद्र गुप्ता, अध्यक्ष, दिल्ली विधानसभा