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    'किसी भी हालत में स्वीकार नहीं', जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने वक्फ संशोधन विधेयक पर लिया बड़ा फैसला

    Updated: Thu, 03 Apr 2025 09:58 PM (IST)

    Waqf Amendment Bill संसद में वक्फ संशोधन विधेयक पर बहस जारी है। इस बीच जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने विधेयक को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का फैसला किया है। जमीयत उलेमा का कहना है कि यह कानून मुसलमानों के अधिकारों का हनन है और संविधान का उल्लंघन है। जमीयत ने सरकार से इस कानून को वापस लेने की मांग की है।

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    Delhi News: जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने सुप्रीम कोर्ट जाने का फैसला किया। फाइल फोटो

    जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। एक तरफ संसद में वह संशोधन विधेयक पर जोरदार बहस जारी है। इस बीच देश के शीर्ष मुस्लिम संगठन भी इसे लेकर अपनी रणनीति बनाने में जुटी हुई है। बृहस्पतिवार को जमीयत उलेमा ए हिंद की वर्किंग कमेटी की बैठक हुई जिसमें तय किया गया कि इस कानून के पारित होने की स्थिति में उसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाएगी।

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    इस मौके पर जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि संसद में वक्फ से संबंधित जो कानून लाया गया है, हम उसे पूरी तरह से खारिज करते हैं। यह देश के संविधान और कानून पर हमला है और हमारे धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप है। मौलाना मदनी ने कहा कि किसी भी हालत में हम इसे स्वीकार नहीं करेंगे।

    वक्फ मुसलमानों का धार्मिक मामला

    उन्होंने कहा कि हम ने लोकतांत्रिक तरीके से सरकार को यह समझाने की हरसंभव कोशिश की। वक्फ मुसलमानों का धार्मिक मामला है। वक्फ संपत्तियां वे दान हैं, जो हमारे बुजुर्गों ने समाज की भलाई और कल्याण के लिए दी थीं, इसलिए हम इसमें किसी भी सरकारी हस्तक्षेप को बर्दाश्त नहीं कर सकते।

    मौलाना मदनी ने कहा कि हम शुरू से ही यह कहते आ रहे हैं कि मुसलमान ऐसे किसी कानून को स्वीकार नहीं कर सकते, जिससे वक्फ की प्रकृति और उसका उद्देश्य बदला जाए। उन्होंने कहा कि हमें ऐसा कोई भी कानून स्वीकार नहीं, जो इस्लामी कानून (शरीयत) के खिलाफ हो। मौलाना मदनी ने कहा कि मुसलमान हर चीज पर समझौता कर सकता है, लेकिन अपनी शरीयत पर कोई समझौता नहीं करेगा।

    नए कानून से मुसलमानों से छीनना चाहते हैं अधिकार-मदनी

    यह सिर्फ मुसलमानों के अस्तित्व का सवाल नहीं है, बल्कि उनके अधिकारों का भी मामला है। मौलाना मदनी ने कहा कि वर्तमान सरकार नया वक्फ संशोधन कानून लाकर मुसलमानों से वे अधिकार छीनना चाहती है, जो उन्हें देश के संविधान ने दिए हैं।

    जमीयत उलेमा-ए-हिंद इस कानून के खिलाफ अंतिम दम तक कानूनी लड़ाई लड़ेगी और अन्य अल्पसंख्यकों तथा न्यायप्रिय लोगों को साथ लेकर सभी लोकतांत्रिक और संवैधानिक माध्यमों का इस्तेमाल करेगी। उन्होंने कहा कि यह कानून मुसलमानों के साथ एक बड़ा धोखा है। दुख की बात यह भी है कि इस खेल में वे राजनीतिक पार्टियां भी शामिल हैं, जिनकी जीत में मुसलमानों की अहम भूमिका रही है।

    मौलाना मदनी ने और क्या कहा?

    मौलाना मदनी ने कहा कि आज देश में जो कुछ हो रहा है, उसके लिए वे तथाकथित सेक्युलर पार्टियां भी उतनी ही जिम्मेदार हैं, जो अपने दावों के बावजूद देश को बर्बादी की ओर धकेलने में सांप्रदायिक ताकतों की खुली मदद कर रही हैं। उनका यह रवैया सांप्रदायिक शक्तियों से भी अधिक खतरनाक है।

    मौलाना मदनी ने आगे कहा कि किसी भी स्थिति में हमें अपने धर्म, धैर्य, उम्मीद और संकल्प को नहीं छोड़ नहीं मौलाना मदनी ने कहा कि हमने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि यह कानून किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं होगा। हम इस कानून के खिलाफ देश के सभी राज्यों के उच्च न्यायालयों और साथ ही सुप्रीम कोर्ट में भी जायेंगे, क्योंकि हमारे लिए अंतिम सहारा केवल अदालतें ही हैं।

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