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    Chinese Manjha: गले मिलकर गला काट देता है चाइनीज मांझा, कहने को प्रतिबंध मगर सब जगह उपलब्ध, पढ़िये पूरी डिटेल

    By Vinay Kumar TiwariEdited By:
    Updated: Wed, 03 Aug 2022 02:30 PM (IST)

    Chinese Manjha पहले देसी मांझा सूत के धागे और सरेस आदि से तैयार हो जाता था लेकिन अब इससे कौन पतंग उड़ा रहा है।कांच में लिपटे चाइनीज मांझे से पतंग उड़ ...और पढ़ें

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    Chinese Manjha: कहने को चीनी मांझा उसकी घातकता के कारण प्रतिबंधित है।

    नई दिल्ली, आनलाइन डेस्क। Chinese Manjha: पहले भी पतंग उड़ती थीं। कटती थीं, लूटते थे। पेंच लड़ाने में खींचतान होती थीं। पतंग लूटते यदा-कदा हादसे भी हो जाया करते थे। लेकिन अब ये मांझा खूनी बन गया है। राह चलते लोगों के गला काट रहा है चाइनीज मांझा। चीनी माल के बहिष्कार के तमाम दावे बहुत ही सतही निकले। कहने को चीनी मांझा उसकी घातकता के कारण प्रतिबंधि है लेकिन ये कैसा प्रतिबंध है कि सब जगह उपलब्ध है।

    दिल्ली-एनसीआर में 15 अगस्त के अवसर पर पतंगबाजी के रूप में आसमान में एक तरह से पतंग के संग अरमानों के उड़ने का पर्व होता है। पहले देसी मांझा सूत के धागे और सरेस आदि से तैयार हो जाता था, लेकिन अब इससे कौन पतंग उड़ा रहा है अब तो महीन कांच में लिपटे चाइनीज मांझे से पतंग उड़ रही हैं जो कि राह चलते लोगों की गर्दन काट रहा है, पक्षियों को घायल कर रहा है।

    यहां सवाल यह कि ये चीनी मांझा है क्या? जब इस पर प्रतिबंध है तो यह आ कहां से रहा है? और जानलेवा होने के बावजूद पतंगबाज इसका प्रयोग कैसे कर रहे हैं? पतंगबाजी अच्छा शौक है, लेकिन दूसरे के लिए घातक बन जाए यह कैसे शौक? चाइनीज मांझे की वजह से घटना हो चुकी हैं, इससे गला कटने की वजह से एक व्यक्ति की मौत तक हो गई है।

    वर्ष 2017 में नेशनल ग्रीन टिब्यूनल (एनजीटी) ने चाइनीज मांझे के भंडारण व बिक्री पर प्रतिबंध लगाया था, जिसके बाद दिल्ली सरकार ने इसे लेकर अधिसूचना भी जारी की थी।

    ऐसे में सवाल यही उठता है कि आखिर क्षेत्र में चाइनीज मांझे की बिक्री और भंडारण पर प्रभावी रोक क्यों नहीं लग पा रही है? प्रतिबंध के पांच साल बाद अब भी यह कैसे लोगों को आसानी से मिल जाता है? कैसे प्रभावी बने प्रतिबंध? क्या इसके लिए बनाए गए नियम-कानून कमजोर हैं, जिसका लाभ उठाकर दुकानदार इसका भंडारण या बिक्री करते हैं? इस तरह के तमाम सवाल है जिनका जवाब खोजना चाहिए। हम आपको इस खबर के माध्यम से ऐसी ही कुछ जानकारियों से अवगत करा रहे हैं।

    रसायन और धातुओं के मिश्रण से तेज धार वाला चाइनीज मांझा आसानी से टूटता नहीं है। इसमें ब्लेड जैसी धार होती है। प्लास्टिक का बना होता है जो काफी मजबूत होता है। यह मेटालिक कोटिंग से तैयार किया जाता है। इलेक्ट्रिक कंडक्टर होता है, ऐसे में इससे करंट आने का खतरा भी रहता है।

    धातु और रसायन

    शीशा, वज्रम गोंद, मैदा फ्लाअर, एल्युमीनियम आक्साइड और जिरकोनिया आक्साइड आदि शामिल हैं।

    यहां मिलता है

    दिल्ली में हौजकाजी, लालकुआं, जाफराबाद, सदर बाजार, लाहौरी गेट, जामा मस्जिद, सीलमपुर, जहांगीरपुरी, जामिया नगर, ओखला, दरियागंज मे इसका बड़ा बाजार है।

    पुलिस कार्रवाई

    28 जुलाई : 11 गिरफ्तार, 59 रोल बरामद किए थे बाहरी जिला पुलिस ने।

    30 जुलाई : 4 गिरफ्तार, 41 रोल बरामद, द्वारका नार्थ थाना पुलिस ने।

    दावा:

    बाजार में चाइनीज मांझा नहीं मिल रहा है। नायलान व सिंथेटिक मांझे बिक रहे हैं। इन्हें कांच और धातु से शार्प किया जाता है। सूती मांझा आसानी से टूट जाता है। नायलान के मांझे को केमिकल से बनाते हैं धारदार और मजबूत।

    मुसीबत:

    सिर्फ सड़क से गुजर रहे लोगों के लिए ही घातक नहीं है बल्कि मेट्रो के आपरेशन में भी यह समस्याएं खड़ी करता है। अगर चाइनीज मांझा ट्रेन के पेंटोग्राफ में उलझ जाए तो उससे चिंगारी उठने लगती है। ऐसे में ट्रेन रास्ते में अटक जाती है।

    मौत का मांझा

    -25 जुलाई 2022 : हैदरपुर के पास फ्लाईओवर से गुजरे रहे बुलेट सवार कारोबारी सुमित रंगा की मांझा से गला कटने से मौत हो गई।

    -26 जुलाई 2022 : पालम में मनोज नामक युवक के गले में मांझा फंसने से घायल हुआ। 18 टांके लगे

    -14 अगस्त 2021 : नजफगढ़ में सौरभ दहिया बाइक से मंगोलपुरी फ्लाईओवर से उतर रहे थे। पतंग का मांझा उनके गले में फंस जाने से गला कट जाने से मौत हो गई।

    पांच साल पहले

    दिल्ली सरकार ने जनवरी 2017 में चीनी मांझे और पतंग उड़ाने के अन्य हानिकारक धागों को प्रतिबंध लगाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी।

    सजा-प्रविधान

    प्रतिबंध का उल्लंघन करने पर पांच साल तक की सजा या एक लाख रुपये का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।