Single Use Plastic: सिंगल यूज प्लास्टिक पर पाबंदी मामले राज्यों की उदासीनता से सीपीसीबी नाराज, पढ़ें क्या है मामला
सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध को लेकर राज्यों की उदासीनता पर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सख्त रवैया अपनाया है। प्लास्टिक के उत्पादों पर पाबंद ...और पढ़ें

संजीव गुप्ता, नई दिल्ली। सिंगल यूज प्लास्टिक (एसयूपी) पर प्रतिबंध को लेकर राज्यों की उदासीनता पर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने सख्त रवैया अपनाया है। सभी राज्यों से 31 दिसंबर तक इस पर विस्तृत रिपोर्ट तलब की गई है। इसमें उन्हें बताना होगा कि किस राज्य में एसयूपी पर रोक के लिए क्या-क्या कदम उठाए, जन जागरूकता के लिए कितने अभियान चलाए गए, कितने केस में कार्रवाई की, कितने का जुर्माना किया और अब उनके यहां क्या अपडेट है।
क्या है मामला
प्लास्टिक के उत्पादों पर पाबंदी लगाने के क्रम में केंद्र सरकार ने एक जुलाई 2022 से सिंगल यूज प्लास्टिक से बनी 19 वस्तुओं पर रोक लगा दी थी। इसके बाद से इनके निर्माण, उपयोग, खरीदने, बेचने, रखने आदि पर पाबंदी लग गई। इनमें प्लास्टिक के स्ट्रा, इयरबड, गुब्बारों में लगने वाली प्लास्टिक की स्टिक, सजावट में इस्तेमाल होने वाला थर्माकोल, आइसक्रीम स्टिक, कैंडी स्टिक, कप, झंडे, चाकू-छुरी, ट्रे, मिठाई के डिब्बे, शादी के कार्ड पर इस्तेमाल होने वाली शीट, मिठाई के डिब्बे पर इस्तेमाल होने वाली शीट, सिगरेट के पैकेट पर लगी पन्नी जैसी 19 वस्तुएं शामिल हैं, लेकिन प्रतिबंध के बावजूद इनका हर जगह उपयोग देखा जा रहा है।
राजधानी दिल्ली में भले ही आप एकल उपयोग प्लास्टिक का हर तरफ उपयोग देखते हों, लेकिन सच्चाई यह है कि पूरे देश में इस पाबंदी को लागू कराने में दिल्ली अव्वल है। दिल्ली में मामले में सबसे ज्यादा निरीक्षण अभियान और कार्रवाई की गई है। बहुत से राज्यों में तो डेढ़ वर्ष के दौरान इसे लेकर कोई कार्रवाई ही नहीं हुई है।
दिल्ली इस पाबंदी को लागू कराने में अपेक्षाकृत काफी आगे
अन्य राज्यों से तुलना करें तो दिल्ली इस पाबंदी को लागू कराने में अपेक्षाकृत काफी आगे दिखती है। दिल्ली के बाद महाराष्ट्र ही ऐसा राज्य है, जहां पर इन पाबंदियों को लागू कराने में थोड़े प्रयास दिखते हैं। सीपीसीबी के आंकड़ों के मुताबिक, राज्यों के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड या समितियों द्वारा प्लास्टिक पाबंदी पर कुल 1943 अभियान चलाए गए। इनमें से 1096 अभियान अकेले दिल्ली में चलाए गए। जबकि, महाराष्ट्र में इस तरह के अभियानों की संख्या 78 रही।
महाराष्ट्र में चार हजार 200 किलो सामान जब्त
वहीं, देश के अलग-अलग राज्यों के स्थानीय निकायों द्वारा इस पाबंदी को लागू कराने के लिए कुल 2231 अभियान चलाए गए। इसमें भी दिल्ली में चलाए गए अभियानों की संख्या सबसे ज्यादा है। दिल्ली में इस तरह के 783 अभियान चलाए गए, जबकि दूसरे नंबर पर रहे महाराष्ट्र में इस तरह के अभियानों की संख्या 198 रही है। सिंगल यूज प्लास्टिक के सामानों की जब्ती के मामले में भी दिल्ली में अन्य राज्यों की तुलना में ज्यादा काम हुआ है। सीपीसीबी की रिपोर्ट के मुताबिक, कुल आठ हजार 225 किलो सामान जब्त किया गया है। इनमें से दिल्ली में तीन हजार 91 किलो और महाराष्ट्र में चार हजार 200 किलो सामान जब्त किया गया।

कमेंट्स
सभी कमेंट्स (0)
बातचीत में शामिल हों
कृपया धैर्य रखें।