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    तिहाड़ जेल में जबरन वसूली रैकेट का मामला, दिल्ली हाई कोर्ट ने CBI जांच के दिए आदेश

    Updated: Fri, 02 May 2025 06:49 PM (IST)

    दिल्ली हाई कोर्ट ने तिहाड़ जेल में जबरन वसूली रैकेट की सीबीआई जांच के आदेश दिए हैं। अदालत ने दिल्ली सरकार के गृह विभाग को प्रशासनिक चूक के लिए जिम्मेदार अधिकारियों का पता लगाने का भी निर्देश दिया। यह फैसला एक पूर्व कैदी की याचिका पर आया है जिसमें जेल के अंदर कैदियों की सुरक्षा और जबरन वसूली का आरोप लगाया गया था।

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    दिल्ली हाई कोर्ट ने तिहाड़ जेल में जबरन वसूली रैकेट की सीबीआई जांच के आदेश दिए।

    जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार को सीबीआई को तिहाड़ जेल के अंदर जबरन वसूली रैकेट चलाए जाने के आरोपों की प्रारंभिक जांच करने का आदेश दिया, जिसमें जेल के अधिकारी शामिल हैं।

    मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की पीठ ने दिल्ली सरकार के गृह विभाग के प्रमुख सचिव को तथ्य-खोजी जांच करने और तिहाड़ में प्रशासनिक और पर्यवेक्षी चूक के लिए जिम्मेदार अधिकारियों का पता लगाने का निर्देश दिया। पीठ ने कहा कि दिल्ली जेल महानिदेशक (डीजी) को प्रमुख सचिव को पूरा सहयोग देना चाहिए।

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    कदाचार और दुर्व्यवहार को उजागर किया गया

    अदालत ने कहा कि याचिका में न केवल जेल अधिकारियों बल्कि कैदियों की ओर से भी कुछ अनियमितताओं, अवैधताओं, कदाचार और दुर्व्यवहार को उजागर किया गया है। अदालत ने कहा कि याचिका में लगाए आरोप बहुत गंभीर हैं, इसमें आरोप है कि जेल अधिकारियों की मिलीभगत से कुछ सुविधाओं की खरीद के लिए जेल परिसर में जबरन वसूली रैकेट चल रहा था।

    अगली सुनवाई से पहले अपनी रिपोर्ट पेश करने को कहा

    पीठ ने कहा कि केंद्रीय जेल आठ और सेमी ओपन जेल के निरीक्षण न्यायाधीश की रिपोर्ट में बहुत परेशान करने वाले तथ्य सामने आए हैं, जो तिहाड़ जेल के कामकाज में आपराधिक गतिविधियों और अनियमितताओं का संकेत देते हैं। अदालत ने सीबीआई और प्रमुख सचिव को 11 अगस्त को अगली सुनवाई से पहले अपनी रिपोर्ट पेश करने को कहा।

    अदालत एक पूर्व कैदी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें जबरन वसूली का आरोप लगाया गया था और तिहाड़ के अंदर कैदियों की सुरक्षा की बात कही गई थी।

    रिपोर्ट में याचिकाकर्ता के आचरण पर भी संदेह जताया गया

    अदालत ने कहा कि निरीक्षण न्यायाधीश की रिपोर्ट कई सामग्रियों पर आधारित थी, जिसमें जेल के बाहर और अंदर व्यक्तियों के बीच कॉल के संबंध में कुछ काल डाटा रिकॉर्ड शामिल था, साथ ही जेल के आधिकारिक लैंडलाइन का दुरुपयोग नापाक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए किया गया था। अदालत ने कहा कि रिपोर्ट में याचिकाकर्ता के आचरण पर भी संदेह जताया गया है।

    सीबीआई की प्रारंभिक जांच मुख्य रूप से निरीक्षण न्यायाधीश की रिपोर्ट के आधार पर आगे बढ़ेगी और याचिकाकर्ता के साथ-साथ जेल अधिकारी भी एजेंसी को अपने साक्ष्य प्रस्तुत कर सकते हैं।

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