Aiims Cyber Attack के पहले सफदरजंग अस्पताल के नेटवर्क में सेंध लगाने की हो चुकी है कोशिश, सर्वर 8 घंटे था ठप
Delhi देश के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान एम्स के सर्वर पर हुए रैनसमवेयर अटैक के बाद दूसरे अस्पतालों के डिजिटल सिस्टम की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठाने लगे हैं। इस बीच एम्स से पहले सफदरजंग अस्पताल के नेटवर्क में भी सेंध लगाने की कोशिश हो चुकी है।

नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। अस्पतालों में चिकित्सा सुविधाएं आनलाइन होने के साथ ही साइबर अटैक की आशंका बढ़ती जा रही है। देश के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान एम्स के सर्वर पर हुए रैनसमवेयर अटैक के बाद दूसरे अस्पतालों के डिजिटल सिस्टम की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठाने लगे हैं। इस बीच यह बात सामने आई है कि एम्स से पहले केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सफदरजंग अस्पताल के नेटवर्क में भी सेंध लगाने की कोशिश हो चुकी है। इस वजह से दो सप्ताह पहले सफदरजंग अस्पताल के ई-हास्पिटल का सर्वर आठ घंटे डाउन रहा था। इस दौरान मरीजों के इलाज की सुविधाएं मैनुअल संचालित की गई थी।
आठ घंटे में हुआ था सर्वर ठीक
अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डा. बीएल शेरवाल ने कहा कि करीब दो सप्ताह पहले अचानक ही ई-हास्पिटल सिस्टम ने काम करना बंद दिया। यह घटना हैरान करने वाली थी। इसके पहले ऐसी घटना नहीं हुई थी। इसकी सूचना तुरंत NIC (नेशनल इंफार्मेटिक्स सेंटर) को दी गई। एनआइसी की टीम अस्पताल पहुंचकर करीब आठ घंटे में सर्वर को ठीक कर लिया। इसलिए ज्यादा परेशानी नहीं हुई। उस घटना का असल कारण क्या था यह एनआइसी को बेहतर मालूम होगा।
अस्पताल का नेटवर्क है बेहद सुरक्षित
अस्पताल के सूचना तकनीक विभाग से जुड़े अधिकारी बताते हैं कि सफदरजंग अस्पताल का सर्वर एनआइसी का है, जो क्लाउड आधारित और बेहद सुरक्षित है। नेटवर्क को सुरक्षित रखने के लिए फायरवाल सिस्टम का इस्तेमाल किया गया है। यह एक ऐसा सिस्टम है जो कंप्यूटर और सर्वर के अनधिकृत इस्तेमाल को रोकता है। इसलिए सिस्टम रैनसमवेयर जैसे अटैक से सुरक्षित रहता है। इसलिए सफदरजंग अस्पताल के कंप्यूटर नेटवर्क पर एम्स जैसा रैनसमवेयर या साइबर अटैक होने की संभावना कम है।
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