हरियाणा-महाराष्ट्र के बाद दिल्ली फतह के लिए भाजपा ने बनाई खास रणनीति, 51 सीटों पर कर दिया खेल
Delhi Vidhan Sabha Chunav 2025 दिल्ली में पूर्वांचली मतदाताओं को साधने के लिए भाजपा ने माइक्रो मैनेजमेंट की रणनीति अपनाई है। बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के नेताओं को विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इन नेताओं को पूर्वांचली मतदाताओं के साथ सीधा संवाद करने और भाजपा के प्रति उनकी शंकाओं को दूर करने को कहा गया है।

नीलू रंजन, नई दिल्ली। Delhi Vidhan Sabha Chunav 2025: दिल्ली में पूर्वांचली मतदाताओं की भारी संख्या को ध्यान में रखते हुए भाजपा ने उन्हें साधने के लिए माइक्रो मैनेजमेंट की रणनीति अपनाई है। इसके तहत बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के नेताओं को विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
दिल्ली की 70 विधानसभा सीटों में से 15-20 सीटों पर पूर्वांचली मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं। वैसे भाजपा ने 51 ऐसी सीटों की पहचान की है, जहां पूर्वांचली मतदाता हार-जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इन सभी सीटों पर दो पूर्वांचली नेताओं (एक बिहार और एक उत्तर प्रदेश) को उतारने का निर्णय लिया गया है।
बीएल संतोष ने दिल्ली और बिहार से आए नेताओं के साथ की बैठक
भाजपा के पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी को इन नेताओं के बीच समन्वय की जिम्मेदारी दी गई है। गुरुवार को भाजपा के महासचिव बीएल संतोष ने दिल्ली और बिहार से आए इन नेताओं के साथ बैठक की। बैठक में नेताओं को अपने-अपने क्षेत्रों में पूर्वांचली मतदाताओं के साथ सीधा संवाद करने और भाजपा के प्रति उनकी शंकाओं को दूर करने को कहा गया।
इसके साथ ही उन्हें पूर्वांचल के कम उम्मीदवारों को पार्टी टिकट मिलने से उत्पन्न नाराजगी को भी दूर करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह ध्यान देने योग्य है कि दिल्ली में पूर्वांचलियों की आबादी 40% मानी जाती है। लेकिन भाजपा ने केवल चार सीटों -लक्ष्मीनगर, किराड़ी, संगम विहार और विकासपुरी में पूर्वांचल नेताओं को उम्मीदवार बनाया है।
भाजपा ने दो सीट JDU-LJP(R) को दी
इसके अलावा दो सीटें जदयू और लोजपा को दी गई हैं, जिससे पार्टी के पूर्वांचली नेताओं और कार्यकर्ताओं में नाराजगी है। भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि उम्मीदवार बनाए जाने से वंचित रह गए नेताओं की नाराजगी स्वाभाविक है और यह चुनाव में देखने को मिलती है।
पार्टी की कोशिश इस नाराजगी को समय रहते दूर करने और नाराज नेताओं को चुनावी प्रचार में शामिल करने की है, जिसमें काफी हद तक सफलता भी मिल रही है। पूर्वांचल के आम लोगों के बीच यह संदेश नहीं जाना चाहिए कि भाजपा (Delhi BJP) उन्हें अनदेखा कर रही है।
बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश से आए नेताओं पर मुख्य रूप से पूर्वांचल के आम लोगों के बीच फैलाए जा रहे दुष्प्रचार को दूर करने की जिम्मेदारी होगी। ये सभी नेता तीन फरवरी तक दिल्ली में ही अपने-अपने क्षेत्रों में प्रवास करेंगे।
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