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    Delhi Crime News: बैंक से 2.83 करोड़ की धोखाधड़ी का आरोपित गिरफ्तार

    By JP YadavEdited By:
    Updated: Fri, 01 Jan 2021 12:40 PM (IST)

    ईओडब्ल्यू के संयुक्त पुलिस आयुक्त डॉ. ओ.पी. मिश्रा ने बताया कि सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया आनंद पर्वत शाखा के मुख्य प्रबंधक वी.के. चौहान ने पुलिस में ठगी की शिकायत दर्ज कराई थी। दीपक मल्होत्रा और उनकी मां ने लोन के लिए बैंक से संपर्क किया था।

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    धोखाधड़ी में दीपक मल्होत्रा नाम के शख्स को गिरफ्तार किया है।

    नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने बैंक से 2.83 करोड़ की धोखाधड़ी में दीपक मल्होत्रा नाम के शख्स को गिरफ्तार किया है। आरोपित और उसकी मां ने कारोबार बढ़ाने के नाम पर सेंट्रल बैंक आफ इंडिया से लोन लिया था। लोन के लिए उन्होंने फर्जीवाड़ा कर अपनी बिक चुकी प्रापर्टी बैंक के पास गिरवी रख दी थी। लोन लेने के बाद उन्होंने एक भी रुपया बैंक को नहीं चुकाया था। आरोपित पर पहले से ठगी के पांच मुकदमे दर्ज हैं। पुलिस अब आरोपित की मां की गिरफ्तारी के प्रयास में जुट गई है। ईओडब्ल्यू के संयुक्त पुलिस आयुक्त डॉ. ओ.पी. मिश्रा ने बताया कि सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, आनंद पर्वत शाखा के मुख्य प्रबंधक वी.के. चौहान ने पुलिस में ठगी की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में उन्होंने बताया था कि दीपक मल्होत्रा और उनकी मां ने लोन के लिए बैंक से संपर्क किया था।

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    उन्होंने दावा किया था कि राधिका इंटरनेशनल नाम की उनकी कंपनी है। कारोबार बढ़ाने के लिए उन्हें लोन की जरूरत है। उनके अनुरोध पर बैंक ने वर्ष 2012 में उन्हें दो बार में दो करोड़ 25 लाख और 58 लाख रुपये का लोन दिया था। लोन के बदले आरोपितों ने वेस्ट करोलबाग स्थित अपनी प्रापर्टी बैंक के पास गिरवी रखी थी। लेकिन, लोन लेने के बाद आरोपितों ने बैंक को कोई भी राशि नहीं चुकाई। बाद में जब बैंक ने छानबीन कराई तो पता चला कि दीपक और उसकी मां ने फर्जीवाड़ा किया है। उनके द्वारा बैंक में जमा कराई गई कंपनी की बैलेंस शीट नकली थी। यही नहीं जिस प्रापर्टी को उन्होंने गिरवी रखी थी उसे वह पहले ही बेच चुके हैं।

    बैंक की शिकायत पर वर्ष 2018 में मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। इसमें फर्जीवाड़ा कर बैंक को चूना लगाने का बात साबित हुई। आरोपितों ने बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत से लोन मंजूर करवा उसका गलत उपयोग किया था। इसके बाद आरोपित की तलाश शुरू की गई, लेकिन वे लगातार ठिकाने बदल-बदल कर रहे थे। इसी बीच पुलिस की टीम ने 30 दिसंबर को दीपक को धर दबोचा।

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