Delhi News: अब आम लोग देख सकेंगे सिनौली का 4000 साल पुराना रथ, राष्ट्रीय संग्रहालय में किया जा रहा प्रदर्शित
दिल्ली के सिनौली में खुदाई के दौरान मिले 4000 साल पुराने रथ को अब राष्ट्रीय संग्रहालय में प्रदर्शित किया जा रहा है। इस रथ को 2018 में एएसआई के संजय मंजुल ने खोजा था। महाभारत काल का माना जाने वाला यह रथ प्राचीन युद्धों में इस्तेमाल होता था। राखीगढ़ी से प्राप्त 4000 साल पुराना कंकाल भी यहाँ प्रदर्शित किया गया है।
राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। सिनौली में खुदाई में मिले 4000 साल पुराने रथ के बारे में बहुत लोगों ने सुना है, लेकिन इसे बहुत कम लोगों ने देखा है। खुदाई में मिलने के सात साल बाद अब इसे आम लोगों के देखने के लिए राष्ट्रीय संग्रहालय में प्रदर्शित किया गया है। राष्ट्रीय संग्रहालय की हड़प्पा विंग में कोई भी जाकर इसे देख सकता है।
संग्रहालय के कर्मचारियों का कहना है कि जिसे भी जानकारी मिल रही है वह इसे देखने पहुंच रहा है। लोग पूछते नजर आ रहे हैं कि रथ कहां रखा है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) के अपर महानिदेशक संजय मंजुल को यह रथ 2018 में सिनौली स्थित शाही कब्रिस्तान में खुदाई के दौरान मिला था।
जमीन में दबे ताबूतों के साथ दो रथ मिले थे। जिसमें एक रथ का पूरा हिस्सा मौजूद था। इसी को यहां प्रदर्शित किया गया है। यह रथ महाभारत काल के समय का माना जा रहा है। प्राचीन काल में युद्ध के दौरान ऐसे रथों का प्रयोग किया जाता था।
राष्ट्रीय संग्रहालय ने इसी महीने इस रथ को स्टील के फ्रेम पर स्थापित किया है। इसके पास ही इस रथ के डिजाइन की तस्वीरें भी लगाई गई हैं, जो रथ की संरचना को स्थापित करती हैं। एक तरफ जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पिछले साल दिल्ली में आयोजित हेरिटेज कमेटी की बैठक में इस रथ के बारे में दिए गए बयान में कही गई बातों के अंश नियमित अंतराल पर टीवी स्क्रीन पर प्रसारित किए जाते हैं।
विभिन्न उत्खनन में मिले प्राचीन रथों के खिलौने भी यहां प्रदर्शित किए गए हैं। देश में किसी भी उत्खनन में मिला यह पहला रथ है, जो प्राचीन सभ्यता के गौरव को और भी प्रभावशाली बनाता है।
राखीगढ़ी से प्राप्त चार हजार पुराना कंकाल भी प्रदर्शित
सबसे बड़े हड़प्पा उत्खनन स्थलों में से एक राखीगढ़ी की खुदाई से प्राप्त एक महिला का कंकाल भी यहां प्रदर्शित है। यह एक प्रवीण महिला का है, जो उत्तर-दक्षिण दिशा में लेटी हुई मिली है, जिसकी लंबाई 165 सेमी है।
उसका सिर पश्चिम की ओर मुड़ा हुआ है और उसने अपने बाएं हाथ में शंख की दो चूड़ियाँ पहन रखी हैं, जो वर्तमान दृष्टिकोण से एक विवाहित महिला की पहचान है। ऊपरी हिस्से में हड़प्पाकालीन शव-पात्र रखे गए हैं, जो मृत्यु के बाद जीवन में विश्वास को दर्शाते हैं।
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