नेशनल हेराल्ड मनी लांड्रिंग केस: 11 साल बाद भी आरोप पत्र पर संज्ञान का इंतजार; फैसला अब 17 दिसंबर को
नेशनल हेराल्ड मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोप पत्र पर संज्ञान लेने का इंतजार 11 साल बाद भी जारी है। अदालत का फैसला अभी भी लंबित है, और अगली सुनवाई 17 दिसंबर को होगी। इस मामले में हो रही देरी न्याय प्रक्रिया पर सवाल उठाती है। अब सभी की निगाहें अदालत के अगले कदम पर टिकी हैं।

विनीत त्रिपाठी, नई दिल्ली। नेशनल हेराल्ड हाउस की करोड़ों की संपत्ति से जुड़े मनी लांड्रिंग मामले की जांच परिणिति तक कब पहुंचेगी यह कहना मुश्किल हैं, क्योंकि बीते एक साल से अधिक समय में इसकी कानून चाल एक कदम भी आगे नहीं बढ़ सकी है। वर्ष 2012 में पूर्व राज्यसभा सदस्य सुब्रमण्यम स्वामी की एक निजी शिकायत से शुरू हुआ मामला 11 साल से कानूनी दांवपेंच में फंसा है। स्थिति यह है कि 11 साल से लंबित मामले में ट्रायल शुरू होना तो दूर अभी मामले में दाखिल आरोप पत्र लेने के पहलू पर मामला अदालत में अटका है। इस बीच विभिन्न मुद्दों को लेकर मामला हाई कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।
पूरे मामले में पूर्व राज्यसभा सदस्य सुब्रमण्यम स्वामी की 2012 में दी गई निजी शिकायत पर दो साल बाद जून 2014 में पटियाला हाउस कोर्ट में मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट ने इस पर संज्ञान लिया। मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट ने 26 जून 2014 को संज्ञान लेकर सोनिया गांधी, राहुल गांधी सहित अन्य के खिलाफ समन जारी किया था। अगस्त 2014 में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मनी लांड्रिंग का मामला दर्ज किया। 19 दिसंबर 2015 में सोनिया गांधी और राहुल गांधी समेत अन्य आरोपितों को पटियाला कोर्ट ने नियमित जमानत दे दी।
शीर्ष अदालत से नहीं मिली कांग्रेसियों को राहत
2016 में बचाव पक्ष ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही रद करने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, लेकिन शीर्ष अदालत ने राहत देने से इन्कार करते हुए याचिका खारिज कर दी। हालांकि, सभी आरोपितों को व्यक्तिगत पेशी से छूट दे दी। इसके बाद 2018 में दिल्ली हाई कोर्ट ने सोनिया और राहुल गांधी की आयकर विभाग के नोटिस के खिलाफ दायर याचिका भी खारिज कर दी। हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली कांग्रेसियों की याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज करते हुए कहा कि आयकर की जांच चलती रहेगी।
नोटिस जारी करने से कोर्ट ने किया था इन्कार
हाई कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट के बीच चली कानूनी दांवपेंच के बीच ईडी ने 2021 में मामले की जांच शुरू की और करीब चार साल बाद 15 अप्रैल 2025 में कांग्रेस पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी, राहुल गांधी सहित अन्य आरोपितों पर गंभीर आरोप लगाते हुए राउज एवेन्यू की विशेष अदालत के समक्ष आरोप पत्र दाखिल किया।
25 अप्रैल को आरोप पत्र पर संज्ञान लेने के पहलू पर सुनवाई करते हुए पटियाला हाउस की विशेष अदालत ने सोनिया गांधी, राहुल गांधी को नोटिस जारी करने से यह कहते हुए इन्कार कर दिया था कि आरोपितों का पक्ष सुने बिना अदालत नोटिस जारी नहीं कर सकती है। अदालत ने ईडी काे उक्त दस्तावेज को दाखिल करने आदेश देते हुए सुनवाई दो मई को स्थगित कर दी थी।
आरोपितों को जारी हुआ नोटिस
दो मई को अदालत ने सोनिया गांधी और राहुल गांधी को नोटिस जारी करते हुए कहा था कि किसी भी स्तर पर सुने जाने का उनका अधिकार एक पारदर्शी ट्रायल में जान डालता है। आठ मई को मामले पर होने वाली सुनवाई यह नोट करते हुए 21 मई के लिए टाल दी गई थी।
सोनिया व राहुल के खिलाफ बनता है प्रथम दृष्टया मामला: ईडी
21 मई को अदालत ने ईडी द्वारा दाखिल किए गए आरोप पत्र पर जिरह सुनना शुरू किया था। इस दौरान एक तरफ जहां ईडी ने तर्क पेश करते हुए कहा कि पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी व सोनिया गांधी के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला बनता है। साथ ही अदालत ने कहा था कि मामले में ईडी और अभियुक्तों की तरफ से दो जुलाई से आठ जुलाई तक प्रतिदिन जिरह सुनी जाएगी।
जब कांग्रेस ने ईडी के मुकदमे को बताया अजीब
चार जुलाई को सोनिया गांधी की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने पूरे मामले को एक अजीब मामला बताते हुए तर्क दिया था कि यह बिना किसी जुर्म के किसी संपत्ति के इस्तेमाल से जुड़ा मनी लांड्रिंग का मुकदमा है। उन्होंने ईडी के केस के आधार पर ही सवाल उठाया था।
एजेएल का टेकओवर था एक धोखाधड़ी का लेनदेन
वहीं, आठ जुलाई को ईडी ने सोनिया गांधी और राहुल गांधी समेत अन्य आरोपितों पर मनी लांड्रिंग का आरोप लगाया था।
14 जुलाई से बार-बार टालता रहा है निर्णय
14 जुलाई को सभी पक्षों की बहस पूरी होने पर अदालत ने आरोपपत्र पर संज्ञान लेने के बिंदु पर 29 जुलाई के लिए फैसला सुरक्षित रखा। 29 जुलाई को संज्ञान लेने के बिंदु पर निर्णय सुनाना था लेकिन कोर्ट ने फैसला टाल दिया।
आठ अगस्त को भी आरोपपत्र पर संज्ञान लेने के बिंदु पर अदालत ने अपना निर्णय टाल दिया। जुलाई के बाद विभिन्न मौके पर मामला टलने के बाद 25 अक्टूबर को अदालत ने जांच एजेंसी से सोनिया गांधी, राहुल गांधी, सैम पित्रोदा सहित अन्य को आरोपित बनाने के बारे में विस्तृत जानकारी मांगी।
सात नवंबर को अदालत ने मामले से जुड़ी फाइलों का निरीक्षण किया और आरोपपत्र पर संज्ञान लेने के पहलू पर अपना फैसला 29 नवंबर तक के लिए टाल दिया।
17 दिसंबर तक के लिए टला निर्णय
अपरिहार्य कारणों से अदालत ने 29 नवंबर को अपना फैसला टाल दिया। विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने कहा था कि अदालत 16 दिसंबर काे अपना निर्णय सुनाएगी।
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