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    डीयू के मिरांडा हाउस कॉलेज में आज से पिंक बूथ की शुरुआत, छात्राओं को मिलेगा सुरक्षित माहौल

    Updated: Mon, 05 Jan 2026 05:31 AM (IST)

    दिल्ली विश्वविद्यालय के मिरांडा हाउस कॉलेज में दिल्ली पुलिस ने 'पिंक बूथ' स्थापित किया है। यह बूथ छात्राओं, शिक्षिकाओं और महिला कर्मचारियों की सुरक्षा ...और पढ़ें

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    मिरांडा हाउस स्थित बना नया पिंक बूथ। इसी का करेंगे पुलिस आयुक्त उद्घाटन।  जागरण 

    जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित महिला कॉलेज मिरांडा हाउस की छात्राओं, शिक्षिकाओं और महिला कर्मचारियों की सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से कॉलेज परिसर में दिल्ली पुलिस द्वारा पिंक बूथ की स्थापना गई है। यह पहल केवल एक सुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं के सम्मान, भरोसे और निर्भीक अभिव्यक्ति की दिशा में एक ठोस कदम मानी जा रही है।

    पुलिस आयुक्त और डीयू के कुलगुरु करेंगे बूथ का उद्घाटन

    कॉलेज की प्राचार्य प्रो. विजया लक्ष्मी नंदा ने बताया कि पिंक बूथ महिलाओं के लिए एक ऐसा सुरक्षित मंच बनेगा, जहां वे बिना डर और संकोच अपनी समस्याएं साझा कर सकेंगी। सोमवार को उद्घाटन समारोह में दिल्ली के पुलिस आयुक्त सतीश गोलचा और दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. योगेश सिंह शामिल होंगे।

    विजया लक्ष्मी नंदा ने बताया कि दिल्ली पुलिस मुख्यालय और पुलिस आयुक्त की योजना के तहत दिल्ली विश्वविद्यालय के कई कॉलेजों में पिंक बूथ बनाए जा रहे हैं। मिरांडा हाउस में इसकी शुरुआत इसलिए भी खास है, क्योंकि यह कॉलेज हजारों छात्राओं का शैक्षणिक और आवासीय केंद्र है। क्षेत्रीय एसएचओ की पहल पर परिसर में पिंक बूथ स्थापित किया जा रहा है, जिससे रोजमर्रा की सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को तत्काल समाधान मिल सके।

    पिंक बूथ के शुरू होने से छात्राओं को छोटी-बड़ी परेशानियों के लिए अब थाने के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। साइबर अपराध, छेड़छाड़ या किसी अन्य समस्या की शिकायत सीधे कॉलेज परिसर में ही दर्ज कराई जा सकेगी।

    बूथ पर महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती होगी, जिससे संवाद अधिक सहज, संवेदनशील और भरोसेमंद बनेगा। प्रो. नंदा ने बताया कि पिंक बूथ को केवल शिकायत केंद्र के रूप में नहीं, बल्कि जागरूकता के मंच के रूप में भी विकसित किया जा रहा है।

    शोध में भी मिलेगी मदद

    यहां छात्राएं एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया, कानून-व्यवस्था और साइबर अपराध से जुड़ी जानकारी सीधे पुलिस से प्राप्त कर सकेंगी। इससे कानूनी समझ बढ़ेगी और शोध कार्यों में भी उन्हें मदद मिलेगी। इसके साथ छात्राएं खुद को अधिक सशक्त महसूस करेंगी।