Trending

    Move to Jagran APP
    pixelcheck

    MCD में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, कमिश्नर अश्वनी कुमार का हुआ जम्मू-कश्मीर तबादला; ये दो अधिकारी रेस में 

    Updated: Sun, 04 Jan 2026 06:42 PM (IST)

    दिल्ली नगर निगम आयुक्त अश्वनी कुमार का जम्मू-कश्मीर तबादला हो गया है। वे 1992 बैच के अधिकारी हैं और जून 2024 में आयुक्त बने थे। उनके स्थान पर नए आयुक् ...और पढ़ें

    News Article Hero Image

    MCD आयुक्त अश्वनी कुमार का जम्मू-कश्मीर तबादला।

    जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली नगर निगम के आयुक्त अश्वनी कुमार का तबादला जम्मू कश्मीर तबादला हो गया है। वह 1992 के अरुणाचल प्रदेश-गोवा-मिजोरम और केंद्र शासित प्रदेश) कैडर के अधिकारी है। वर्ष 2022 में पहले निगमों के एकीकरण के दौरान विशेष अधिकारी नियुक्त हुए थे। जबकि जून 2024 में वह आयुक्त के तौर पर निगम में आए थे।

    अश्वनी कुमार के तबादले के बाद नया आयुक्त कौन होगा फिलहाल इसको लेकर कोई स्पष्टता नहीं है। केंद्रीय गृह मंत्रालय नियमानुसार निगम आयुक्त की नियुक्ति करता है। ऐसे में आने वाले दिनों में अश्वनी कुमार को दिल्ली से कार्यमुक्त किया जाता है तो नए आयुक्त की नियुक्ति हो सकती है।

    नौकरशाही में नए आयुक्त के तौर पर 1994 के बैच के आइएएस अधिकारी संजीव खिरवार और 1998 बैच के संतोष डी. वैद्य को बनाया जा सकता है। वर्तमान में मुख्य सचिव 1992 बैच के ही अधिकारी हैं। ऐसे में उनसे जूनियर व्यक्ति को ही आयुक्त लगाया जा सकता है।

    अश्वनी कुमार ने बतौर विशेष अधिकारी एमसीडी में ई-ऑफिस सिस्टम लागू किया था। जिसकी वजह से बहुत सी पुरानी फाइलों को स्कैन करके डिजिटल किया गया था। साथ ही अब ज्यादातर फाइलों का कार्य ई-आफिस से ही चलता है। इससे कागजों को बचाने में भी काफी मदद मिल रही है।

    इसके साथ ही बतौर आयुक्त अश्वनी कुमार ने भ्रष्टाचार को लेकर जीरो टालरेंस की नीति को अपनाया है। अश्वनी कुमार ने करोल बाग समेत विभिन्न जोन के उन अधिकारियों को निलंबित किया है जो वर्षों से टिके हुए थे। इसके साथ ही जो-जो मामले भ्रष्टाचार के उनके संज्ञान में लाए गए उन पर त्वरित कार्रवाई की गई।

    इतना ही नहीं अश्वनी कुमार के समय ही सभी कर्मियों व अधिकारियों को पिछले आठ माह से एक तारीख को वेतन और पेंशन जारी की जा रही है। इसके साथ ही वर्षों से बकाया कर्मचारियों के सातवे वेतन आयोग के बकाये भुगतान को भी खत्म किया जा रहा है। नीतिगत तौर पर आयुक्त ने फैक्ट्री लाइसेंस और जनरल ट्रेड लाइसेंस को संपत्तिकर से जोड़ दिया है। साथ ही कई सुविधाओं को डिजिटल भी किया है।