'बचाओ मुझे…', जबलपुर क्रूज हादसे में मौत से पहले दिल्ली की महिला की आखिरी कॉल, हादसे में उजड़ गया परिवार
जबलपुर के बरगी बांध में हुए दर्दनाक क्रूज हादसे ने दिल्ली के एक परिवार की खुशियों को मातम में बदल ...और पढ़ें

जबलपुर क्रूज हादसे में उजड़ गया दिल्ली का परिवार।

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
पीटीआई, नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के जबलपुर में बरगी डैम में हुए दर्दनाक क्रूज हादसे ने दिल्ली के एक परिवार को तबाह कर दिया। घर के गृह प्रवेश समारोह में शामिल होने आए परिवार की खुशियां उस वक्त मातम में बदल गईं जब गुरुवार शाम पर्यटकों से भरी क्रूज बोट पलट गई। इस हादसे में दिल्ली की एक महिला, उनका चार साल का बेटा और उनकी मां की मौत हो गई, जबकि परिवार के तीन सदस्य किसी तरह बच निकले।
यह हादसा उस समय हुआ जब करीब 40 पर्यटकों को लेकर एक क्रूज बोट नर्मदा नदी पर स्थित बरगी डैम में घूमने निकली थी। अचानक मौसम बिगड़ने, तेज हवाएं चलने और ऊंची लहरों के कारण नाव अनियंत्रित होकर पलट गई।
आखिरी वीडियो कॉल और “बचाओ मुझे…” की चीख
परिजनों के अनुसार, दिल्ली कैंट इलाके के मसेह परिवार की सदस्य मरीना (39) उस समय अपने परिवार से वीडियो कॉल पर थीं, जब स्थिति अचानक बिगड़ गई।
मरीना के भाई कुलदीप मोहन ने बताया, “मेरी बहन वीडियो कॉल पर थी, वह हमें नज़ारा दिखा रही थी। तभी अचानक सब बदल गया। वह चीखते हुए बोल रही थी – ‘बचाओ मुझे… बचाओ मुझे…’ और फिर कॉल कट गई।”
तीन की मौत, तीन सदस्य सुरक्षित
इस हादसे में मरीना, उनका चार साल का बेटा तृषान उर्फ जहान और उनकी मां मधुर मसेह (62) की मौत हो गई। वहीं मरीना के पति प्रदीप, 14 साल की बेटी सिया और उनके पिता जूलियस मसेह किसी तरह सुरक्षित बच निकले।
यह भी पढ़ें- डाइवर्स, नाव और जेसीबी का इस्तेमाल... जबलपुर क्रूज हादसे के बाद बरगी बांध में रेस्क्यू ऑपरेशन जारी
यह भी पढ़ें- 'बीच मझधार डूबते क्रूज को छोड़कर भागे क्रू मेंबर', जबलपुर हादसे में बचे शख्स ने लगाए गंभीर आरोप
परिजनों ने बताया कि नाव के ऊपरी डेक पर बैठे लोग अचानक बिगड़े मौसम में नीचे की ओर भागे। नाव असंतुलित हो गई और पानी तेजी से अंदर भरने लगा।
जीवन रक्षक जैकेट बांटे, लेकिन मची अफरा-तफरी
परिवार के मुताबिक, प्रदीप ने स्थिति बिगड़ते ही लाइफ जैकेट निकालकर यात्रियों में बांटने शुरू किए। कुछ लोगों ने जैकेट पहन ली, जबकि कुछ डरकर पानी में कूद गए।
स्थानीय ग्रामीणों ने रस्सियों और अन्य साधनों से कई लोगों को बचाया, जिनमें प्रदीप के पिता भी शामिल हैं।
मौसम चेतावनी के बावजूद संचालन
परिजनों और स्थानीय लोगों ने नाव संचालन में गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि उस समय यलो अलर्ट जारी था, लेकिन यात्रियों को किसी तरह की चेतावनी नहीं दी गई।
परिजन कुलदीप मोहन ने कहा, “अगर मौसम की चेतावनी दी गई होती तो कोई भी नाव में नहीं बैठता। यह पूरी तरह लापरवाही है।”
9 शव बरामद, 6 लापता की तलाश जारी
अधिकारियों के अनुसार अब तक 9 शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि 6 लोग अभी भी लापता हैं। 28 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया है और रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है।
जांच के आदेश, चालक दल पर कार्रवाई
मध्य प्रदेश सरकार ने घटना की जांच के आदेश दे दिए हैं। साथ ही नाव के चालक दल के तीन सदस्यों को सेवा से हटा दिया गया है। इस दर्दनाक हादसे ने पर्यटन सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, खासकर ऐसे स्थलों पर जहां मौसम अचानक जानलेवा रूप ले सकता है।
