जबलपुर क्रूज हादसे के बाद हिमाचल के पौंग बांध में प्रशासन कितना चौकस, मोटर बोट में सुरक्षा के क्या हैं प्रबंध?
जबलपुर क्रूज हादसे के बाद हिमाचल के पौंग बांध में सुरक्षा व्यवस्था पर चिंता बढ़ गई है। यहां पर्यटकों के ...और पढ़ें

पौंग बांध में मोटर बोर्ड में रखीं लाइफ जैकेट।
HighLights
जबलपुर हादसे के बाद पौंग बांध सुरक्षा बढ़ी।
पर्यटकों के लिए लाइफ जैकेट पहनना अनिवार्य।
खराब मौसम में मोटरबोट संचालन पर रोक।
रक्षपाल धीमान, नगरोटा सूरियां (कांगड़ा)। मध्य प्रदेश के जबलपुर में हुए क्रूज हादसे के बाद हिमाचल प्रदेश के बांधों में भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ गई है। कांगड़ा जिले में स्थित पौंग बांध झील (महाराणा प्रताप सागर) में पर्यटकों की सुविधा के लिए मोटरबोट चलाई जा रही हैं। यहां दो मोटरबोट पर्यटकों के लिए उपलब्ध हैं। पौंग बांध झील में वन्यप्राणी विंग के दो मोटरबोट पर्यटकों को नगरोटा सूरियां से बाथू की लड़ी व रेंसर गढ़ी टॉपू तक लेकर जाती व आती हैं। एक मोटर बोट आपात स्थिति के लिए रिजर्व रहती है।
हालांकि वन्य प्राणी विंग ने दोनों ही मोटर बोट में पहले से ही यात्रा करने वाले सभी व्यक्तियों के लिए लाइफ जैकेट पहनना अनिवार्य किया हुआ है और बोट चलाने वाले नाविक व गाइड तैराकी व आपात स्थितियों से निपटने के लिए प्रशिक्षित हैं।
10 सीटर मोटर बोट हैं उपलब्ध
यहां पर मोटर बोट प्रतिदिन नहीं बल्कि बुकिंग पर ही चलती है। प्रत्येक मोटरबोट 10 सीटर है और प्रत्येक मोटरबोट की बुकिंग करवाने के लिए तीन हजार रुपये का भुगतान भी करना पड़ता है। अगर मोटर बोट में दस सवारियां हो जाएं तो प्रत्येक से तीन सौ रुपये किराया भी निर्धारित है।
मछुआरों को भी दी हैं लाइफ जैकेट
वहीं, पौंग झील में मछली पकड़ने वाले मछुआरों को नाव के साथ जीवन रक्षक जैकेट मत्स्य विभाग ने पहले ही उपलब्ध करवाई हुई है और नाव के साथ झील में लाइफ जैकेट पहन कर उतरने के लिए सख्त निर्देश दिए हुए हैं।
निर्देशों का सख्ती से पालन करने का निर्देश
जबलपुर के पास बरगी बांध में क्रूज के डूबने से हुए हादसे के बाद वन्य प्राणी विंग और चौकस हुआ है व चालकों को दिशा निर्देशों की पालना की हिदायत जारी की गई है।
खराब मौसम में नहीं चलती मोटर बोट
वन्य प्राणी विंग नगरोटा सूरियां की परिक्षेत्र अधिकारी सरिता कौंडल ने बताया कि पौंग झील में दो मोटर बोट नगरोटा सूरियां व बाथू दी लड़ी से रेंसर टापू तक पर्यटकों को लेकर आवाजाही करती हैं और दोनों ही मोटर बोट में जल यात्रियों के लिए लाइफ जैकेट पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध रहती हैं। उन्होंने बताया कि यदि मौसम खराब हो तो मोटर बोट को झील में नहीं उतारा जाता है। आपातलीन परिस्थितियों से निपटने के लिए गोताखोर और बचाव दल टीमों की तैनाती रहती है, जिसमें गोताखोर भी शामिल होते हैं। किसी भी अनहोनी की स्थिति में त्वरित बचाव के लिए अतिरिक्त मोटरबोट तैयार रखी जाती हैं।
