आईएसआई के कहने पर गैंग्स्टर भी कर रहे आतंकियों की भर्ती, सोशल मीडिया और स्लीपर सेल की मदद से करते हैं गुमराह
खुफिया एजेंसियों के अनुसार, आईएसआई के निर्देश पर गैंगस्टर आतंकियों की भर्ती में शामिल हैं। वे सोशल मीडिया और स्लीपर सेल का उपयोग करके युवाओं को गुमराह कर रहे हैं। गैंगस्टर युवाओं को बरगलाकर आतंकी गतिविधियों में शामिल होने के लिए प्रेरित कर रहे हैं, जिसके लिए सोशल मीडिया पर भड़काऊ सामग्री फैलाई जा रही है। स्लीपर सेल स्थानीय स्तर पर भर्ती और प्रशिक्षण में मदद कर रहे हैं।

प्रतीकात्मक तस्वीर।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल द्वारा गिरफ्तार किए गए पाकिस्तानी हैंडलर शहजाद भट्टी से जुड़े तीन आतंकियों से पूछताछ में सेल को चाैंकाने वाली जानकारी मिली है। भट्टी और उसके साथी सोशल मीडिया के जरिये भारतीय युवाओं को अपने जाल में फांसने में लगे हुए थे।
भारत में आतंकी गतिविधि के लिए भर्ती
अब तक पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई समर्थित व अन्य आतंकी संगठनों द्वारा सोशल मीडिया या अपने स्लीपर सेल के जरिये भारतीय युवाओं को अपने माॅड्यूल में शामिल करने की बातें सामने आती रही हैं लेकिन पहली बार ऐसा देखा जा रहा है कि पाकिस्तान गैंग्स्टर भी आईएसआई के निर्देश पर भारत में आतंकी गतिविधि को अंजाम देने के मकसद से सोशल मीडिया के जरिये भारतीय युवाओं को अपने माॅड्यूल में शामिल कर रहे थे।
रुपए का लालच देकर भटका रहे
शहजाद भट्टी व उसके साथी भारतीय युवाओं से संपर्क कर उन्हें रुपए का लालच देते थे, उनके सोशल मीडिया प्रोफाइल को देखकर उन्हें ब्रेनवाश कर अपने माड्यूल में शामिल कर रहे थे। ये लोग युवाओं को रुपए भेजकर उन्हें हथियार व अन्य लाॅजिस्टिक्स मुहैया कराने के बाद उनसे अपने टारगेट को अंजाम दिलाने में जुटे हुए थे।
पूछताछ में पता चला कि यह आतंकी माॅड्यूल भारत में सार्वजनिक जगहों पर ग्रेनेड से हमला करने के लिए युवाओं को पैसे का लालच देकर उनका देश विरोधी गतिविधियों में इस्तेमाल कर रहा था।
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सोशल मीडिया व स्लीपर सेल बहका रहे
स्पेशल सेल के अधिकारी का कहना है कि नाबालिग व युवा सोशल मीडिया व स्लीपर सेल के जरिये आसानी से आतंकियों व गैंग्सटरों के बहकावे में आ रहे हैं। उन्हें पहले नशे का सामान उपलब्ध कराया जाता है फिर अपने माॅड्यूल या गिरोह में शामिल होने के लिए उन्हें पहले किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने का टारगेट दिया जाता है।
बड़ा बदमाश बनाने का दिखाते हैं ख्वाब
युवाओं से कहा जाता है कि अगर वे बड़ी वारदात को अंजाम देने में सफल हो गए तब उनका नाम गिरोह के बड़े बदमाशों में शामिल हो जाएगा। उन्हें काफी पैसे मिलेंगे। युवाओं को यह भी प्रलोभन दिया जाता है कि अगर पुलिस उनके पीछे पड़ेगी तब वे उन्हें विदेश बुलवा लेंगे। इस तरह के बहकावे में आकर नाबालिग व युवा, आतंकियाें व गैंग्स्टरों के लिए कुछ भी करने को तैयार हो जाते हैं।
पुलिस अधिकारी का कहना है कि सोशल मीडिया युवाओं के लिए बहुत घातक साबित हो रहा है। कई सालों से ऐसा देखा जा रहा है कि आतंकियों व गैंग्स्टरों ने युवाओं को अपने चंगुल में फांसने के लिए सोशल मीडिया को बहुत बड़ा जरिया बना लिया है।

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