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    'हैंगिंग हाउस' विवाद फिर गरमाया... दिल्ली विधानसभा के शीतकालीन सत्र में उठेगा AAP सरकार का पुराना मुद्दा

    Updated: Fri, 02 Jan 2026 09:01 PM (IST)

    दिल्ली विधानसभा में 'हैंगिंग हाउस' का मुद्दा आगामी शीतकालीन सत्र में उठाया जाएगा। बिजनेस एडवाइजरी कमेटी ने इस पर चर्चा की, जिसका उद्घाटन 2022 में AAP ...और पढ़ें

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    दिल्ली विधानसभा में 'हैंगिंग हाउस' का मुद्दा आगामी शीतकालीन सत्र में उठाया जाएगा। फाइल फोटो

    राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। "हैंगिंग हाउस" का मुद्दा आने वाले शीतकालीन सत्र में विधानसभा में उठाया जाएगा। दिल्ली विधानसभा की बिजनेस एडवाइजरी कमेटी ने आज विधानसभा परिसर में बनी और "हैंगिंग हाउस" नाम दी गई संरचना की प्रामाणिकता पर विस्तार से चर्चा की। इसका उद्घाटन 9 अगस्त, 2022 को आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार के कार्यकाल के दौरान किया गया था।

    यह मुद्दा पिछले साल विधानसभा स्पीकर विजेंद्र गुप्ता द्वारा "हैंगिंग हाउस" संरचना की प्रामाणिकता के बारे में चिंता जताए जाने के बाद सदन के सामने लाया गया था। स्पीकर गुप्ता ने कहा कि बिना किसी सबूत के एक संरचना को "हैंगिंग हाउस" घोषित कर दिया गया।

    इसके बाद, विशेषाधिकार समिति को मामले की विस्तृत जांच करने का निर्देश दिया गया। जांच प्रक्रिया के दौरान, विशेधिकार समिति ने संबंधित व्यक्तियों को अपने विचार रखने का अवसर दिया। जांच के दौरान यह पाया गया कि दो अवसर दिए जाने के बावजूद, तत्कालीन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, तत्कालीन उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, तत्कालीन विधानसभा स्पीकर राम निवास गोयल और तत्कालीन डिप्टी स्पीकर राखी बिड़ला विशेषाधिकार समिति के सामने पेश नहीं हुए।

    इसके बाद, मामले को बिजनेस एडवाइजरी कमेटी के सामने रखा गया ताकि इसे सदन में पेश करने के लिए उचित संसदीय प्रक्रिया तय की जा सके। विचार-विमर्श के बाद, समिति ने एक प्रस्ताव अपनाया, जिसे आठवीं विधानसभा के चौथे (शीतकालीन) सत्र के दौरान सदन के सामने रखा जाएगा, जो 5 से 8 जनवरी, 2026 तक होगा।

    शुक्रवार को हुई बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक में विधानसभा स्पीकर विजेंद्र गुप्ता, डिप्टी स्पीकर मोहन सिंह बिष्ट और सदस्य अभय वर्मा, जितेंद्र महाजन, ओम प्रकाश शर्मा और सोमदत्त मौजूद थे। बिजनेस एडवाइजरी कमेटी ने सदन के सामने लाए गए मामलों में प्रक्रियात्मक स्पष्टता, संस्थागत जवाबदेही और संसदीय परंपराओं के प्रति पूर्ण सम्मान सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया, जिससे विधानसभा में व्यवस्थित और सूचित चर्चाएं हो सकें।