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    ग्रेप की पाबंदियां हटने के बाद दिल्ली में घंटाघर का काम फिर शुरू, अब मार्च में होगा पूरा

    Updated: Sun, 04 Jan 2026 11:56 PM (IST)

    वायु प्रदूषण प्रतिबंधों (ग्रेप) के कारण दिल्ली में सरकारी परियोजनाओं में देरी हुई है। तालकटोरा गोल चक्कर पर बन रहे घंटाघर का काम, जो जनवरी 2026 में पू ...और पढ़ें

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    एमसीडी के तालकटोरा गोल चक्कर पर निर्माणधीन घंटाघर का कार्य पूरा होगा।

    जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। वायु प्रदूषण शहर के विकास को भी प्रभावित करता है। ग्रेप चार में निर्माण और विध्वंस की गतिविधियों पर रोक के चलते बंद पड़े सरकारी कार्यों की भी समय-सीमा बदल रही है। चाहे गोल मार्केट के संग्रहालय का कार्य हो या फिर एमसीडी के तालकटोरा गोल चक्कर पर निर्माणधीन घंटाघर का कार्य हो।

    ग्रेप के कारण इनकी समय-सीमा बदल रही है। घंटाघर का कार्य जहां पहले जनवरी 2026 में पूरा होना था जो कि ग्रेप के प्रतिबंधों के कारण मार्च 2026 में पूरा हो पाएगा। इसी प्रकार एनडीएमसी के गोल मार्केट संग्रहालय का कार्य मार्च 2026 में पूरा होना था जिसकी समय-सीमा एनडीएमसी पहले ही मई 2026 कर चुकी है।

    उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने अगस्त 2025 में इस घंटाघर का शिलान्यास किया था। उस समय 31 जनवरी इसकी समय-सीमा तय की गई थी। एनडीएमसी अधिकारियों का कहना है कि घंटाघर की मजबूती के लिए गहरी खोदाई की गई थी। लेकिन, जमीन पथरीली निकलने की वजह से खोदाई में भी समय लगा। 27 मीटर ऊंचे इस घंटाघर का निर्माण 1.8 करोड़ की लगात से होना है।

    एनडीएमसी के योजना के तहत इस घंटाघर को हवा और भूकंप के झटकों का सामना करने के लिए आरसीसी की नींव से बनाया जाएगा।बाद में ऊपर इंटों में इसका उपयोग होगा। यह घंटाघर के आठ कोने होंगे जहां से घड़ी को हर तरफ से देखा जा सकेगा। चाहे शंकर रोड हो या फिर तालकटोरा रोड हो या फिर मंदिर मार्ग हो।

    उल्लेखनीय है कि शंकर रोड से तालकटोरा स्टेडिमय की ओर आने पर इसी गोलचक्कर से एनडीएमसी की सीमा शुरू होती है। इसी उद्देश्य से इसे इस स्थान पर बनाया जा रहा है। ताकि लोगों को यह पता चल सके कि एनडीएमसी की सीमा शुरू हो गई है। इसे घंटाघर को शहर की पहचान के तौर पर उद्देश्य के तौर पर भी बनाया जा रहा है।

    पूर्व में भी लुटियंस दिल्ली में वर्तमान के एनडीएमसी मुख्यालय में घंटाघर होता था। ऐसे में शहर की पहचान को बढ़ाने के लिए घंटाघर बनाने की जब चर्चा हुई तो खान मार्केट, कनाट प्लेस जैसे स्थानों पर विचार किया गया लेकिन बाद में इसे तालकटोरा गोलचक्कर के पास बनाने का निर्णय लिया गया। इस परियोजना को दिल्ली अर्बन आर्ट कमीशन ने भी मंजूरी दी है।