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    गुटबाजी के कारण आउट-ऑफ-टर्न प्रमोशन पाने में पिछड़ी दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल, क्राइम ब्रांच निकली आगे

    Updated: Mon, 05 Jan 2026 05:28 AM (IST)

    दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल आंतरिक गुटबाजी के कारण आउट-ऑफ-टर्न प्रमोशन (ओटीपी) में पिछड़ गई है। इस साल 105 ओटीपी में से केवल 19 स्पेशल सेल को मिले, जबक ...और पढ़ें

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    जयसिंह रोड स्थित पुलिस मुख्यालय। फोटो सौजन्य- जागरण आर्काइव

    राकेश कुमार सिंह, नई दिल्ली। देश की सबसे पेशेवर मानी जानी वाली दिल्ली पुलिस की आतंकवाद यूनिट स्पेशल सेल पिछले कुछ सालों से आंतरिक गुटबाजी से जूझ रही है, जिसका असर उनके कामकाज पर साफ तौर पर दिख रहा है। बदमाश बैखौफ होकर शहर में गोलियां चला रहे हैं, इंटेलिजेंस फेलियर का ही नतीजा है कि राजधानी में 14 साल बाद आतंकी घटना भी हो गई।

    ऐसी घटनाएं कहीं न कहीं स्पेशल सेल के कमजोर पड़ने के कारण हो रही हैं। अपनी जान जोखिम डाल असाधारण बहादुरी कार्य के लिए हर साल पुलिस विभाग द्वारा जितने जवानों को आउट ऑफ टर्न प्रमोशन (ओटीपी) दिया जाता है उनमें सबसे अधिक स्पेशल सेल की झोली में जाता था। इस साल पुलिस विभाग ने जिन 105 कर्मियों को ओटीपी दिया, जिनमें केवल 19 ही स्पेशल सेल कर्मी को मिल पाया, जो पिछले दो-तीन दशक का सबसे खराब प्रदर्शन माना जा रहा है।

    क्राइम ब्रांच के 21 कर्मियों को आउट ऑफ टर्न प्रमोशन

    सेल के पीछे के इतिहास को देखा जाए तो हर साल असाधारण बहादुरी कार्य के लिए सबसे अधिक करीब 50-60 प्रतिशत ओटीपी पर अकेले स्पेशल सेल का कब्जा रहता था, लेकिन इस साल आंकड़ा घटकर 19 प्रतिशत से भी कम पहुंच गया। इस साल सबसे अधिक ओटीपी क्राइम ब्रांच को मिला। क्राइम ब्रांच के 21 कर्मियों को ओटीपी मिला।

    ओटीपी असाधारण बहादुरी कार्य, उत्कृष्ट कार्य या राष्ट्रहित में किए गए विशेष योगदान के लिए पुलिस विभाग की ओर से दिया जाता है। यह सिपाही से सब इंस्पेक्टर रैंक के कर्मियों को दिया जाता है ताकि इससे दूसरे कर्मियों को प्रेरणा मिले व ऐसे कर्मी आगे भी बेहद साहस के साथ काम करते रहें।

    ओटीपी के लिए कौन करता है पुलिसकर्मियों के नामों का चयन?

    जानकारी के मुताबिक हर साल दिसंबर माह के अंतिम हफ्ते में ओटीपी के लिए पुलिस मुख्यालय में कमेटी के सदस्यों की बैठक होती है जिसमें सभी 15 जिले व यूनिटों से आए प्रस्तावों की गहनता से जांच की जाती है। कमेटी में तीन सदस्य होते हैं जिनमें एक विशेष आयुक्त एचआरडी व पुलिस आयुक्त द्वारा नामित दो अन्य आईपीएस होते हैं।

    बैठक में तीनों सदस्य ओटीपी के लिए पुलिसकर्मियों के नामों का चयन करते हैं। पिछले साल जिन जवानों ने उत्कृष्ट कार्य किया उन्हें ओटीपी के लिए बीते 29 दिसंबर व 30 दिसंबर को मुख्यालय में बैठक हुई, जिनमें 105 जवानों के नाम का चयन किया गया। इनमें दो सब इंस्पेक्टर, तीन एएसआई के अलावा सबसे अधिक हवलदार व सिपाही शामिल हैं। जिले में सबसे अधिक दक्षिण-पूर्वी जिले के नौ जवानों को ओटीपी के लिए चुना गया।

    2024 की ओटीपी प्रमोशन की फाइल पर 16 अप्रैल 2025 को पुलिस मुख्यालय में बैठक हुई, जिनमें 128 जवानों को ओटीपी के लिए चुना गया। इनमें 67 जवान स्पेशल सेल के शामिल थे। इससे पहले, वर्ष 2023 में 84 जवानों को ओटीपी के लिए चुना गया, जिनमें 40 स्पेशल सेल के जवान शामिल थे।

    क्यों कम हो रहा स्पेशल का खौफ?

    स्पेशल का खौफ कम होने के कई मुख्य कारण माना जा रहा है। पिछले दो तीन साल में सेल के अंदर आइपीएस से लेकर नीचे के स्तर पर भी बहुत अधिक गुटबाजी देखने को मिला। इसका मुख्य कारण कुछ डीसीपी व एडिशनल डीसीपी रैंक के अधिकारियों के लंबे समय तक इस यूनिट में जमे होने व अपनी मनमर्जी चलाने से जवानों का मनोबल घटा।

    शीर्ष नेतृत्व के मजबूत हस्तक्षेप का अभाव देखने को मिला या तो उनकी एक नहीं चली। कई जांबाज इंस्पेक्टरों की टीम को खत्म कर दिया गया। कई धुरंधर एसीपी सेवानिवृत्त हो गए। गुटबाजी के कारण जवानों ने काम करना बंद कर दिया। वर्तमान पुलिस आयुक्त सतीश गोलचा स्पेशल सेल को दोबारा पहले की तरह मजबूत बनाने में जुटे हुए हैं।