आखिर 7 साल बाद सुलझा सिग्नेचर ब्रिज का पेंच, रखरखाव अब PWD के हाथ; तैनात किए जाएंगे सुरक्षा गार्ड
सिग्नेचर ब्रिज के रखरखाव को लेकर वर्षों पुराना विवाद अब सुलझ गया है, जिसकी जिम्मेदारी अब लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) संभालेगा। 2018 में खुले इस पु ...और पढ़ें

वीके शुक्ला, नई दिल्ली। सिग्नेचर ब्रिज के रखरखाव को लेकर वर्षों पुराना विवाद अब सुलझ गया है। इसका रखरखाव अब लोक निर्माण विभाग (PWD) करेगा। बाहरी रिंग रोड को भजनपुरा और करावल नगर से जोड़ने वाला यह पुल 2018 में जनता के लिए खोला गया था।
पर्यटन एवं परिवहन विभाग निगम (DTTDC) द्वारा 1,500 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से इसे बनाया गया था। 154 मीटर ऊंचे मुख्य पिलर को लेकर यह पुल चर्चा के केंद्र में रहा है, दूर दूर से लोग इसे देखने के लिए आते हैं। इसे पीडब्ल्यूडी के फंड से बनाया गया था। इसके रखरखाव को लेकर 2018 से विवाद चल रहा था।
डीटीटीडीसी धन की कमी का हवाला देकर लगातार पीडब्ल्यूडी से फंड देने की मांग कर रहा था, डीटीटीडीसी इसका रखरखाव पीडब्ल्यूडी काे सौंपे जाने का अनुरोध कर रहा था। अब पीडब्ल्यूडी काे इसके रखरखाव की जिम्मेदारी दे दी गई है।
पीडब्ल्यूडी इस ब्रिज के वार्षिक रखरखाव पर 1.5 करोड़ रुपये खर्च करेगा, इसके लिए टेंडर जारी किया है। इस ब्रिज पर रोशनी के अलावा पिछले साल से ठप लेजर लाइटिंग फिर से शुरू हो सकेगी।
अब इस ब्रिज के दाेनों ओर ग्रिल भी लग सकेगी, ग्रिल नहीं होने से इस पुल से कूदकर आत्महत्या करने की कई घटनाएं हो चुकी हैं। कुछ साल पहले दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा की दृष्टि से डीटीटीडीसी को इस पुल पर जाल लगाने का सुझाव दिया था।
2019 से अब तक इस पुल से यमुना में कूदकर 26 लोग आत्महत्या कर चुके हैं। पिछले साल जुलाई में दिल्ली विश्चविद्यालय के एक छात्र के बाद दो अगस्त और 10 सितंबर और को भी इसी पुल से एक महिला ने यमुना में कूदकर आत्महत्या कर ली थी।
शीला दीक्षित की सरकार के समय इसका निर्माण कार्य शुरू हुआ था, इस कार्य के पूरा होने में लगातार देरी होती चली गई और आम आदमी पार्टी के कार्यकाल में 14 साल के बाद इसे पूरा किया गया।
4 नवंबर 2018 को ब्रिज का उद्घाटन हाेने पर डीटीटीडीसी ने पीडब्ल्यूडी को पहला पत्र लिखा था, इसके बाद से डीटीटीडीसी लगातार पत्र लिख रहा था। जिस कंपनी ने इसे बनाया था 2023 में पांच साल पूरे होने पर जिन तकनीकी मामलों में उसकी जिम्मेदारी थी, वह भी दो साल पहले समाप्त हो चुकी थी।
दिल्ली में भाजपा सरकार के आने के बाद इस समस्या का समाधान हो सका है। पीडब्ल्यूडी इस ब्रिज पर चोरी की घटनाएं रोकने के लिए रात में एक सशस्त्र सुरक्षा गार्ड और दिन में बिना बंदूक के दो गार्ड तैनात किए जाएंगे।

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