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    'सुनियोजित थे दिल्ली के दंगे...', पुलिस ने SC में कहा- देश की संप्रभुता और अखंडता पर हमला करने की रची गई थी साजिश

    Updated: Tue, 06 Jan 2026 12:16 AM (IST)

    दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली दंगों के आरोपितों उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत का कड़ा विरोध किया। पुलिस ने अदालत को बताया कि ये दंगे शां ...और पढ़ें

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    नई दिल्ली, प्रेट्र। दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली दंगों के आरोपितों की जमानत का जमकर विरोध किया था। पुलिस ने अदालत को बताया था कि उमर खालिद, शरजील इमाम और अन्य लोगों ने शांतिपूर्ण विरोध की आड़ में 'सत्ता परिवर्तन का अभियान' चलाकर देश की संप्रभुता और अखंडता पर हमला करने की साजिश रची थी। कथित अपराधों में देश को अस्थिर करने का जानबूझकर किया गया प्रयास शामिल था, जिसके लिए जमानत नहीं बल्कि जेल की सजा होनी चाहिए।

    दिल्ली पुलिस ने दावा किया कि दंगे स्वत: नहीं हुए थे बल्कि ये सुनियोजित, पूर्व-नियोजित और सुव्यवस्थित साजिश का हिस्सा थे। साजिश को अंजाम देने से पहले की अवधि के जुटाए गए साक्ष्य, दस्तावेजी संचार, समन्वित योजनाएं और विभिन्न पक्षों के बीच तालमेल, विचारों की स्पष्ट सहमति स्थापित करते हैं।

    मुकदमे में देरी कराई ताकि कर सकें स्वत: जमानत की मांग

    पुलिस ने कहा था कि उसने आरोपितों के विरुद्ध प्रत्यक्ष, दस्तावेजी और तकनीकी साक्ष्य एकत्र किए हैं जो सांप्रदायिक आधार पर राष्ट्रव्यापी दंगों को भड़काने में उनकी अंतर्निहित, गहरी और प्रबल संलिप्तता को दर्शाते हैं। एकत्रित सामग्री न केवल जानकारी, बल्कि इरादे को भी दर्शाती है, जिससे लक्षित व रणनीतिक कार्रवाइयों के माध्यम से देश को बदनाम करने की एक सोची-समझी योजना का पता चलता है।

    पुलिस ने कहा कि याचिकाकर्ताओं ने दुर्भावनापूर्ण और शरारतपूर्ण कारणों से मुकदमे की शुरुआत में देरी कराई है ताकि वे पीड़ित होने का नाटक कर सकें और लंबे समय तक कारावास के आधार पर जमानत मांग सकें। पुलिस ने शीर्ष अदालत में दायर एक हलफनामे में कहा, 'आरोपितों का आचरण और उनके विरुद्ध उपलब्ध अकाट्य व प्रत्यक्ष साक्ष्य उन्हें इस अदालत से जमानत की कोई भी राहत मांगने का अधिकार नहीं देते हैं।'

    पुलिस ने 900 गवाहों के कारण मुकदमा पूरा होने की संभावना नहीं होने के तर्क का खंडन करते हुए कहा कि यह जमानत प्राप्त करने के लिए गढ़ा गया एक तर्क है। पुलिस ने दावा किया कि खालिद और इमाम ने जेएनयू के 'पंथनिरपेक्ष ताने-बाने' को भंग किया, मुस्लिम स्टूडेंट्स आफ जेएनयू नाम से एक सांप्रदायिक वाट्सएप ग्रुप बनाया और उन्हें उकसाने एवं संगठित करने के लिए जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्रों का भी इस्तेमाल किया।

    पुलिस ने अदालत में और क्या कहा?

    पुलिस ने कहा, 'उन्होंने जामिया और शाहीन बाग में छात्रों को भड़काना शुरू कर दिया। उन्होंने विरोध के नाम पर चक्का-जाम का माडल अपनाया और उचित समय आने पर इसे हिंसक चक्का-जाम में बदलने की साजिश रची, जिससे सामान्य जनजीवन के लिए आवश्यक आपूर्ति और सेवाओं में बाधा उत्पन्न हो तथा भारत के प्रांतों को भारत से अलग करने का प्रयास किया जा सके।'

    दावा किया कि चक्का-जाम के पीछे का मकसद सांप्रदायिक दंगे के जरिये बड़े पैमाने पर पुलिसकर्मियों और गैर-मुस्लिमों की हत्या करना व उन्हें घायल करना था। उमर खालिद और अन्य शीर्ष साजिशकर्ताओं के निर्देशन में इमाम ने 13 दिसंबर से 20 दिसंबर, 2019 तक दिल्ली दंगों के पहले चरण की साजिश रची और उसे अंजाम दिया।

    Umar Khalid and Sharjeel (1)

    शरजील इमाम दिल्ली दंगों के पहले चरण को अंजाम देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा था और यह बात शरजील इमाम की चैट से साबित हो सकती है। पुलिस ने कहा कि जनवरी, 2020 में खालिद ने सीलमपुर में गुलफिशा फातिमा, नताशा नरवाल, देवांगना कलिता और अन्य लोगों के साथ एक गुप्त बैठक की थी, जिसमें उसने उन्हें सीलमपुर की स्थानीय महिलाओं को दंगे के लिए चाकू, बोतलें, तेजाब, पत्थर, मिर्च पाउडर और अन्य खतरनाक सामग्री जमा करने के लिए उकसाने का निर्देश दिया था।

    हलफनामे में फातिमा पर प्रमुख समन्वयक के रूप में काम करने का आरोप लगाया गया है, जिसने शांतिपूर्ण धरने को हिंसक प्रदर्शनों में बदलने में मदद की। जामिया समन्वय समिति की सदस्य मीरान हैदर पर कई दिन तक चले विरोध प्रदर्शन स्थलों की देखरेख करने, धन इकट्ठा करने और प्रदर्शनकारियों को पुलिस व गैर-मुस्लिमों पर हमला करने के लिए उकसाने करने का आरोप है।