दुष्कर्म के मामले में आरोपित को दिल्ली हाईकोर्ट से राहत, कहा-आपसी सहमति से संबंध बने, अपराध नहीं बनता
दिल्ली हाईकोर्ट ने शादी का झांसा देकर दुष्कर्म के मामले में ट्रायल कोर्ट के दोषी ठहराने के फैसले को रद्द कर दिया। न्यायमूर्ति मनोज कुमार ओहरी की पीठ न ...और पढ़ें

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने के मामले में एक व्यक्ति को दोषी करार देने के ट्रायल कोर्ट के निर्णय को दिल्ली हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। ट्रायल कोर्ट का आदेश पलटते हुए न्यायमूर्ति मनोज कुमार ओहरी की पीठ कहा कि अभियोजन पक्ष मामले को संदेह से परे साबित नहीं कर सका और अपीलकर्ता को संदेह का लाभ दिया जाना चाहिए।
पीठ ने रिकाॅर्ड पर लिया कि शिकायतकर्ता ने अपने बयान में कहा है कि उसके परिवार के अपीलकर्ता के परिवार के सदस्यों के साथ करीबी संबंध थे, ऐसे में उसके शादीशुदा होने की जानकारी न होने का दावा गलत प्रतीत होता है।
अपीलकर्ता काे बरी करते हुए अदालत ने यह भी कहा कि मामले में जबरदस्ती शारीरिक संबंध के कोई आराेप नहीं हैं और शिकायतकर्ता ने स्वीकार किया है कि उनके बीच आपसी सहमति से शारीरिक संबंध बने थे।
इतना ही शिकायत के बाद शिकायतकर्ता को चिकित्सकीय परीक्षण करने को कहा गया था, लेकिन उसने इससे इन्कार किया था। पीठ ने कहा कि मामले से जुड़े सभी तथ्यों व परिस्थितियों को देखते हुए अपीलकर्ता की याचिका को स्वीकार किया जाता है और ट्रायल कोर्ट के आदेश को रद किया जाता है।
ट्रायल कोर्ट ने 21 अगस्त 2021 को अपीलकर्ता को दोषी करार देते हुए सात साल के कठोर कारवास की सजा सनुाई थी। उक्त आदेश को चुनाैती देते हुए अपीलकर्ता ने कहा कि उसकी पूर्व शादी की जानकारी शिकायतकर्ता को थी और दाेनों के बीच आपसी सहमति से शारीरिक संबंध बने थे।

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