दिल्ली हाई कोर्ट ने पूर्व टीटीडी चेयरमैन वाईवी सुब्बा रेड्डी को अंतरिम राहत देने से किया इनकार, 29 जनवरी को होगी अगली सुनवाई
दिल्ली हाई कोर्ट ने तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) के पूर्व चेयरमैन वाईवी सुब्बा रेड्डी को तिरुपति लड्डू में मिलावट के आरोप से जुड़े मानहानि मामले म ...और पढ़ें

कोर्ट ने TTD के पूर्व चेयरमैन वाईवी सुब्बा रेड्डी को तिरुपति लड्डू विवाद में अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया। फाइल फोटो
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जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) के पूर्व चेयरमैन वाईवी सुब्बा रेड्डी को तिरुपति लड्डू में मिलावट के आरोप से जुड़े विवाद में अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया है। मानहानिकारक प्रकाशनों से जुड़ी उनकी याचिका पर कोर्ट ने साफ किया कि असाधारण परिस्थितियों को छोड़कर एकतरफा अंतरिम आदेश नहीं दिए जा सकते।
जस्टिस अमित बंसल की बेंच ने कहा कि एकतरफा अंतरिम रोक सिर्फ असाधारण और अर्जेंट परिस्थितियों में ही लगाई जा सकती है। कोर्ट ने कहा कि इस स्टेज पर संबंधित संगठन, प्रकाशकों और लेखकों सहित प्रतिवादियों को सुने बिना कोई अंतरिम रोक लगाना उचित नहीं होगा।
पूर्व चेयरमैन सुब्बा रेड्डी जून 2019 से अगस्त 2023 तक TTD मैनेजमेंट कमेटी के चेयरमैन थे। अपनी याचिका में उन्होंने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ प्रकाशित लेखों और पोस्ट ने भगवान श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर के लिए घी की खरीद में अनियमितताओं का आरोप लगाकर उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया है।
हाई कोर्ट ने अंतरिम राहत देने से इनकार करते हुए प्रतिवादियों को यह भी चेतावनी दी कि आदेश के बाद किए गए किसी भी नए प्रकाशन की न्यायिक जांच होगी और उनके कंटेंट के आधार पर कानूनी नतीजे हो सकते हैं। मामले की अगली सुनवाई 29 जनवरी को होनी है।
गौरतलब है कि यह विवाद तब शुरू हुआ जब आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने दावा किया कि राज्य में पिछली वाईएस जगन मोहन रेड्डी सरकार के दौरान तिरुपति लड्डू बनाने में जानवरों की चर्बी का इस्तेमाल किया गया था। YSR कांग्रेस पार्टी ने इन आरोपों को राजनीतिक फायदे के लिए लगाए गए दुर्भावनापूर्ण आरोप बताकर खारिज कर दिया, जबकि सत्ताधारी तेलुगु देशम पार्टी ने अपने दावे के समर्थन में एक लैब रिपोर्ट जारी की।

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