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दिल्ली जन विश्वास विधेयक को मिली मंजूरी, रेखा गुप्ता सरकार ने लिया बड़ा फैसला; समझिए क्या है यह बिल?

Published: Tue, 30 Dec 2025 09:32 PM (IST)

दिल्ली सरकार ने जन विश्वास विधेयक को मंजूरी दे दी है, जिसका उद्देश्य छोटी गलतियों पर लोगों को जेल भेजने ...और पढ़ें

दिल्ली सरकार ने जन विश्वास विधेयक को मंजूरी दे दी है।

दिल्ली सरकार ने जन विश्वास विधेयक को मंजूरी दे दी है।

HighLights

  1. दिल्ली सरकार ने जन विश्वास विधेयक को दी मंजूरी।

  2. छोटे उल्लंघनों को अपराध की श्रेणी से बाहर किया जाएगा।

  3. अदालतों पर बोझ कम होगा, व्यापार करना आसान।

राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। छोटी गलतियों पर लोगों को जेल भेजने से रोकने के लिए केंद्र सरकार की तर्ज पर दिल्ली सरकार ने भी पहल की है। दिल्ली सरकार ने जन विश्वास विधेयक को मंजूरी दे दी है। अब इसे विधानसभा के शीतकालीन सत्र में पारित करने की तैयारी है।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा है कि दिल्ली कैबिनेट में पारित इस विधेयक का उद्देश्य कानूनी अनुपालन प्रक्रियाओं को आसान बनाना और छोटे उल्लंघनों को अपराध की श्रेणी से बाहर करना है। इससे अदालतों पर बोझ कम होगा तथा प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी। लोगों का जीवन सुगम होगा और व्यवसाय करने में आसानी होगी।

उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार के जन विश्वास (प्रविधानों का संशोधन) अधिनियम के तहत केंद्रीय कानूनों में छोटे, तकनीकी तथा प्रक्रियात्मक उल्लंघनों को अपराध की श्रेणी से बाहर किया गया था। इसी के अनुरूप राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को भी अपने कानूनों की समीक्षा करने की सलाह दी गई थी।

दिल्ली सरकार ने इसी दिशा में राज्य-स्तरीय विधायी सुधार के तहत अपने विभिन्न कानूनों की गहन समीक्षा की और पाया कि कई मामलों में आपराधिक दंड की जगह नागरिक दंड अधिक उपयुक्त तथा व्यावहारिक है। इसके लागू होने से छोटे, तकनीकी तथा प्रक्रियात्मक उल्लंघनों में आपराधिक मुकदमे समाप्त किए जाएंगे। उनकी जगह नागरिक दंड, प्रशासनिक जुर्माना और अपील की व्यवस्था होगी। गंभीर अपराधों, सार्वजनिक स्वास्थ्य, सुरक्षा तथा जीवन से जुड़े मामलों में कठोर प्रावधान यथावत रहेंगे।

जुर्माने में समयानुसार वृद्धि होगी

विधेयक में यह भी प्रस्ताव है कि अधिनियम लागू होने के बाद प्रत्येक तीन वर्ष में जुर्माने की राशि में 10 प्रतिशत की वृद्धि होगी। इस विधेयक से सरकार पर कोई अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं पड़ेगा क्योंकि किसी नए पद के सृजन की आवश्यकता नहीं है।

इन अधिनियमों में छोटे अपराधों को अपराधमुक्त कर नागरिक दंड में बदलने का प्रस्ताव हैः

  • दिल्ली औद्योगिक विकास, संचालन एवं अनुरक्षण अधिनियम, 2010
  • दिल्ली दुकान एवं स्थापना अधिनियम, 1954
  • राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र ‘इन्क्रेडिबल इंडिया’ बेड एंड ब्रेकफास्ट प्रतिष्ठान (पंजीकरण एवं विनियमन) अधिनियम, 2007
  • दिल्ली कृषि उपज विपणन (विनियमन) अधिनियम, 1998
  • दिल्ली जल बोर्ड अधिनियम, 1998
  • दिल्ली व्यावसायिक महाविद्यालय/संस्थान अधिनियम, 2007
  • दिल्ली डिप्लोमा स्तरीय तकनीकी शिक्षा संस्थान अधिनियम, 2007