दिल्ली के कूड़े के पहाड़ों की उल्टी गिनती शुरू, खत्म होंगे ओखला और भलस्वा लैंडफिल; लोगों को मिलेगी बड़ी राहत
दिल्ली के कूड़े के पहाड़ों की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। इस साल के मध्य तक ओखला और साल के अंत तक भलस्वा लैंडफिल खत्म हो जाएंगे। गाजीपुर लैंडफिल को समा ...और पढ़ें
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भलस्वा लैंडफिल पर भी कूड़ा निस्तारण का कार्य तेजी से चल रहा है। यहां खाली हुई जमीन पर बांस के पौधे लगा दिए गए हैं। जागरण
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निहाल सिंह, नई दिल्ली। दिल्ली पर धब्बा बन चुके कूड़े के तीनों पहाड़ों की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। इस वर्ष के मध्य में जहां ओखला लैंडफिल पूरी तरह से समाप्त हो जाएगी, जबकि भलस्वा लैंडफिल भी साल के आखिर तक समाप्त हो जाएगी।
वहीं, गाजीपुर लैंडफिल साइट खत्म होने में अभी करीब दो साल का समय लगेगा। लेकिन इस साल 30 साल पुराना ओखला का कूड़े का पहाड़ खत्म हो जाएगा। वहीं, 2019 में जो मिशन इन कूड़े के पहाड़ों को खत्म करने के लिए शुरू हुआ था वह पूरा होना इसी के साथ शुरू हो जाएगा। इससे दिल्ली वालों को स्वच्छ हवा मिल सकेगी साथ ही भूजल प्रदूषण भी कम होगा।
इतना ही नहीं आस-पास के लोग, जिनको कूड़ा पड़े होने की वजह से हमेशा दुर्गंध आने के कारण खिड़की दरवाजे हमेशा बंद रखने पड़ते हैं उन्हें भी राहत मिलेगी। दिल्ली में इन कूड़े के पहाड़ों ने 202 एकड़ जमीन घेर रखी हैं। जब यह जमीन कूड़ा मुक्त हो जाएगी तो एमसीडी इन पर विभिन्न परियोजनाएं कूड़ा निस्तारण के लिए शुरू करेगी।

दिल्ली में खत्म होंगे कूड़े के पहाड़। जागरण
दिल्ली के तीनों कूड़े के पहाड़ों को खत्म करने के लिए एमसीडी का युद्ध स्तर पर कार्य चल रहा है। साथ ही इसके निस्तारण में जो भी समस्याएं थीं, वह वर्ष 2025 में हल हो चुकी हैं। स्थायी समिति का गठन न होने की वजह से कूड़ा निस्तारण की क्षमता बढ़ाने के लिए ढाई साल तक परियोजनाओं को मंजूर नहीं किया जा सका था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर इन परियोजनाओं को पिछले साल मंजूरी मिली थी।
50 हजार प्रतिदिन मीट्रिक टन कूड़ा निस्तारण का है लक्ष्य
एमसीडी ने वर्ष 2025 के दिसंबर में तीनों कूड़े के पहाड़ से प्रतिदिन कूड़े के निस्तारण की मात्रा 40 हजार मीट्रिक टन का लक्ष्य प्राप्त कर लिया है। जिसे आगामी माह में 50 और फिर 60 हजार मीट्रिक टन प्रतिदिन किया जाना है। तीसरे चरण में 30-30 लाख मीट्रिक टन कूड़े का निस्तारण के टेंडर होते ही यह क्षमता बढ़ जाएगी। अभी 52 ट्रामल मशीनों से तीनों लैंडफिल पर यह कूड़ा निस्तारित किया जा रहा है।
बताया गया कि ट्रामल मशीनों पर लैंडफिल पर एकत्रित कूड़े को खोदाई कर लैंडफिल पर ही फैलाकर सुखाया जाता है। फिर इसे ट्रामल मशीनों पर डाल दिया जाता है। इसमें लगी बारीक जालिया कूड़े में से निष्क्रिय मिट्टी को अलग कर देती है जबकि प्लास्टिक और लोहे के साथ ईंट व मलबे को अलग-अलग कर देती है।
निष्क्रिय मिट्टी (इनर्ट) व मलबा - लैंडफिल साइटों पर जो इनर्ट निकलती है उसे खाली स्थानों और हाइवे के निर्माण में उपयोग किया जाता है। एमसीडी ने तीनों लैडफिल से निकली इनर्ट का उपयोग राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के रोड बनाने के लिए भराव में किया है। इसमे दिल्ली मेरठ एक्सप्रेस वें और यूईआर-2 शामिल हैं। इसके साथ ही बदरपुर के ईको पार्क और नरेला, रोहिणी समेत अन्य इलाकों के निचले इलाकों के भराव के लिए किया जा रहा है।
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इन कूड़े के पहाड़ों पर बड़ी मात्रा में ऐसा प्लास्टिक भी निकल रहा है जिसे ईंधन के तौर पर सीमेंट फैक्ट्रियों से लेकर पेपर मिल में उपयोग किया जा रहा है। एमसीडी फिलहाल चित्तौडगढ़ में किया जा रहा है वहीं शामली की पेपर मिल में इसका उपयोग किया जा रहा है।
पूर्व में कब-कब बदली जा चुकी है डेडलाइन
एनजीटी के आदेश पर 2019 में कूड़े के पहाड़ों को निस्तारण का कार्य शुरू हुआ था। पहले 2022 तक इन्हें खत्म किया जाना था लेकिन फिर मार्च 2023 और 2024 की डेडलाइन आई लेकिन, कूड़े के पहाड़ो के निस्तारण के लिए परियोजनाओं की मजूरी में स्थायी समिति के गठन न होने के कारण देरी हुई। इसलिए इसे बाद में बढ़ाकर 2024-26 किया गया। इसके बाद अब भलस्वा लैंडफिल खत्म करने की समय-सीमा दिसंबर 2026 और ओखला की जुलाई 2026 जबकि गाजीपुर लैंडफिल को खत्म करने की समय-सीमा दिसंबर 2027 तय की गई।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में दिल्ली को स्वच्छ और सुंदर बनाने का कार्य चल रहा है। सीएम रेखा गुप्ता के दिशा-निर्देश पर काम हो रहा है। इस साल हमारी कोशिश ओखला और भलस्वा लैंडफिल को समाप्त करने की है।जबकि अगले साल हमने गाजीपुर लैंडफिल को खत्म करने का लक्ष्य रखा है। हम इस लक्ष्य को तय समय में पूरा कर लेंगे। - राजा इकबाल सिंह, महापौर, दिल्ली
दिल्ली की लैंडफिल साइट्स में कूड़े की मात्रा (लाख मीट्रिक टन में) - 2022 लैंडफिल साइट 2022 में कितना कूड़ा था
(प्रारंभिक/लेगेसी)कितना नया कूड़ा आया कितना कूड़ा पड़ा था
(कुल = प्रारंभिक + नया)अब कितना बचा है
(प्रोसेसिंग के बाद)ओखला 45 30.9 53.66 22.24 भलस्वा 73 37.94 75.51 35.43 गाजीपुर 85 22.32 30.5 76.82 कुल 203 91.16 159.67 134.49 नोट: कूड़े की मात्रा लाख मीट्रिक टन में है।

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