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    दिल्ली में शब्दोत्सव की शुरुआत, CM रेखा गुप्ता ने कहा- विदेश से देश की आलोचना करने वाले अपनी जड़ों से कटे हुए

    Updated: Fri, 02 Jan 2026 07:41 PM (IST)

    मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दिल्ली में तीन दिवसीय सांस्कृतिक और साहित्यिक शब्दोत्सव का उद्घाटन किया। उन्होंने इसे अतीत और वर्तमान का जीवंत संवाद बताया, ...और पढ़ें

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    शब्दोत्सव के दौरान विचार रखती दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता। हरीश कुमार

    जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शुक्रवार को मेजर ध्यानचंद राष्ट्रीय स्टेडियम में तीन दिवसीय सांस्कृतिक और साहित्यिक शब्दोत्सव का उद्घाटन किया। मुख्यमंत्री ने उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए शब्दोत्सव को अतीत और वर्तमान का जीवंत संवाद बताया।

    उन्होंने कहा कि वैदिक काल से डिजिटल युग तक की यात्रा को प्रदर्शित करने वाला यह आयोजन अपनी मिट्टी और संस्कारों से जुड़ने का संदेश भी है। अपनी मूल पहचान खोए बिना भी विकास संभव है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने परोक्ष रूप से विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि विदेश जाकर अपने देश की आलोचना करने वाले लोग कभी अपने जड़ों से जुड़े ही नहीं थे।

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    फोटो: हरीश कुमार

    उन्होंने कहा कि यह आयोजन उन सवालों का भी जवाब है, जो हर भारतीय माता-पिता के मन में होते हैं कि आधुनिकता की राह पर चलते हुए अपने बच्चों को संस्कृति से कैसे जोड़ सकते है। यदि बच्चे अपनी जड़ों से मजबूती से जुड़े रहेंगे तो देश को 'द केरला स्टोरी' जैसी विडंबनाएं नहीं देखनी पड़ेंगी।

    वंदे मातरम गीत के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई। उद्घाटन सत्र में मौजूद केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल साक्षरता या तकनीकी कौशल प्रदान करना नहीं है बल्कि व्यक्ति के चरित्र का निर्माण करना है। भारत की संस्कृति विश्व की प्राचीनतम और सबसे समृद्ध संस्कृतियों में से एक है।

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    फोटो: हरीश कुमार

    हमारी पाठ्यपुस्तकों और शैक्षणिक ढांचे में इस समृद्धि का प्रतिबिंब होना अनिवार्य है, ताकि आने वाली पीढ़ी केवल शिक्षित न बने बल्कि संस्कारी भी हो। उन्होंने कहा कि हम अक्सर देखते हैं कि उच्च शिक्षण संस्थानों से निकले व्यक्ति भी कभी-कभी भटक जाते हैं।

    समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट जैसे मामलों में जब किसी उच्च शिक्षित व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है, तो यह इस बात का प्रमाण है कि व्यक्ति के पास डिग्री और तकनीकी शिक्षा तो है, लेकिन उसमें अपने देश के वास्तविक इतिहास और सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति ज्ञान और बोध की बहुत कमी है।

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    फोटो: हरीश कुमार

    इस अवसर पर भाषा व संस्कृति मंत्री कपिल मिश्रा ने शब्दोत्सव के उद्घाटन सत्र के दौरान कहा कि यह केवल एक साहित्यिक आयोजन नहीं है, यह भारत विरोधी और नक्सली विचारधाराओं पर एक वैचारिक सर्जिकल स्ट्राइक है।

    जब कोई सेना, पुलिस या मंदिर पर पत्थर या बंदूक उठाता है, तो वह हिंसक विचार उसके दिमाग में पहले उपजता है। शब्दोत्सव उन्हीं घातक विचारों को जड़ से मिटाने का अभियान है। उन्होंने कहा कि देश की अखंडता की रक्षा के लिए नक्सली सोच पर प्रहार करने वाला यह आयोजन अब हर वर्ष एक शृंखला के रूप में आयोजित किया जाएगा।

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    फोटो: हरीश कुमार

    वहीं, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचारक प्रमुख सुनील आंबेकर ने कहा कि भारतीय परंपरा में शब्दों को केवल संवाद का माध्यम नहीं बल्कि आराधना और शक्ति का स्वरूप माना गया है। संत ज्ञानेश्वर जैसी महान विभूतियों ने शब्दों को सहेजकर साहित्य का सृजन किया। जहां शब्द आस्था और साधना के प्रतीक बने।

    आज के दौर में शब्दों के साथ एक बड़ा मायाजाल खड़ा कर दिया गया है। स्वतंत्रता जैसे सुंदर और पावन शब्दों के अर्थों को भी विकृत कर प्रस्तुत किया जा रहा है। आज पूरी दुनिया शब्दों के इस मायाजाल और उनके गलत अर्थों से त्रस्त है। वर्तमान समय एआई का है। जिसकी क्षमताएं असीमित हैं।

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    फोटो: हरीश कुमार

    लेकिन हमें यह समझना होगा कि तकनीक कितनी भी तेज क्यों न हो, वह मानवीय मूल्यों और विवेक का स्थान नहीं ले सकती। यदि शब्दों के ज्ञाता और मनीषी खुद को आधुनिक तकनीक से नहीं जोड़ेंगे तो ये शक्तिशाली उपकरण गलत हाथों में जाकर समाज को गलत दिशा में ले जाएंगे। उद्घाटन सत्र में सुरुचि प्रकाशन के अध्यक्ष सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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