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चारधाम हवाई मार्ग पर नहीं थम रहा हादसों का सिलसिला, 10 साल में आठ दुर्घटनाएं; सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल

Published: Fri, 30 Oct 2026 09:10 PM (IST)

उत्तराखंड के चारधाम हवाई मार्ग पर हेलिकॉप्टर हादसों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। आंकड़ों के मुताबिक पिछले ...और पढ़ें

उत्तराखंड में दुर्घटनाग्रस्त हेलिकाप्टर। फोटो-जागरण आर्काइव

उत्तराखंड में दुर्घटनाग्रस्त हेलिकाप्टर। फोटो-जागरण आर्काइव

HighLights

  1. पिछले 10 साल में चारधाम में 8 हेलिकॉप्टर दुर्घटनाएं।

  2. वर्ष 2025 में सर्वाधिक 4 हेलिकॉप्टर हादसे हुए।

  3. पर्वतीय क्षेत्र में हेलिकॉप्टर उड़ानें अत्यधिक जोखिम भरी।

गौतम कुमार मिश्रा, नई दिल्ली। उत्तराखंड में शुक्रवार को हुए हेलिकाप्टर हादसे ने चारधाम हवाई मार्ग पर विमानन सुरक्षा को लेकर चिंता एक बार फिर बढ़ा दी है।

एयरक्राफ्ट एक्सिडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (एएआइबी) के विश्लेषण के मुताबिक, वर्ष 2015 से 2025 के बीच चारधाम क्षेत्र में हेलिकाप्टरों से जुड़ी आठ दुर्घटनाएं और एक गंभीर घटना दर्ज की गई। यानी 10 साल में कुल नौ घटनाएं हुईं।

इक साल में चार दुर्घटनाएं

चिंताजनक पहलू यह है कि वर्ष 2022 से लगातार हर साल कम से कम एक दुर्घटना या गंभीर घटना हुई है। एएआइबी के अनुसार, वर्ष 2025 हादसों के लिहाज से सबसे खराब रहा। इस साल चार दुर्घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें दो जानलेवा थीं।

एक साल में दुर्घटनाओं की यह सर्वाधिक संख्या है। चारधाम यात्रा के दौरान हेलिकाप्टर सेवाओं पर श्रद्धालुओं की निर्भरता को देखते हुए ये आंकड़े सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा की जरूरत बताते हैं।

चारधाम क्षेत्र में हुए कुछ बड़े हादसे की लिस्ट

10 जून 2017, बद्रीनाथ: हेलिकाप्टर हादसे में एक इंजीनियर की मौत हुई थी।
18 अक्टूबर 2022, केदारनाथ: गरुड़ चट्टी के पास हेलिकाप्टर दुर्घटनाग्रस्त हुआ था। इसमें पायलट समेत सात लोगों की जान गई थी।
8 मई 2025, गंगनानी: हेलिकाप्टर हादसे में छह लोगों की मौत हुई थी।
15 जून 2025, गौरीकुंड: केदारनाथ से लौट रहा हेलिकाप्टर दुर्घटनाग्रस्त हुआ था। इसमें पायलट समेत सात लोगों की मौत हुई थी।

पर्वतीय उड़ानों में ज्यादा जोखिम

चारधाम क्षेत्र का भौगोलिक स्वरूप हेलिकाप्टर परिचालन को चुनौतीपूर्ण बनाता है। ऊंचाई, संकरी घाटियां, तेज हवाएं, अचानक मौसम बदलना और कम दृश्यता उड़ान के जोखिम बढ़ाते हैं। ऐसे क्षेत्रों में मौसम की सटीक जानकारी, पायलटों का अनुभव, हेलिकॉप्टरों की नियमित तकनीकी जांच और उड़ान नियमों का सख्त पालन बेहद जरूरी है।

लगातार सामने आ रही दुर्घटनाएं संकेत देती हैं कि चारधाम हवाई सेवाओं में सुरक्षा मानकों, निगरानी व्यवस्था और परिचालन प्रक्रियाओं की समीक्षा जरूरी है। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के बीच सुरक्षित हवाई यात्रा सुनिश्चित करना बड़ी चुनौती है।

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