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    दिल्ली में बैंक के ऑडिट अफसर बन करते थे धोखाधड़ी, पुलिस ने तीन आरोपितों को किया गिरफ्तार

    Updated: Fri, 02 Jan 2026 02:31 AM (IST)

    क्राइम ब्रांच ने बैंक लोन धोखाधड़ी मामले में दिल्ली से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। ये आरोपी फर्जी सीनियर ऑडिट ऑफिसर पहचान पत्र बनवाकर विभिन्न बै ...और पढ़ें

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    सांकेतिक तस्वीर।

    जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। बैंक लोन धोखाधड़ी मामले में क्राइम ब्रांच ने तीन आरोपित को गिरफ़्तार किया है। तीनों ने सीनियर ऑडिट अफसर का फर्जी पहचान पत्र बनवा बजाय फाइनेंस समेत कई बैंकों से लोन ले लिया था। शुरू में कुछ महीने तक ईएमआई भरने के बाद वे बैंकों को ईएमआई देना बंद कर देते थे और पैसे गबन कर जाते थे। इनकी गिरफ्तारी से पुलिस से बजाज फाइनेंस से छह साल पुराने बैंक लोन धोखाधड़ी के मामले को सुलझा लिया है। बजाय फाइनेंस से 25 लाख रुपये लोन लिया था।

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    डीसीपी हर्ष इंदौरा के मुताबिक गिरफ्तार किए गए जालसाजों के नाम अतुल अग्रवाल उर्फ मनीष कुमार (पटना, बिहार), अजय चौरसिया (निहाल विहार) और दीपक धौंडियाल (देहरादून, उत्तराखंड) है। इन्होंने खुद को सरकारी अधिकारी बताकर फर्जी पहचान से आय के दस्तावेज तैयार किए और धोखाधड़ी से अलग-अलग बैंकों से लोन ले लिया था।

    लोन की इएमआई डिफाल्ट होने से खुला मामला 

    बजाज फाइनेंस की ओर से लोक नारायण करोतिया नाम के व्यक्ति ने कोर्ट के जरिये दो सितंबर 2022 को क्राइम ब्रांच में एफआईआर दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया था कि आरोपितों ने फर्जी सरकारी कर्मचारी का आईडी कार्ड और फर्जी आय दस्तावेज जमा करके वेतनभोगी पर्सनल लोन लिया था। उन्होंने झूठा दावा किया कि वे प्रिंसिपल डायरेक्टर आफ कामर्शियल ऑडिट, कैग बिल्डिंग, बहादुर शाह जफर मार्ग के कार्यालय में सीनियर ऑडिट अफसर के पद पर कार्यरत हैं।

    लोन की इएमआई डिफाल्ट होने के बाद धोखाधड़ी का पता चला। जांच से पता चला कि आरोपितों द्वारा बताए गए कार्यालय में कभी काम नहीं किया था। एसीपी राजपाल डबास व इंस्पेक्टर अक्षय के नेतृत्व में पुलिस टीम ने कई महीने तक टेक्निकल सर्विलांस के बाद तीनों को गिरफ्तार कर लिया।

    बैंकिंग सेक्टर में पहले काम कर चुके हैं तीनों आरोपित

    पुलिस का कहना है कि आरोपित पहले लोगों को अपने झांसे में लेकर उनके फर्जी दस्तावेज बनवाते थे और फिर अलग-अलग बैंकों में उनके खाते खुलवा देते थे। फर्ज़ी कंपनी के खातों से कुछ महीनों तक उनके खातों में सैलरी के तौर पर पैसे जमा करा देते थे।

    जैसे ही ''सैलरी वाले खाते'' को किसी बैंक से लोन का कोई ऑफर मिलता था, वे लोन के लिए अप्लाई कर देते थे। फर्जी दस्तावेज के आधार पर लोन अप्रूव हो जाने के बाद ये लोग कुछ महीने तक लोन की इएमआइ भी चुकाते थे। उसके बाद ये लोग उस व्यक्ति को कुछ पैसे देकर बाकी पैसे आपस में बांट लेते थे।

    अतुल अग्रवाल 10वीं तक पढ़ाई की है। वह पहले बैंकिंग सेक्टर में काम करता था। आसान पैसा कमाने के लिए वह इस तरह के अपराध में शामिल हो गया। उसने खुद को मनीष कुमार बताया और बजाज फाइनेंस लिमिटेड से पर्सनल लोन लिया। अजय गर्ग आठवीं क्लास तक पढ़ाई की है।

    वह भी पहले बैंकिंग सेक्टर में काम करता था। आसान पैसे कमाने के लिए वह इस अपराध में शामिल हो गया। उसने फ़र्ज़ी बैंक खाता खोला और फ़र्ज़ी सैलरी रिमार्क्स के साथ पैसे जमा किए। दीपक धौंडियाल ग्रेजुएट है। वह भी पहले बैंकिंग सेक्टर में काम करता था। आसान पैसा कमाने के लिए वह इस अपराध में शामिल हो गया।