गांव तक पहुंचा चांद-तारों का ज्ञान, दिल्ली के आर्यन ने स्कूलों में पहुंचाया आसमान
आर्यन मिश्रा, 'एस्ट्रोस्केप' के संस्थापक, ग्रामीण सरकारी स्कूलों में खगोल विज्ञान प्रयोगशालाएं स्थापित कर रहे हैं। 25 वर्षीय आर्यन ने अब तक 14 राज्यों ...और पढ़ें
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दिल्ली के आर्यन मिश्रा द्वारा स्थापित एस्ट्रोनामी लैब। सौ.स्वय
शालिनी देवरानी, दक्षिणी दिल्ली। ऊंचाई से गिरी चीजें जमीन तक कैसे पहुंचती हैं? अलग-अलग आकार की गेंदों में दूर कौन सी जाएगी? चुंबक लोहे को खींचता है, लकड़ी को क्यों नहीं? हृदय खून साफ कैसे करता है? नजदीक से सौरमंडल कैसा दिखता है? देशभर के ग्रामीण इलाकों के सरकारी स्कूलों के बच्चे ऐसे सवालों के जवाब खुद व्यावहारिक तरीके से पा रहे हैं।
यह संभव हुआ है दिल्ली के युवा एस्ट्रोनामर आर्यन मिश्रा की खास 'एस्ट्रोनामी लैब' के जरिए। 25 वर्षीय आर्यन ‘एस्ट्रोस्केप’ के संस्थापक हैं, और इसके माध्यम से वे गांव-कस्बों के स्कूलों में एस्ट्रोनामी लैब्स बनाते हैं। इन लैब्स में बच्चे सीखते हैं और नई खोज करते हैं।
आर्यन ये खगोल विज्ञान प्रयोगशालाएं सरकार के सहयोग से स्थापित करते हैं। रंग-बिरंगी लैब में बच्चे वर्चुअल रियलिटी के जरिए अंतरिक्ष की सैर करते हैं, स्टार चार्ट और थ्रीडी माडल के जरिए अंतरिक्ष व विज्ञान के पाठ पढ़ते हैं और टेलीस्कोप से चांद, तारों व ग्रहों की जानकारी पाते हैं।
इसके लिए लैब में दूरबीन, स्पेक्ट्रोग्राफ, उपकरण, किताबें, प्लैनिस्फेयर और चंद्र मानचित्र लगाए जाते हैं। डेमोंस्ट्रेशन के लिए माडल्स और इंस्ट्रूमेंट्स के साथ पोस्टर और चित्र भी होते हैं। लैब स्थापना के बाद स्कूली शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाता है। खासियत ये है कि आर्यन इन लैब में एस्ट्रोनामी कैंप भी लगाते हैं, जहां ग्रामीणों को टेलीस्कोप से अंतरिक्ष की सैर कराते हैं।
चार साल में बनाई 355 एस्ट्रोनामी लैब
आर्यन मिश्रा मूल रूप से उत्तर प्रदेश के हैं और पहली लैब साल 2022 में उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के खुटहन ब्लाक में बनाई थी। अब तक देश के 14 राज्यों के 28 जिलों में कुल 355 एस्ट्रोनामी लैब तैयार की हैं, जिनमें से करीब 220 लैब उत्तर प्रदेश में हैं।
दिल्ली के सबसे नजदीक बुलंदशहर के सिंकदराबाद में है और उत्तर प्रदेश के सहारपुर, बिजनौर, हरदोई, बलिया, कुशीनगर से लेकर बेंगलुरु, मिजोरम, छत्तीसगढ़, अरुणाचल प्रदेश, झारखंड, तेलंगाना जैसे सुदूर इलाकों में भी लैब स्थापित की है।
14 साल की उम्र में क्षुद्रग्रह खोजकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छाए
आर्यन का बचपन वसंत कुंज की कुसुमपुर पहाड़ी पर बिता है। बताते हैं कि पिता घरों में अखबार डालने का काम करते हैं और मैं भी छोटी उम्र से ही सुबह चार बजे उठकर पापा के साथ जाता था। छठी कक्षा में एक बार टेलीस्कोप से शनि ग्रह (सैटर्न) देखा था, तभी से अंतरिक्ष में रुचि हो गई।
9वीं कक्षा में अमेरिका के इंटरनेशनल एस्ट्रानामिकल सर्च कोलेबरेशन की ओर से एस्टेरायड सर्च कैंपेन में भाग लिया और जुपिटर (बृहस्पति) और मार्स (मंगल) के बीच नया एस्टेरायड (क्षुद्रग्रह) खोजा और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नाम चमकाया था।
एक नजर में लैब
- 2018 में की थी एस्ट्रोस्केप की स्थापना
- 2022 में बनी थी पहली लैब
- 355 लैब अब तक की हैं स्थापित
- 14 राज्यों में 28 जिलों में हैं लैब
शालिनी देवरानी

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