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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 05, 2018 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

अपने ही जाल में फंस गए केजरीवाल, उल्टा पड़ा दांव, कार्यकर्ताओं ने पूछे सवाल

By Amit MishraEdited By:
Published: Fri, 05 Jan 2018 06:10 PM (IST)Updated: Sat, 06 Jan 2018 08:57 PM (IST)

राज्यसभा उम्मीदवारों के नाम लेकर कार्यकर्ताओं में रोष बढ़ रहा है। कई कार्यकर्ता खुले तौर पर विरोध में उतर आए हैं। सवाल पूछ रहे हैं, लेकिन केजरीवाल मौन हैं।

अपने ही जाल में फंस गए केजरीवाल, उल्टा पड़ा दांव, कार्यकर्ताओं ने पूछे सवाल
अपने ही जाल में फंस गए केजरीवाल, उल्टा पड़ा दांव, कार्यकर्ताओं ने पूछे सवाल

नई दिल्ली [जेएनएन]। राज्यसभा उम्मीदवारों के नाम सामने आने के बाद आम आदमी पार्टी की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। दो कारोबारियों को राज्यसभा का उम्मीदवार बनाए जाने का फैसला आम 'आप' के मुखिया अरविंद केजरीवाल के गले की फांस बनता जा रहा है। इस फैसले के खिलाफ कार्यकर्ताओं में रोष बढ़ रहा है। कई कार्यकर्ता तो खुले तौर पर विरोध में उतर आए हैं। कार्यकर्ता सवाल पूछ रहे हैं, लेकिन केजरीवाल मौन हैं।

निशाने पर आ गए केजरीवाल 

'आप' के इस फैसले के बाद संयोजक अरविंद केजरीवाल सीधा निशाने पर आ गए हैं। बाहर के लोग पहले की केजरीवाल का विरोध कर रहे थे अब पार्टी के अंदर भी उनके इस फैसले को लेकर असंतोष है। जिन्होंने पार्टी को खड़ा करने में अपना सबकुछ दांव पर लगा दिया उनको नजरअंदाज किए जाने से कार्यकर्ता बेहद नाराज हैं, कुछ कार्यकर्ताओं का कहना है कि सिद्धांतों पर चलने वाली पार्टी की वजह से वो इसमें आए थे, लेकिन यहां नियम दरकिनार किए जा रहे हैं।

कार्यकर्ताओं का विरोध

हाल ही में आम आदमी पार्टी के निगम पार्षद अतुल व कुछ कार्यकर्ता सिविल लाइन स्थित मुख्यमंत्री आवास के बाहर पहुंचे थे। जब उनसे वहां आने का कारण पूछा गया तो उनका कहना था कि वो बस इतना जानना चाहते हैं कि बाहर के लोगों को टिकट क्यों दिया गया। पार्टी के इस फैसले से बेहद ही हैरान हैं आखिर ऐसी क्या मजबूरी थी कि पार्टी के अंदर से कोई ऐसा नहीं मिला जिस पर विश्वास जताया जाता।  

महंगा पड़ सकता है दांव 

सूत्रों की मानें तो केजरीवाल और उनकी पार्टी को यह दांव महंगा पड़ सकता है। इस फैसले से कार्यकर्ता नाराज हैं, लेकिन वे खुलकर बोलने से बच रहे हैं। यह मुद्दा गरमा सकता है। इस फैसले से उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के विधानसभा क्षेत्र के 'आप' कार्यकर्ता भी नाराज हैं। बृहस्पतिवार को कार्यकर्ता मुख्यमंत्री से जवाब मांगने भी पहुंचे थे। 

कुमार पर नहीं किया 'विश्वास' 

राज्यसभा सीट की आस लगाए कुमार विश्वास को 'आप' ने झटका दिया और उनकी जगह संजय सिंह, सुशील गुप्ता और एन डी गुप्ता को राज्यसभा उम्मीदवार घोषित किया। इस के बाद कुमार ने सीएम केजरीवाल पर निशाना साधते हुए कहा था कि उन्हें सच बोलने की सजा दी जा रही है, अगर कोई केजरीवाल से असहमत है तो उसके लिए आम आदमी पार्टी में रह पाना मुश्किल है।  

केजरीवाल के खिलाफ बगावती तेवर

दोनों नेताओं के बीच विरोध किसी से छिपा नहीं है इससे पहले भी कुमार विश्वास पार्टी और केजरीवाल के खिलाफ बोल चुके हैं। कुमार ही एक मात्र ऐसे नेता नहीं हैं जिन्होंने केजरीवाल का विरोध किया हो, इससे पहले भी पार्टी के अंदर और बाहर नेताओं ने केजरीवाल के खिलाफ बगावती तेवर अपनाए हैं।

अब तक भारी पड़े हैं केजरीवाल 

खास बात यह है कि जिसने भी केजरीवाल के खिलाफ बोला उसे बाद में या तो सत्ता गंवानी पड़ी या फिर पार्टी से बाहर का रास्‍ता दिखा दिया गया। इस मामले में सबसे बड़ा नाम प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव है। दोनों 'आप' के संस्थापक सदस्य रहे और कई मौकों पर योगेंद्र व प्रशांत केजरीवाल के ढाल बने। विधानसभा चुनाव में भी योगेंद्र यादव-प्रशांत भूषण और केजरीवाल के बीच मतभेद उभरकर सामने आए थे। नतीजा यह हुआ कि दोनों को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। 

ये नाम भी लिस्ट में हैं 

इसके अलावा विनोद कुमार बिन्‍नी, कपिल मिश्रा, सोशल एक्टिविस्ट मयंक गांधी, सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर और अंजलि दमानिया प्रमुख हैं। इन सभी नेताओं ने केजरीवाल का विरोध किया था और आज पार्टी से बाहर हैं। 

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