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वायु प्रदूषण पर हाईकोर्ट ने कहा, 'दिल्ली में आपातकालीन स्थिति, एयर प्यूरीफायर पर GST कम करें'

Published: Wed, 24 Dec 2025 01:50 PM (GMT+05:30)Updated: Wed, 24 Dec 2025 02:27 PM (GMT+05:30)

दिल्ली हाई कोर्ट ने एयर प्यूरीफायर पर 18 प्रतिशत के बजाय 5 प्रतिशत जीएसटी लगाने पर विचार करने को कहा ...और पढ़ें

HighLights

  1. दिल्ली में वायु प्रदूषण आपातकालीन स्थिति: हाई कोर्ट

  2. एयर प्यूरीफायर पर जीएसटी कम करने पर विचार

  3. नागरिकों को शुद्ध हवा की जरूरत: दिल्ली हाई कोर्ट

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। एयर-प्यूरीफायर पर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) घटाने की मांग वाली याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने वायु गुणवत्ता बहुत खराब होने के बावजूद भी अधिकारियों द्वारा जीएसटी दरों का कम करने की दिशा में कोई कदम नहीं उठाने पर बुधवार को अधिकारियों को फटकार लगाई।

सुनवाई के दौरान दिल्ली में वायु प्रदूषण को आपातकालीन बताते हुए मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय व न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की पीठ ने कहा कि अधिकारी नागरिकों को साफ हवा नहीं दे सकते तो एयर फ्यूरीफायर पर लगने वाली 18 प्रतिशत जीएसटी की दरों को तो कम कर सकते हैं। अदालत ने वायु प्रदूषण के मुद्दे पर कुछ भी न करने पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि प्रत्येक नागरिकों को शुद्ध हवा की जरूरत है, लेकिन अधिकारी यह भी मुहैया नहीं करा पा रहे हैं।

पीठ ने सवाल किया कि आप जानते हैं कि हम एक दिन में कितनी बार सांस लेते हैं, कम से कम 21,000 बार। जरा सोचिए कि आप दिन में 21,000 बार सांस लेकर अपने फेफड़ों को कितना नुकसान पहुंचा रहे हैं, और यह अनैच्छिक है। मामले में दोपहर के बाद हुई सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की तरफ से सूचित किया गया कि जीएसटी परिषद की बैठक पर वित्त मंत्रालय निर्णय लेता है।

इस पर पीठ ने एयर प्यूरीफायर को 'चिकित्सा उपकरण' के तौर पर वर्गीकृत करने और उन पर लगने वाले जीएसटी को 18 प्रतिशत से घटाकर पांच प्रतिशत करने के मुद्दे पर विचार करने के लिए अदालत ने (जीएसटी) परिषद की एक तत्काल बैठक बुलाने को कहा है।

अदालत ने कहा कि संसदीय स्टैंडिंग कमेटी की दिसंबर में पेश की गई एक रिपोर्ट में सिफारिश की गई थी कि सरकार को सहानुभूतिपूर्ण नज़रिया अपनाना चाहिए और एयर प्यूरीफायर में इस्तेमाल होने वाले एचईपीए फिल्टर पर जीएसटी या तो खत्म कर देना चाहिए या कम कर देना चाहिए।

पीठ ने कहा कि अदालत को सूचित किया गया है कि जीएसटी परिषद पूरे भारत में फैली हुई है और बैठक बुलाने में कुछ समय लग सकता है। हालांकि, दिल्ली और आस-पास के इलाकों में हवा की गुणवत्ता की स्थिति को देखते हुए जीएसटी परिषद को जल्द से जल्द बैठक करनी चाहिए और दिल्ली और उसके आसपास की खराब एयर क्वालिटी को देखते हुए इस मुद्दे पर विचार करना चाहिए।

कोर्ट ने केंद्र सरकार की तरफ से पेश हुए एडिशनल सालिसिटर जनरल चेतन शर्मा को निर्देश दिया कि वे जीएसटी परिषद की बैठक कितनी जल्दी हो सकती है, इस बारे में निर्देश मांगें। साथ ही अदालत ने मामले की सुनवाई शीतकालीनपीठ के समक्ष 26 दिसंबर के लिए सूचीबद्ध कर दी। साथ ही यह भी कहा कि गर परिषद की बैठक भौतिक रूप से संभव नहीं है, तो इसे वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए करने पर विचार किया जा सकता है।

अधिवक्ता कपिल मदान ने जीएसटी दर कम करने की मांग करते हुए कहा कि दिल्ली में गंभीर वायु प्रदूषण के कारण पैदा हुए अत्यधिक आपातकालीन संकट को देखते हुए एयर-प्यूरीफायर को लग्जरी नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि यह आर्थिक रूप कमजोर वर्ग पर एक मनमाना, अनुचित और संवैधानिक रूप से अस्वीकार्य बोझ डालता है।

याचिका में कहा गया कि एयर-प्यूरीफायर केंद्र द्वारा जारी 2020 की अधिसूचना के तहत चिकित्सा उपकरण के मानदंडों को पूरा करता है। याचिका में कहा गया कि एयर-प्यूरीफायर सुरक्षित सांस लेने और जानलेवा खतरों को कम करके एक जरूरी चिकित्सा उपकरण का काम करते हैं।

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