शगुन विवाह उत्सव: JLN स्टेडियम में 51 जोड़ों ने रचाई शादी, पूर्व राष्ट्रपति कोविंद व CM रेखा गुप्ता रहीं मौजूद
जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम के जोरा कन्वेंशन सेंटर में शगुन विवाह उत्सव के तहत 51 जरूरतमंद जोड़ों का सामूहिक विवाह ...और पढ़ें
HighLights
जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में 51 जोड़ों का विवाह।
पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने दिया आशीर्वाद।
शगुन विवाह उत्सव ने जरूरतमंदों के सपने साकार किए।
शालिनी देवरानी, दक्षिणी दिल्ली। भव्यता से सजे विवाह मंडप, झिलमिलाती रोशनी और आतिशबाजी के बीच शंखनाद। मंत्रोच्चारण के बीच जैसे ही वर-वधुओं ने प्रवेश किया प्रांगण दिव्यता से ओजित हो उठा। जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम स्थित जोरा कन्वेंशन सेंटर सोमवार को साक्षी बना 51 कन्याओं को सामूहिक विवाह का।
आर्थिक रूप से कम जरूरतमंद जोड़ों के सपने भी उसी शान-ओ-शौकत के साथ साकार होते नजर आए, जो अमूमन आर्थिक रूप से संपन्न परिवारों की शादियों में ही देखने को मिलता है। शगुन विवाह उत्सव के तहत आयोजित इस पावन मौके पर नवविवाहित जोड़ों को पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, स्वामी अवधेशानंद गिरी महाराज का आशीर्वाद भी मिला।
मंडप देख सभी हो गए हैरान
मंत्रोच्चारण की पवित्र ध्वनियों के बीच जब दूल्हा-दुल्हन ने एक-दूसरे को वरमाला पहनाई, तो “राम-राम जय राजा राम” और “मंगल भवन अमंगल हारी” जैसे मंगल गीतों से वातावरण आध्यात्मिक बन उठा। इसी बीच वायर रिगिंग सिस्टम के साथ हवा में उड़कर शंखनाद करते पंडितों और मशीनों से उड़ते छोटे-छोटे स्मोकिंग बबल्स ने वातावरण में ऐसा जादुई माहौल सजाया कि पूरा समारोह किसी सपनों की दुनिया सा प्रतीत हो रहा था।
इस दौरान हर जोड़ों की मुस्कान और परिवार वालों की आंखों की चमक से साफ था कि यहां सिर्फ रस्में नहीं निभाई जा रही, बल्कि उम्मीदों और खुशियों को पूरा किया जा रहा है। अवधेशानंदजी मिशन, लाडली फाउंडेशन और राशि एंटरटेनमेंट की ओर से आयोजित शगुन विवाह उत्सव में 51 आईएएस और पीसीएस अधिकारियों ने शामिल होकर बेटियों की सामाजिक सुरक्षा की जिम्मेदारी ली।
जोड़ों ने कही, 'मन की बात'
"पापा बेलदारी का काम करते हैं। चार भाई-बहनों में मैं सबसे बड़ी हूं और तीन छोटे भाई हैं। आर्थिक परिस्थितियों के चलते दो वक्त की रोटी ही मुश्किल से मिलती है, शादी के लिए तो सोच भी नहीं सकते थे। इस समारोह ने परिवार की चिंता दूर कर दी।। ऐसी शादी होगी ये तो मैंने सपने में भी नहीं सोचा था।"
-चांदनी, वधु
चार बहनों में सबसे बड़ी हूं। पापा सिलाई का काम करते हैं और आर्थिक तंगी के बीच शादी घरवालों के लिए बड़ी जिम्मेदारी और चिंता थी। बीए एलएलबी कर रही हूं और पढ़ाई जारी रखकर परिवार को सहयोग दूंगी। ऐसी शादी तो मैंने कभी देखी भी नहीं है जैसी मेरी हो रही है।
अनुष्का, वधु
मैं शादी पर ना तो खुद ज्यादा खर्च करना चाहता था और ना ही लड़की वाले इस स्थिति में थे। शादी तय होने के बाव भी आर्थिक हालात के चलते नहीं कर पा रहे थे। लड़की के पिताजी ने इस समारोह के बारे में बताया तो हम लोगों ने यहां शादी करने का फैसला ले लिया। मुझे ये सब अब भी सपने जैसा लग रहा है।
विशाल, वर
सामूहिक विवाह का नजारा अद्भुत
मैं इस अद्भुत कार्यक्रम का हिस्सा बनकर सौभाग्यशाली महसूस कर रही हूं। कई सामूहिक विवाह देखें हैं, लेकिन आज का नजारा अद्भुत है। जिस जगह पर करोड़पति परिवारों के बच्चों की शादियां होती हैं, वहां जरूरतमंद परिवारों के बच्चों के सपने साकार हुए। संस्थाएं सामूहिक विवाह खानापूर्ति की तरह करती हैं, लेकिन आज 51 बेटियों को जिस सम्मान और गरिमा के साथ शादी के बंधन में बंधने का मौका मिला है इसके लिए आयोजनकर्ताओं का आभार और साधुवाद।
-रेखा गुप्ता, मुख्यमंत्री।
जरूरतमंद परिवारों के लिए यह अद्वितीय प्रयास
इस सामूहिक उत्सव का दृश्य ना केवल रमणीक है, बल्कि उत्साहित करने वाला है। शादी समारोह एक पवित्र संस्कार है, लेकिन आज इससे कई कुरीतियां जुड़ गई हैं। बेटियों की शादी में कई परिवार ऐसे आर्थिक बोझ में दब जाते हैं तो कभी उबर नहीं पाते। यह पहल सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहे परिवारों के लिए अद्वितीय प्रयास है।
-रामनाथ कोविंद, पूर्व राष्ट्रपति, शालिनी देवरानी।
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