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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 18, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

साहित्य हमेशा जीवित रहता है : डॉ. महेश शर्मा

By JagranEdited By:
Published: Thu, 18 May 2017 09:50 PM (IST)

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली : व्यक्ति का जीवन क्षणिक या कुछ वर्षो का हो सकता है, लेकिन साहित्य का, पु

साहित्य हमेशा जीवित रहता है : डॉ. महेश शर्मा
साहित्य हमेशा जीवित रहता है : डॉ. महेश शर्मा

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली : व्यक्ति का जीवन क्षणिक या कुछ वर्षो का हो सकता है, लेकिन साहित्य का, पुस्तक का जीवन छोटा या बड़ा नहीं होता है। वह हमेशा जीवित रहता है। उक्त बातें केंद्रीय संस्कृति मंत्री डॉ. महेश शर्मा ने बुधवार को ¨हदी भवन में दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी बोर्ड द्वारा आयोजित लेखकों के सम्मान समारोह के अवसर पर कही। इस अवसर पर इंडियन पब्लिक लाइब्रेरी मूवमेंट के साथ दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी ने समझौता किया, जिससे पुस्तकालयों में स्वच्छता एवं पुस्तकों की लोकप्रियता को बढ़ावा मिल सके।

डॉ. महेश शर्मा ने कहा कि पुस्तक अस्तित्व में आने के बाद समाज की धरोहर बन जाती है। मैं बचपन में इस लाइब्रेरी में आकर पढ़ता था। विशिष्ट अतिथि लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ के कुलपति प्रो. रमेश पांडेय ने कहा कि किसी भी सम्मान का अधिकारी वही व्यक्ति होता है, जिसने अपने लेखन को आत्मसात किया हो। केंद्रीय मंत्री ने संस्कृति मनीषी सम्मान 2016 के तहत सोहनलाल रामरंग तथा तेजपाल धामा को डेढ़ लाख रुपये का चेक, अंग वस्त्र तथा प्रशस्ति पत्र प्रदान किया। महर्षि दधीचि सम्मान 2016 के तहत रविचंद्र गुप्ता की अनुपस्थिति में उनकी पुत्री सारिका गर्ग को डेढ़ लाख रुपये का चेक और अंग वस्त्र तथा प्रशस्ति पत्र प्रदान किया। साहित्य श्री कृति सम्मान 2016 शिवदास पांडेय को दिया गया। उन्हें एक लाख रुपये का चेक, अंग वस्त्र तथा प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. राम गोपाल शर्मा दिनेश ने की। उन्होंने कहा कि दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी बोर्ड ने भारतीय संस्कृति के मौन साधकों को खोजकर समाज के सामने उनकी साधना का परिचय कराया है।

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