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    तीन खेमे में बटी है Rajasthan Royal! राहुल द्रविड़ की चुप्पी बयां कर रही अनकही कहानी

    Updated: Sat, 30 Aug 2025 11:12 PM (IST)

    राजस्थान रॉयल्स के हेड कोच के रूप में राहुल द्रविड़ का बाहर होना सतही तौर पर जितना दिखता है उससे कहीं ज्यादा है। क्योंकि आईपीएल फ्रेंचाइजी इस समय नेतृत्व संकट से जूझ रही है। टीम तीन खेमों में बट गई है। पहला संजू सैमसन के साथ है। दूसरा रियान पराग के साथ और तीसरा यशस्वी जायसवाल के साथ है।

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    तीन खेमे में बटी है राजस्थान रॉयल्स। फाइल फोटो

     नई दिल्ली, प्रेट्र। बड़ा रोल ऑफर किया गया, लेकिन फिर भी छोड़ने का फैसला। राजस्थान रॉयल्स के हेड कोच के रूप में राहुल द्रविड़ का बाहर होना सतही तौर पर जितना दिखता है उससे कहीं ज्यादा है। क्योंकि आईपीएल फ्रेंचाइजी इस समय नेतृत्व संकट से जूझ रही है। उनके फैसले शायद पूर्व भारतीय कप्तान की मंजूरी के अनुरूप नहीं थे।

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    द्रविड़ पिछले साल ही फ्रेंचाइजी से जुड़े थे, लेकिन उन्होंने टीम छोड़ने का फैसला किया है। गौरतलब है कि वे 2011 से 2013 तक बतौर खिलाड़ी राजस्थान रॉयल्स का हिस्सा रहे और उसके बाद 2 वर्षों तक डायरेक्टर और मेंटर की भूमिका में भी रहे। शनिवार को रॉयल्स ने साफ लिखा था कि फ्रेंचाइजी की संरचनात्मक समीक्षा के हिस्से के रूप में राहुल को एक व्यापक पद की पेशकश की गई थी, लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार नहीं करने का फैसला किया।

    द्रविड़ को बांधने की थी तैयारी

    हालांकि, असल बात यह है कि द्रविड़ को जो पदोन्नति दी जा रही थी, वह दरअसल उन्हें मुख्य टीम से जुड़ी रणनीतिक निर्णय प्रक्रिया से दूर करने वाला कदम था। एक अनुभवी भारतीय कोच ने बताया कि अगर आपने कभी किसी आईपीएल टीम के साथ काम किया हो तो एक बात जान लें। जब भी हेड कोच को व्यापक रोल ऑफर किया जाता है तो यह सजा वाली पदोन्नति होती है। इसका मतलब है कि अब आपके पास टीम बिल्डिंग की असली प्रक्रिया में कोई भूमिका नहीं होगी।

    तीन खेमे में बटी है टीम

    लंबे समय से कप्तानी कर रहे संजू सैमसन पहले से ही बाहर होने की कगार पर हैं और 2025 सीजन में नौवें स्थान पर रहने वाली टीम को अब एक नए फुल-टाइम कप्तान पर फैसला करना होगा। असम से उभरे सबसे बड़े खेल सितारे रियान पराग ने पिछले सीजन में सैमसन की अनुपस्थिति (फिटनेस कारणों से) में टीम की कप्तानी की थी।

    माना जा रहा है कि वह फुल-टाइम कप्तानी की दौड़ में सबसे आगे हैं। सवाल यह है कि जब टीम में उनसे कहीं ज्यादा उपलब्धियों वाले खिलाड़ी यशस्वी जायसवाल मौजूद हैं तो क्या द्रविड़ वास्तव में रियान को कप्तान बनाने के मामले में मैनेजमेंट के साथ एक पेज पर थे? यह भी याद रखने की बात है कि ध्रुव जुरेल को दलीप ट्रॉफी में सेंट्रल जोन का नेतृत्व करना था, लेकिन बीमारी के कारण उन्हें हटना पड़ा।

    द्रविड़ की गरिमापूर्ण चुप्पी

    इस साल के प्रदर्शन के बावजूद यह मानना मुश्किल है कि फ्रेंचाइजी मैनेजमेंट विश्व कप जीताने वाले कोच को सिर्फ एक सीजन के बाद ही बाहर करना चाहता था? खासकर तब जब टीम अपने कप्तान सैमसन को भी मिस कर रही थी। द्रविड़ से उम्मीद है कि वे गरिमापूर्ण चुप्पी साधे रहेंगे लेकिन, जो लोग पिछले सीजन से रॉयल्स पर नजर रखे हुए हैं, उनका मानना है कि फ्रेंचाइजी के थिंक-टैंक द्वारा लिए जा रहे कई निर्णय द्रविड़ की योजनाओं से मेल नहीं खा रहे थे।

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