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    CG News: रायपुर में पकड़ा गया बहरूपिया पुलिसकर्मी, नकली वर्दी और नकली बंदूक के दम पर ऐसे करता था उगाही

    Updated: Fri, 04 Apr 2025 04:24 PM (IST)

    रायपुर के देवेंद्र नगर में पुलिस की वर्दी पहनकर रुपये मांगने वाले बहरूपिए को डायल 112 ने पकड़ा। आरोपी ने पुलिस की वर्दी में लोगों से पैसे मांगे लेकिन शक होने पर वह पकड़ा गया और उसने बताया कि वह बहरूपिया है। वहीं लोन दिलाने के नाम पर ठगी का मामला भी सामने आया जिसमें आरोपियों ने कागजी कार्रवाई के बाद आधी राशि ही दी और बाकी रकम हड़प ली।

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    रायपुर में पकड़ा गया फर्जी पुलिस (फोटो सोर्स- जेएनएन)

    जेएनएन, छत्तीसगढ़। रायपुर के देवेंद्र नगर इलाके में पुलिस की वर्दी पहनकर लोगों से रुपये मांगने वाले एक बहरूपिए को डायल 112 की टीम ने पकड़ लिया है। आरोपी ने पुलिस की वर्दी पहनी थी, कंधे पर दो स्टार और कमर में पिस्टल केस भी टंगा था।

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    पूछताछ में खुला सच

    जब डायल 112 के कर्मचारियों को आरोपी की हरकतों पर शक हुआ, तो उन्होंने उसे पूछताछ के लिए रोका। इस दौरान आरोपी ने खुलासा किया कि वह कोई अपराधी नहीं है, बल्कि एक बहरूपिया है। वह जीवनयापन के लिए पुलिस की वर्दी पहनकर लोगों से पैसे मांगता था।

    पुलिस कर रही है जांच

    देवेंद्र नगर थाना पुलिस अब आरोपी से पूछताछ कर रही है। पुलिस यह जांच रही है कि क्या आरोपी ने पहले भी इस तरह की वर्दी पहनी थी या किसी अपराध में शामिल रहा है। इसके अलावा, पुलिस यह भी जानने की कोशिश कर रही है कि आरोपी ने यह वर्दी और स्टार कहां से प्राप्त किए।

    रायपुर में लोन दिलाने के नाम पर ठगी का मामला

    रायपुर में लोन दिलाने के नाम पर करोड़ों रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। आरबी ग्रुप स्पर्श एडवायजरी के संचालक और कर्मचारियों पर एक करोड़ तीन लाख से अधिक की धोखाधड़ी का आरोप लगा है।

    आरोपियों ने आधी राशि ही दी

    शिकायतकर्ता त्रिभुवन सिंह ने कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराई कि उसने लोन के लिए आरबी ग्रुप से संपर्क किया था। आरोपियों ने लोन दिलाने का वादा किया और कागजी कार्रवाई पूरी करवाई, लेकिन जब लोन स्वीकृत हुआ, तो आरोपियों ने पांच बैंकों से लोन लिया और केवल आधी राशि त्रिभुवन को दी, बाकी पैसे अपने खातों में ट्रांसफर कर लिए।

    जांच में सामने आया और धोखाधड़ी

    जांच के दौरान पता चला कि आरोपियों ने अन्य लोगों के नाम पर भी लोन लिया और वही तरीका अपनाया। आरोपियों ने त्रिभुवन और अन्य लोगों को सिर्फ आधी राशि दी और बाकी रकम खुद हड़प कर ली।

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