CG Lok Sabha Chunav 2024: घर में रखा है पिता का शव, बेटा जेल में बंद...मातम के बीच परिवार के सदस्यों ने डाला वोट
7 मई यानी मंगलवार को तीसरे चरण के बीच संसदीय सीट सरगुजा ( Chhattisgarh lok sabha chunav 2024 ) के गांव लहपटरा में एक ऐसा परिवार है जिसके घर में मातम पसरा हुआ है और उसके बावजूद वह मतदान करने आए है। दरअसल इस परिवार के मुखिया यानी पिता की उसके बेटे ने ही पीट-पीट कर हत्या कर दी। पुलिस आरोपी बेटे को सोमवार को गिरफ्तार कर चुकी है।

जागरण न्यूज डेस्क, अंबिकापुर। CH lok Sabha Election 2024 News: छत्तीसगढ़ की सात लोकसभा सीटों पर आज वोटिंग हो रही है। मंगलवार को तीसरे चरण के लिए छग की रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, कोरबा, रायगढ़, जांजगीर-चांपा व सरगुजा पर मतदान हो रहा है। इस बीच संसदीय सीट सरगुजा के गांव लहपटरा में एक ऐसा भी परिवार है, जिसके घर में मातम पसरा हुआ है और उसके बावजूद वह मतदान करने आए है।
पिता का घर में पड़ा है शव, लेकिन..
दरअसल, इस परिवार के मुखिया यानी पिता की उसके बेटे ने ही पीट-पीट कर हत्या कर दी। पुलिस आरोपी बेटे को सोमवार को गिरफ्तार कर चुकी है। एक जगह घर पर पिता का शव पड़ा हुआ है तो वहीं बेटा जेल में बंद है। इसके बावजूद इस परिवार के सदस्यों ने मतदान करना बेहद जरूरी कार्य समझा। मन में पीड़ा और उदास चेहरों के साथ सुबह-सुबह मतदान केंद्र पहुंच कर सभी ने वोट किया।
मतदान केंद्र में परिजनों को देख गांव वाले हुए हैरान
जब परिवार के सदस्य मतदान केंद्र पहुंचे तो वहां मौजूद लोग ये देख अवाक रह गए। गांववालों को यकीन ही नहीं हो रहा था कि जिस परिवार के मुखिया की बेटे ने हत्या कर दी हो उस परिवार का कोई सदस्य मतदान करने कैसे पहुंच गए। गांव के लोगों ने उनकी भावनाओं का सम्मान किया।
क्या है पूरा मामला?
लहपटरा में मुलसाय रजक का बेटा बंटी रजक नशेड़ी था। वह अक्सर शराब का सेवल किया करता था। वोट से एक दिन पहले बंटी ने अपने पिता मुलसाय से शराब पीने के लिए पैसे मांगे। पैसे न मिलने पर बंटी गुस्से में आ गया और उसने अपने ही पिता की पीट-पीट कर हत्या कर दी। घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस बंटी को गिरफ्तार किया। अभी मुलसाय के शव का पोस्टमार्टम और पुलिस जांच होगी।
परिवार ने किया मताधिकार का इस्तेमाल
घर की स्थिति ऐसी होने के बावजूद मुलसाय परिवार अपना मताधिकार नहीं भूला और वोट किया। परिवार वालों का कहना है कि मजबूत राष्ट्र के लिए लोकतंत्र के महापर्व मतदान में सभी की भागीदारी जरूरी है। मुखिया की हत्या हो गई लेकिन हमने मतदान किया। परिजनों का कहना है कि पुलिस जांच और अंतिम संस्कार में व्यस्त हो जाने पर मतदान के लिए समय नहीं मिलता।
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