नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) योजना कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) की प्रमुख योजना है जिसे कर्मचारी भविष्य निधि और विविध प्रावधान अधिनियम, 1952 के तहत कवर किया जाता है। ईपीएफओ या कर्मचारी भविष्य निधि में व्यक्ति के वेतन का कुछ हिस्सा योगदान के रूप में जमा होता है। एक कंपनी में जब कम से कम 20 लोग काम कर रहे हैं तो उस कंपनी को EPFO बैलेंस काटना जरूरी होता है। एक कर्मचारी ईपीएफ के लिए अपने वेतन का 12 फीसद योगदान देता है, जबकि एक नियोक्ता अन्य 12 फीसद का भुगतान करता है।

अपने प्रोविडेंट फंड के बारे में जानिए कुछ जरूरी बातें-

भविष्य निधि (पीएफ) संख्या: किसी कंपनी में काम करने वाले कर्मचारी को एक भविष्य निधि (पीएफ) नंबर मिलता है। यह एक यूनिक नंबर होता है जो कर्मचारी के दूसरे कंपनी में जाने पर बदल जाता है।

यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (यूएएन): पीएफ अकाउंट नंबर की तरह यूएएन नंबर भी हर कर्मचारी को मिलता है। के जरिए आप अपने अकाउंट का बैलेंस कहीं से भी चेक कर सकते हैं, साथ ही पासबुक और यूएएन कार्ड भी डाउनलोड कर सकते हैं। एक कर्मचारी जब किसी कंपनी को बदलता है, तो 12-अंकों वाला यूएएन समान रहता है। पीएफ यूएएन नंबर बैलेंस चेक के लिए काम आता है।

ईपीएफओ मेंबर: एक कर्मचारी जो अपने ईपीएफ खाते में योगदान दे रहा है, ईपीएफओ उसे 'सदस्य' मानता है। ईपीएफ नियमों के अनुसार, कोई भी सदस्य या कर्मचारी जिसका मासिक वेतन 15,000 रुपये से कम है, वह ईपीएफ योजना का सदस्य है और ईपीएफओ के दायरे में आता है। अधिक वेतन वाले सदस्य भी इस योजना में शामिल हो सकते हैं।

पीएफ कॉन्ट्रिब्यूशन: एक कर्मचारी ईपीएफ के लिए अपने वेतन का 12 फीसद योगदान देता है, जबकि एक नियोक्ता अन्य 12 फीसद का भुगतान करता है।

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Posted By: Nitesh

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