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    PLI Scheme की दिखने लगी चमक, मिली तीन लाख से ज्यादा नौकरियां; अरबों का हुआ निवेश

    Production Linked Incentive Scheme 2023 PLI स्कीम के नतीजे दिखने लगे हैं। इस योजना के तहत तीन लाख से भी ज्यादा नौकरियों को जनरेट किया है। वहीं विदेश से आने निवेश में भी इजाफा देखा गया है। (फाइल फोटो)

    By Sonali SinghEdited By: Sonali SinghUpdated: Mon, 06 Feb 2023 08:40 PM (IST)
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    Production Linked Incentive Scheme India 2023 Benefits, See Details

    नई दिल्ली, बिजनेस डेस्क। भारत में उत्पादन से जुड़े प्रोत्साहन यानी कि PLI Scheme का लाभ अब दिखने लगा है। नीति आयोग के सीईओ परमेश्वरन अय्यर के मुताबिक, PLI योजना के तहत 45,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश मिला है और तीन लाख नौकरियां मिली हैं। यह इस बात की तरफ इशारा करता है कि धीरे-धीरे भारत का घरेलू विनिर्माण विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बन रहा है। इन सबके अलावा, 2 लाख करोड़ रुपये का उत्पादन पहले से ही दर्ज किया जा चुका है।

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    क्या है PLI योजना

    घरेलू उत्पादन को बढ़ाने और आयात बिल कम करने के लिए मार्च 2020 में PLI योजना की शुरुआत की गई थी। इस योजना के तहत सरकार कंपनियों को भारत में बने प्रोडक्ट की बिक्री के आधार पर इंसेंटिव देती है। योजना का उद्देश्य घरेलू कंपनियों को देश में अपना उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करना है।

    इन सबके अलावा, यह विदेशी कंपनियों को भारत में अपना कारोबार स्थापित करने के लिए आमंत्रित भी करती है।

    लगातार बढ़ रहे नए सेक्टर्स

    संसद में पेश की गई आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट के मुताबिक, PLI योजना के तहत इलेक्ट्रिक सेगमेंट की मांग सबसे ज्यादा है। इसका निर्यात 55.1 प्रतिशत की दर से सालाना बढ़ रहा है। इसमें मुख्य रूप से मोबाइल फोन, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स और औद्योगिक इलेक्ट्रॉनिक्स शामिल हैं। वहीं, इसमें ऑटोमोबाइल और ऑटो घटकों, फार्मा, कपड़ा, खाद्य उत्पाद, उच्च दक्षता वाले सौर पीवी मॉड्यूल, उन्नत रसायन सेल सहित कुल 14 सेक्टर्स को शामिल किया गया है।

    दिखने शुरू हो गए हैं परिणाम

    अय्यर के मुताबिक, प्रोत्साहन के रूप में लगभग 800 करोड़ रुपये का भुगतान पहले ही किया जा चुका है और उम्मीद की जा रही है कि मार्च से पहले यह 3,000 करोड़ रुपये से 4,000 करोड़ रुपये के करीब पहुंच जाएगी। इस तरह पीएलआई कार्यक्रम ने पहले ही परिणाम दिखाना शुरू कर दिया है। 2021-22 में सरकार ने 1 लाख करोड़ रुपये के लेन-देन को पूरा करके पहले साल के 88,000 करोड़ रुपये के लक्ष्य को पार कर लिया, जबकि चालू वित्त वर्ष का लक्ष्य 1,62,422 करोड़ रुपये है।

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