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RBI का नया नियम क्या है? जिससे सोना-चांदी के बदले बैंक से लोन लेना अब होगा आसान

Published: Tue, 30 Sep 2025 02:54 PM (IST)

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI New Rule) ने बैंकों के लिए नए निर्देश जारी किए हैं जो 1 अक्टूबर 2025 से ...और पढ़ें

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों को नए निर्देश जारी किए हैं।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों को नए निर्देश जारी किए हैं।

नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों को नए निर्देश जारी किए हैं। जिनमें ब्याज दर, सोने और चांदी के बदले लोन देना और पूंजी विनियमन शामिल हैं।

यह 1 अक्टूबर, 2025 से प्रभावी होंगे। इसके साथ ही, केंद्रीय बैंक ने गोल्ड मेटल लोन, बड़े रिस्क, इंटरग्रुप लेनदेन और लोन जानकारी रिपोर्टिंग पर सार्वजनिक टिप्पणियों के लिए मसौदा दिशानिर्देश भी जारी किए हैं।

सोमवार को एक आधिकारिक बयान में, आरबीआई ने कहा, "आरबीआई ने आज सात निर्देश/परिपत्र जारी किए हैं, जिनमें बैंकों और अन्य विनियमित संस्थाओं पर लागू कुछ मौजूदा निर्देशों/परिपत्रों में संशोधन का प्रस्ताव है।"

दिशानिर्देशों में कहा गया है कि भारतीय रिजर्व बैंक (अग्रिमों पर ब्याज दर) (संशोधन निर्देश), 2025 के तहत फ्लोटिंग रेट लोन के नियमों को संशोधित किया गया है।

वर्तमान में, फ्लोटिंग रेट रिटेल और SME लोन एक बाहरी बेंचमार्क से जुड़े होते हैं, जहां बैंकों को एक स्प्रेड निर्धारित करने की अनुमति होती है।

क्रेडिट जोखिम प्रीमियम के अलावा, इन स्प्रेड को तीन सालों में केवल एक बार ही बदला जा सकता है।

नए नियमों के अनुसार, बैंक अब उधारकर्ताओं को लाभ पहुंचाने के लिए तीन साल से पहले ही स्प्रेड घटकों को कम कर सकते हैं। इसके अलावा, अनिवार्य होने के बजाय, ईएमआई-आधारित व्यक्तिगत लोन में रिवैल्यूएट के समय एक निश्चित दर पर स्विच करने का विकल्प प्रदान करना बैंकों के विवेक पर होगा।

आरबीआई ने कहा, "बैंक उधारकर्ता के लाभ के लिए तीन साल से पहले अन्य स्प्रेड घटकों को कम कर सकते हैं; बैंक अपने विवेकानुसार, रीसेट के समय निश्चित दर पर स्विच करने का विकल्प प्रदान कर सकते हैं"।

सोने और चांदी के बदले लोन देने के संबंध में, भारतीय रिजर्व बैंक (सोने और चांदी के बदले लोन- प्रथम संशोधन निर्देश), 2025, पहले की व्यवस्था को आगे बढ़ाता है, जिसके तहत केवल जौहरियों के लिए ही ऐसे ऋण की अनुमति थी।

अब, विनिर्माण या औद्योगिक प्रसंस्करण में कच्चे माल के रूप में सोने का उपयोग करने वाले उधारकर्ता भी पात्र होंगे। अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों की तरह, टियर 3 और टियर 4 शहरी सहकारी बैंकों को भी ऐसे ऋण प्रदान करने की अनुमति दी गई है।

भारतीय रिजर्व बैंक (बेसल III पूंजी विनियम - अतिरिक्त टियर 1 पूंजी में सतत ऋण उपकरण - विदेशी मुद्रा/विदेश में रुपया मूल्यवर्गित बांड में मूल्यवर्गित उपकरणों के लिए पात्र सीमा) निर्देश, 2025 को भी अधिसूचित किया गया है।

ये क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को छोड़कर अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों के लिए ढांचा प्रदान करना जारी रखते हैं।

1 अक्टूबर, 2025 से प्रभावी होने वाले इन तीन अनिवार्य निर्देशों के अलावा, भारतीय रिजर्व बैंक ने सार्वजनिक प्रतिक्रिया के लिए चार मसौदा दिशानिर्देश भी जारी किए हैं।

गोल्ड लोन (जीएमएल) निर्देश, 2025 के मसौदे में आभूषण निर्माताओं के लिए रिपेमेंट की अधिकतम सीमा को वर्तमान 180 दिनों से बढ़ाकर 270 दिन करने का प्रस्ताव है। आभूषण उत्पादन को आउटसोर्स करने वाले घरेलू गैर-निर्माताओं को भी जीएमएल की अनुमति देने का प्रस्ताव है।

एक अन्य संशोधन है बड़े जोखिम ढांचे (एलईएफ) और इंट्राग्रुप लेनदेन और जोखिम प्रबंधन (आईटीई) पर दिशानिर्देशों में संशोधन का मसौदा, जो विदेशी बैंकों की भारतीय शाखाओं के उनके मुख्यालयों के प्रति जोखिम के विवेकपूर्ण उपचार को स्पष्ट करता है, ऋण जोखिम शमन लाभ प्रदान करता है, और आईटीई सीमा को चुकता पूंजी और आरक्षित निधियों के बजाय टियर-1 पूंजी से जोड़ता है।

इसके अलावा, क्रेडिट सूचना रिपोर्टिंग (प्रथम संशोधन) निर्देश, 2025 के मसौदे के तहत, क्रेडिट संस्थानों को पाक्षिक आधार पर क्रेडिट सूचना कंपनियों को डेटा प्रस्तुत करने के बजाय साप्ताहिक आधार पर डेटा प्रस्तुत करने की आवश्यकता हो सकती है, साथ ही तेजी से डेटा प्रस्तुत करने, त्रुटि सुधार और उपभोक्ता रिकॉर्ड में सीकेवाईसी नंबर कैप्चर करने की आवश्यकता हो सकती है।

इन मसौदा दिशानिर्देशों पर 20 अक्टूबर, 2025 तक टिप्पणियां आमंत्रित की गई हैं।

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