अपना खुद का घर हो, यह हममें से ज्यादातर लोगों का सपना होता है। किसी के लिए भी घर सबसे कीमती संपत्ति होता है। ऐसी संपत्ति जिसमें जीवनभर की पूंजी का निवेश किया जाता है। अथवा होम लोन के जरिए भविष्य की आमदनी का इंतजाम किया जाता है। इसलिए यह स्वाभाविक है कि ऐसी महत्वपूर्ण संपत्ति को विभिन्न प्रकार के जोखिमों से सुरक्षित रखा जाए। घर का बीमा होने से न केवल इसके भौतिक नुकसान और देनदारी से सुरक्षा प्राप्त होती है, बल्कि बीमा पालिसी के मुताबिक वित्तीय देनदारी पूरी करने में भी मदद मिलती है।

बाजार में प्रत्येक व्यक्ति के बजट और जरूरत के हिसाब से गृह बीमा उपलब्ध है। आप स्टेंडर्ड फायर एंड स्पेशल पेरिल्स पालिसी ले सकते हैं। यह आग लगने, बिजली गिरने, विस्फोट, हवाई जहाज गिरने, दंगा या हड़ताल, बाढ़ में डूबने, धंसने भूस्खलन आदि से भवन को हुई क्षति या नुकसान की भरपाई करती है।

अतिरिक्त प्रीमियम भुगतान करके आप भूकंप अथवा आतंकवाद से हुए नुकसान के विरुद्ध भी सुरक्षा प्राप्त कर सकते हैं। पंद्रह लाख रुपये के एक मकान के लिए साल भर की भूकंप सुरक्षा प्राप्त करने के लिए सर्विस टैक्स मिलाकर 500 रुपये का बीमा प्रीमियम देना पड़ेगा। बीस साल तक की दीर्घकालिक सुरक्षा का विकल्प चुनकर आप प्रीमियम में पचास फीसद की रियायत हासिल कर सकते हैं। और भी ज्यादा समग्र सुरक्षा के लिए पैकेज पालिसी के विकल्प मौजूद हैं। इनमें उपरोक्त अग्नि बीमा पालिसी के अलावा प्रत्येक ग्राहक की व्यक्तिगत जरूरतों के अनुसार विभिन्न नुकसानों के विरुद्ध सुरक्षा मिलती है। पैकेज पालिसी के तहत फर्नीचर, बर्तन व व्यक्तिगत घरेलू सामानों की चोरी के विरुद्ध भी सुरक्षा हासिल की जा सकती है। आल रिस्क कवर में ज्वैलरी वा बैगेज की घर या भारत में यात्रा के दौरान कहीं भी चोरी होने पर सुरक्षा मिलती है।

इसके अलावा एयर कंडीशनर, वाशिंग मशीन, कंप्यूटर, टेलीविजन जैसे इलेक्ट्रिकल सामान खराब होने व कीमती कांच का सामान टूटने पर भी कवर मिलता है। मकान मालिक, आश्रित पति/पत्‍‌नी व बच्चों की दुर्घटना में मृत्यु अथवा स्थायी विकलांगता की स्थिति में भी पैकेज पालिसी सुरक्षा प्रदान करती है। कैंसर जैसी गंभीर बीमारी की स्थिति में बकाया होम लोन की अदायगी के लिए भी बीमा सुरक्षा हासिल की जा सकती है। घर में आए किसी बाहरी व्यक्ति के साथ दुर्घटना होने पर उसे हुए नुकसान की भरपाई भी पैकेज पालिसी में संभव है। यह आप पर निर्भर है कि आप उपरोक्त में से कुछ स्थितियों के विरुद्ध बीमा कवरेज चाहते हैं या सभी स्थितियों के लिए। जितने ज्यादा विकल्पों को आप अपनाएंगे, उतना ही ज्यादा प्रीमियम में छूट मिलेगी। रिलायंस जनरल इंश्योरेंस कुछ अतिरिक्त डिस्काउंट भी प्रदान करती है। जैसे कि सालाना पांच फीसद का रीन्यूअल डिस्काउंट, तथा कम दावे के लिए लो क्लेम डिस्काउंट। हेल्थगेन इंश्योरेंस पालिसी प्रीमियम में लायलटी डिस्काउंट भी मिलता है, बशर्ते दोनों पालिसियां हमसे ली गई हों। बीमा कराने से पहले कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना चाहिए। बीमा पालिसी प्रपोजल फार्म के आधार पर दी जाती है। इसलिए इस फार्म को सही तरीके से भरा जाना चाहिए।

जिसके नाम पर पालिसी हो उसके इस पर हस्ताक्षर होने चाहिए। कृपया प्रपोजल फार्म को खुद भरने पर जोर दें। क्योंकि कोई भी गलत सूचना क्लेम के वक्त समस्या खड़ी कर सकती है। भवन की लागत का आकलन करते वक्त जमीन की लागत उसमें नहीं जोड़ी जानी चाहिए। क्योंकि भवन को नुकसान होने पर भी जमीन की कीमत कम नहीं होती। इसलिए केवल भवन के ढांचे का ही मूल्यांकन जरूरी है। खुद की रिहाइश वाले मकान का बीमा कराते वक्त मकान मालिक मकान के ढांचे और उसमें मौजूद सामान सभी का बीमा करा सकता है।

जबकि किरायेदार को केवल मकान में मौजूद सामान का बीमा कराने का अधिकार है। आभूषणों की लागत वर्तमान बाजार मूल्य पर आंकी जानी चाहिए, न कि खरीद मूल्य के आधार पर। ज्वैलरी के मूल्यांकन के साथ किसी स्टेंडर्ड ज्वैलर की मूल्यांकन रिपोर्ट लगाना बेहतर रहता है। इससे दावे के वक्त किसी तरह की गलतफहमी की संभावना नहीं रहती। नुकसान के बाद बीमा कंपनी को तत्काल इसकी सूचना दी जानी चाहिए, ताकि वह सर्वेयर के जरिए नुकसान का आकलन करा सके।

चोरी से हुए बड़े नुकसान की दशा में पुलिस को तुरंत इसकी सूचना देनी चाहिए और एफआइआर लिखाई जानी चाहिए। इसकी एक प्रति सर्वेयर को प्रदान की जानी चाहिए। उपकरणों के खराब होने पर रिपेयर के ओरिजनल बिल जमा कराना आवश्यक है।

राकेश जैन

चीफ एक्जीक्यूटिव आफीसर, रिलायंस जनरल इंश्योरेंस

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस