धीरेंद्र कुमार, नई दिल्ली। ये हर किसी का अनुभव रहा है। आप एक डॉक्टर के पास जाते हैं तो वह डाइग्नोस करता है और कुछ जीवन-शैली पर आधारित सलाह देता है, जैसे- कसरत करना, खान-पान में सुधार करना, वगैरह। ये सुनकर अक्सर मरीज निराश हो जाते हैं। अब बात करते हैं एक दूसरे तरह के डाक्टर की जो, चार टेस्ट और एक स्कैन कराने के लिए कहता है, और ऊपर से कई महंगी दवाएं भी दे देता है।

असल दुनिया में जब मरीज को लगता है कि उसके साथ कुछ गड़बड़ है और कोई उसपर ध्यान नहीं दे रहा, तो स्वाभाविक होता है कि दूसरी तरह का डाक्टर ज्यादा पसंद किया जाता है। ये मानव स्वभाव है। हम अपनी सभी मुश्किलों के प्रति गंभीर होना चाहते हैं।

मार्केट का दबाव

जब हमें लगता है कि हमारी परेशानियों को लेकर 'कुछ किया जा रहा है', तो हम महसूस करते हैं कि हमारा ख्याल रखा जा रहा है। बहुत से लोग तो जब पहले वाले डाक्टर के अनुभव से गुजरते हैं, तो वो उसे फीस देना भी पसंद नहीं करते, क्योंकि डाक्टर ने तो कुछ किया ही नहीं! नतीजा ये होता है कि मार्केट का दबाव, दोनों डाक्टरों को, दूसरी तरह का डाक्टर बनने की तरफ धकेलता है। क्योंकि डाक्टरी के पहले वाले माडल में न तो ज्यादा आर्थिक सफलता है और न ही ग्रोथ। इसके बावजूद कि पहले वाला डाक्टर ही आपको असली हेल्थकेयर सर्विस देता है।

सुधारा जा सकता है पोर्टफोलियो

मेडिकल स्थिति और सलाह की यह पूरी गतिविधि पर्सनल फाइनेंस पर पूरी तरह से फिट बैठती है। मैंने खुद कई बार दोस्तों और परिवार के साथ निजी तौर पर इसका सामना किया है। जब भी कोई जानने वाला मुझे किसी निवेश सलाह के लिए आग्रह करता है तो मैं उनकी निवेश जरूरतों को देखता हूं। उस व्यक्ति की आर्थिक जरूरतों को सुनता हूं, और फिर उन्हें बताता हूं कि सबकुछ ठीक है। आप जो कर रहे हैं, उसे करते रहिए। कुछ नया करने की जरूरत नहीं है।

इसके बाद अक्सर, मैं उनके चेहरे पर निराशा के भाव देखता हूं। उन्हें लगता है कि मैं उन्हें सुन ही नहीं रहा था और मैंने उनकी जरूरत को गहराई से समझने की कोई कोशिश ही नहीं की है।उन्हें इस बात का यकीन होता है कि उनका पोर्टफोलियो सुधारा जा सकता है। मगर मुझे ही इस बात की फिक्र नहीं है।

ज्यादा पैसे चाहिए तो बचत कीजिए

कई बार तो इससे भी खराब स्थिति होती है। मैं देख सकता हूं कि वो अपने वित्तीय लक्ष्य हासिल नहीं कर पाएंगे, मगर उनके चुने निवेशों में कुछ भी गलत नहीं होता। सिवाए इसके कि उन्हें और ज्यादा निवेश करने की जरूरत होती है। लोगों को ज्यादा बचत और निवेश करना चाहिए। ये सलाह उन्हें नाराज कर देती है। उन्हें लगता है कि मुझे कोई परवाह ही नहीं है। पर बात सीधी है, अगर आपको ज्यादा पैसे चाहिए तो ज्यादा बचत कीजिए। इस मुश्किल से हर नेकनीयत वित्तीय सलाहकार सामना करता है।

असल में तो इसी मुश्किल का सामना एप्स और वेबसाइट के इन्वेस्टमेंट टूल्स भी करते हैं। इसका नतीजा होता है कि दूसरी तरह का डाक्टर फोकस में आ जाता है। और आपका वित्तीय सलाहकार उस डाक्टर की तरह होता है, जो कई टेस्ट और स्कैन करता है और ऐसी कई बीमारियां ढूंढ-ढूंढ के निकाल देता है जिन्हें अच्छे-खासे इलाज की जरूरत होती है। मिसाल के तौर पर, आपको बैंक या किसी बड़ी कंपनी का ऐसा वित्तीय सलाहकार कभी नहीं मिलेगा जो आपसे कहे कि आपके निवेश के साथ सबकुछ ठीक है, या बहुत थोड़े से सुधार की जरूरत है। क्योंकि इसमें कोई पैसा नहीं है।

निवेशक के लिए इंतजार करना जरूरी

हालांकि, हमें समझना चाहिए कि ये हमारे अपने स्वभाव में है कि कोई जितना ज्यादा काम करेगा, हमें लगेगा कि निवेश के लिए उतना ही ज्यादा अच्छा है। लगातार कुछ किए जाने का पूरा आइडिया असल में काफी भ्रम में डालने वाला है। जब मैं असल एक्टिविटी के बारे में सोचता हूं जिसे करते हुए निवेशक का ज्यादातर समय गुजरना चाहिए, तो वो है, कुछ नहीं। बशर्ते उन्होंने अपना पोर्टफोलियो अच्छी तरह से तैयार किया हो। ज्यादातर लोगों के लिए पूरे जीवन के निवेश के लिए उन्हें कुछ भी करने की जरूरत नहीं होनी चाहिए। निवेश का ज्यादातर काम इंतजार करने का है।

(लेखक वैल्यू रिसर्च आनलाइन डाट काम के सीईओ हैं। ये उनके निजी विचार हैं।)

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Edited By: Siddharth Priyadarshi

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