नई दिल्ली, किशोर ओस्तवाल। डाउ जोंस (Dow Jones) में रिकवरी का अनुसरण करते हुए निफ्टी बीते सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन 11,400 से ऊपर बंद हुआ। इससे पहले डाउ जोंस के गिरने पर बाजार में गिरावट देखी गई थी। हालांकि, हमने कहा था कि बाजार में तेजी बनी रहेगी। हमने अपनी आखिरी रिपोर्ट में यह भी बताया था कि अमेरिका दो लाख करोड़ डॉलर के प्रोत्साहन की घोषणा करेगा और उम्मीद के अनुसार, अमेरिका ने 2.2 लाख करोड़ डॉलर के प्रोत्साहन की घोषणा कर दी है। इससे लिक्विडिटी का फ्लो निश्चित रूप से बाजार को उच्च स्तर पर ले जाएगा।

यह भी पढ़ें (Gold Price: सोना अपने पिछले उच्च स्तर से 5,445 रुपये टूटा, चांदी में आ चुकी है 17,111 रुपये की गिरावट, जानिए भाव)

एफपीआई के व्यवहार के विश्लेषण और केवल आखिरी कारोबारी दिन ही करीब 1800 करोड़ रुपये के शेयर बेचने ने निवेशकों को गिरावट में खरीदारी करने में मदद की। यह स्पष्ट है कि एक्सपायरी डे पर  WVAP की बिक्री कीमतों को कम रखने और मौकों को भुनाने के लिए थी। बाजार ने वहां से यू टर्न लिया और 10,800 से चढ़कर 11,400 पर आ गया। इस तरह केवल पांच से कम सत्रों में 600 अंक की तेजी आई। यह बताता है कि हम अभी भी एक बुल मार्केट में हैं और केवल गिरावट में खरीदने की रणनीति निवेशकों को मदद करेगी।

यूएस फेड द्वारा 2.2 लाख करोड़ डॉलर के प्रोत्साहन को जारी करने की टाइमिंग को भी समझना चाहिए। यह अमेरिकी चुनावों से ठीक पहले किया गया है। 13 लाख करोड़ डॉलर के प्रस्तावित प्रोत्साहन पैकेज में से दो लाख करोड़ का प्रोत्साहन मार्च से सितंबर के बीच आया, जिससे डाउ जोंस 18,000 के निचले स्तर से 28,000 के स्तर तक आ गया। अब इस 2.2 लाख करोड़ डॉलर के प्रोत्साहन के जारी होने के बाद यह निश्चित रूप से कहा जा सकता है कि डाउ नई ऊंचाइयों को छुएगा। डाउ जल्द ही 30,000 के स्तर पर पहुंचेगा, जो कि अब तक का नया उच्च स्तर होगा। जब डाउ नई ऊंचाइयां छुएगा, तो निफ्टी कैसे पीछे रह सकता है। यह कहा जा सकता है कि निफ्टी बहुत जल्द ही नए उच्च स्तर को छुएगा, यह 12,400 के स्तर को पार करेगा।

लेकिन कब..? क्या तेजी अक्टूबर में ही देखने को मिलेगी या नवंबर में आएगी, यह समझना अहम मुद्दा है। दुविधा इस तथ्य के चलते है कि अक्टूबर दूसरी तिमाही के परिणामों का महीना है। वहीं, नवंबर में अमेरिका में चुनाव होने हैं और इसलिए अक्टूबर कारोबार के नजरिए से एक नर्वस महीने से बाहर रह सकता है।

साल दर साल आधार पर दूसरी तिमाही के परिणाम अच्छे नहीं होंगे, क्योंकि कोरोना वायरस महामारी का प्रभाव खत्म नहीं हुआ है। अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे पटरी पर आ रही है, लेकिन यह एक साल पहले की तुलना में अभी काफी दूर है। हालांकि, जब हम तिमाही आधार पर दूसरी तिमाही के परिणामों की बात करें, तो ये पहली तिमाही की तुलना में काफी बेहतर होंगे, क्योंकि कारोबारी दृष्टि से पहली तिमाही एक मृत तिमाही के समान रही थी। इसलिए साल दर साल आधार पर परिणाम खराब दिखेंगे, लेकिन तिमाही दर तिमाही आधार पर ये बेहतर दिखेंगे। लेकिन हमें अपेक्षाओं के साथ तुलना करने की जरूरत है।

आमतौर पर परिणामों से बाजार नहीं दौड़ता है, क्योंकि इनसाइडर ट्रेडिंग होती है। इसलिए यह कहना कठिन है कि बड़ी तेजी अक्टूबर में आएगी। इसी समय अमेरिकी राष्ट्रपति के बारे में अटकलबाजी अक्टूबर में डाउ को पेंडुलम पर रखेगी। इससे निफ्टी भी पेंडुलम पर रह सकता है। अर्थात उच्च अस्थिरता देखने को मिल सकती है। वहीं, 2.2 लाख करोड़ डॉलर का प्रोत्साहन आने से भारी से भारी एफपीआई खरीद हो सकती है। इस तरह निवेशकों को तेजी पर निवेश करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए और गिरावट पर खरीद की रणनीति का अनुसरण करना चाहिए।

दूसरी तिमाही के लिए अच्छे आंकडों का पहला प्रमाण ऑटो कंपनियों से आया है। अगर सितंबर महीने की ऑटो सेल्स को देखें, तो कम से कम तीन कंपनियों ने तो काफी बेहतर प्रदर्शन की घोषणा की है। ये हैं मारुती, टाटा मोटर्स और हीरो मोटर्स। यह शुद्ध रूप से त्योहारी सीजन से पहले डीलर्स से आई ताजा मांग के कारण है। हम इस तथ्य को नहीं भूल सकते कि यहां व्यावहारिक रूप से जुलाई तक कोई सेल्स नहीं थी, क्योंकि डीलर्स के पास कोरोना काल से पहले की बड़ी इन्वेंट्री पड़ी हुई थी। अब डीलर्स को मांग के कारण नई इन्वेंट्री लेने की जरूरत हुई है, तो ऑटो सेल्स में उछाल देखने को मिली है।

साल 2014 से 2016 के बीच यूपी चुनाव, अमेरिकी चुनाव, नोटबंदी आदि कारणों से हर बार बाजार नर्वस रहा था, लेकिन अंत में परिणाम स्वरूप 50 फीसद से अधिक की उछाल भी देखने को मिली थी। वहीं, साल 2016 में भले ही ट्रंप की जीत पर बाजार नर्वस रहा हो, लेकिन वहां बड़ा उछाल भी दिखा था। इसके पीछे एक बड़ा कारण निवेशकों का सतर्क रुख अपनाना है। इस बार भी इतिहास खुद को दोहरा रहा है। कोरोना वायरस महामारी पहले बतायी गई सभी घटनाओं से बड़ी घटना है। अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव परिणाम से जुड़ी घबराहट वास्तव में 2016 में हमने जो देखी थी, उससे दोगुनी है। इसलिए हम यथोचित रूप से मानते हैं कि 2016 में जो हमने देखी, उससे कहीं अधिक बड़ी उछाल आएगी। 13 लाख करोड़ डॉलर का असर अगले पांच साल तक रहेगा। इसलिए हम अगले यूएस चुनाव तक उछाल देखेंगे।

हमारा मानना है कि डाउ 36,000 के स्तर को पार करने के लिए पूरी तरह तैयार है, चाहे जो भी यूएस चुनाव जीते। अगर ट्रंप चुनाव जीतते हें, तो सीधा उछाल देखने को मिलेगा, क्योंकि बाजार के अनुकूल नीतियों के कारण स्ट्रीट ट्रंप के पक्ष में है। अगर ट्रंप नहीं जीतते हैं, तो प्रतिक्रिया स्वरूप 10 फीसद की गिरावट देखने को मिलेगी और इसके बाद फिर से उछाल के साथ डाउ अपने लक्ष्य तक पहुंचेगा। संक्षेप में, हम साल 2021 में डाउ को 36,000 के स्तर पर देखते हैं और जैसा कि पहले कहा गया है, डाउ साल 2024 से पहले 80,000 के स्तर को पार करेगा। इस तरह निवेशक गिरावट में खरीदारी कर और लंबे समय के लिए होल्डिंग कर काफी अच्छा रिटर्न पा सकते हैं।

भारत, चीन और अमेरिका की बदौलत कई सेक्टर्स पटरी पर आ रहे हैं। भारतीय फार्मा सेक्टर में अमेरिकी मांग के कारण काफी उत्साह है। वहीं, स्टील और केमिकल क्षेत्र में चीनी फेक्टर के कारण उत्साह है। स्वयं चीन भारत से भारी मात्रा में केमिकल और स्टील का आयात कर रहा है। जिस तरह से वैश्विक निवेशक जियो प्लेटफॉर्म और रिलायंस रिटेल में निवेश कर रहे हैं, डेटा कंपनीज और एफएमसीजी/रिटेल कंपनियों का भविष्य काफी उज्जवल है। यह वॉलमार्ट जैसी रिटेल क्षेत्र की मल्टीनेशनल कंपनियों के लिए भारत में बड़े स्तर पर रास्ता खोलती है। इसके लिए बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत होगी, जिससे इंफ्रा प्रोजेक्ट्स में बड़ी वैश्विक कंपनियों को बोली लगाने का मौका मिलेगा। इसलिए हमारा फोकस केमिकल, फार्मा, रिटेल, इंफ्रा, केबल, डेटा, आईटी और पैकेजिंग कंपनियों पर होना चाहिए।

(लेखक सीएनआई रिसर्च के सीएमडी हैं। उक्त विचार लेखक के निजी हैं।)

इंडियन टी20 लीग

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस